ताज़ा खबर
 

हर धर्म में है दान का विशेष महत्व, जानिए- क्या है इसका सही तरीका

दान करने से व्यक्ति को संतुष्टि मिलती है। दान को पुण्य का काम माना जाता है।

hands, hands line, hands lines, दान, सीधे हाथ से दान, दान देना, love, love marraige, arrange marriage, lucky line, पामिस्ट्री, विवाह, हस्तरेखा विज्ञान, palmistry, marriage, बृहस्पति और शुक्रसांकेतिक फोटो

जब भी दान की बात है राजा हरिचंद्र, कर्ण का दान आदि का नाम सबसे पहले लिया जाता है। शास्त्रों में दान देने के बारे में विस्तार से बताया गया है। दान के बारे में कहा जाता है कि दान देने के लिए हमें प्रकृति से सीख लेनी चाहिए, जिस तरह वृक्ष परोपकार के लिए फल देते हैं, नदियां परोपकार के लिए फल देती हैं उसी तरह मनुष्य को भी दान करना चाहिए। दूसरों की मदद करके जो शांति हमें मिलती है उसका कोई मूल्य नहीं होता है। हर धर्म में दान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धान करने से इंसान के भीतर त्याग और बलिदान की भावना आती है।

दान करने से व्यक्ति को संतुष्टि मिलती है। दान को पुण्य का काम माना जाता है। शास्त्रों में भी दान का बहुत महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है। इतना ही नहीं दान करने से हमारे द्वारा किए गई जाने-अनजाने पापों में मिलने वाले फल नष्ट हो जाते हैं। दान के महत्व का वेदों और पुराणों में वर्णन किया गया है। कहा जाता है कि जिस व्यक्ति के हृदय में दया नहीं होती है वही दान नहीं कर सकता है। दान के बारें कहा जाता है कि दान हमेशा सीधे हाथ से ही करना चाहिए। सीधे हाथ से किए गए दान को शुभ माना जाता है।

दान देने के बारे में ज्योतिषियों का कहना है कि हमें उसी चीज का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसका हम इस्तेमाल करते हैं। जैसे कि फटे हुए वस्त्रों का दान कभी नहीं करना चाहिए। आप जैसे वस्त्र पहनते हैं, वैसे ही वस्त्रों का दान करना चाहिए। वस्त्रों का दान करने से आर्थिक स्थिति हमेशा अच्छी रहती है। दान हमेशा उस वस्तु का करना चाहिए, जो दान में ली गई वस्तु का इस्तेमाल करे। धातुओं का दान करने के बारे में कहा जाता है कि धातुओं का दान करने से आई हुई विपत्ति टल जाती है। वहीं अनाज का दान करने जीवन में अन्न का अभाव नहीं रहता है। बिना पकाए हुए अनाज का दान करना हमेशा अच्छा माना जाता है।

दान करने के कई मनोवैज्ञानिक लाभ भी मिलते हैं। दान करने से मन और विचारों में खुलापन आता है। दान से मोह की शक्ति कमजोर पड़ती है। कहा जाता है कि हर तरह के लगाव और भाव को छोड़ने की शुरुआत दान और क्षमा से ही होती है। दान करने से दान करने वाले व्यक्ति के अहम और मोह का त्याग होता है। दान करने से मन की कई ग्रंथियां खुलती हैं। दान करने से अपार संतुष्टि मिलती है। दान करने से कई तरह के दोष मिट सकते हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 सावन के महीने में नवविवाहित स्त्रियां क्यों चली जाती हैं मायके, क्या है इसकी पीछे की मान्यता
2 सावन में ऐसे करें भगवान शिव की आराधना
3 50 साल बाद बना है ऐसा संयोग सोमवार से सावन शुरू और सोमवार पर खत्म
ये पढ़ा क्या?
X