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Eid-ul-Fitr 2020: चांद के दीदार से शुरू होता है इस्लामी कैलेंडर, जानें इस पाक पर्व के बारे में और भी खास बातें…

ईद उल फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मीठे पकवान बनाए जाते हैं। खासतौर पर इस दिन सेंवईं बनती हैं। लोग इस खास पर्व पर एक दूसरे से गले मिलकर अपने गिले शिकवे दूर करते हैं।

Eid-ul-Fitr 2020: इस दिन खुदा का शुक्रिया अदा किया जाता है और जरूरतमंदों के लिए रकम दान की जाती है। जिसे जकात कहते हैं।

Eid ul Fitr 2020: रमजान का पाक महीना खत्म होने के बाद ईद मनाई जाती है। और नए महीने शव्वाल की शुरुआत होती है। इसके पहले दिन ही ईद मनाई जाती है। मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए ये पर्व बेहद ही खास होता है। जिसे ईद-उल-फितर के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी ) के अनुसार रमजान के 10वें महीने यानी शव्वाल की पहली तारीख को ईद होती है। इस्लामी कैलेंडर में ये महीना चांद देखने के साथ शुरू होता है।  जो इस साल 25 मई को मनाए जाने की उम्मीद है। अगर आज यानि कि 24 को चांद का दीदार हुआ तब सोमवार 25 मई को ईद पड़ेगी।

ईद उल फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मीठे पकवान बनाए जाते हैं। खासतौर पर इस दिन सेंवईं बनती हैं। लोग इस खास पर्व पर एक दूसरे से गले मिलकर अपने गिले शिकवे दूर करते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगी जाती है। इस दिन खुदा का शुक्रिया अदा किया जाता है और जरूरतमंदों के लिए रकम दान की जाती है। जिसे जकात कहते हैं।

Eid ul Fitr 2020 Date, Moon Sighting in India: Follow Update here

ईद का इतिहास: मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ। माना जाता है कि इस दिन पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई जीती थी। इस जीत की खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया, इसी कारण इस दिन को मीठी ईद या ईद उल फितर के रुप में मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत 2 यानी 624 ईस्वी में पहली बार ईद-उल-फितर मनाया गया था।

Eid-ul-Fitr 2020 Moon Sighting LIVE Updates

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Highlights

    21:30 (IST)24 May 2020
    किसे कहते हैं नीयत

    नमाज शुरू करने से पहले ये किस उद्देश्य से पढ़ी जा रही है इसलिए ये अपने कानों को सुनाई दे, इतनी आवाज में कहा जाता है। इसी को नीयत कहते हैं। जुमे की नमाज की तुलना में ईद उल फितर की नमाज में 6 ज्यादा तकबीरात (अल्लाहु अकबर) होती है। पूरी नमाज के पांच मुख्य हिस्से होते हैं। ईद की नमाज में इमाम द्वारा खुतबा नमाज के बाद पढ़ा जाता है, जबकि शुक्रवार की नमाज में खुतबा नमाज अदा करने से पहले पढ़ा जाता है।

    20:57 (IST)24 May 2020
    जंग-ए-बदर के बाद मनाई गई थी ईद

    मुस्लिम समुदाय के पैगम्बर हजरत मुहम्मद हैं। 624 ईस्वी में बद्र के युद्ध में हजरत मुहम्मद विजयी हुए थे। इसके उपलक्ष्य में ईद का त्यौहार मनाया जाता है। पहली ईद उल-फ़ितर पैगम्बर मुहम्मद ने सन 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी। इस दिन मीठे पकवान बनाए और खाए गए थे और अपने से छोटों को ईदी दी गयी थी।

    20:42 (IST)24 May 2020
    कोरोना की वजह से लोग ईद पर भी गले नहीं मिल पाएंगे

    रमजान में 30 रोजे रखने के बाद मुस्लिम समुदाय ईद को सेलिब्रेट करते हैं। इसे बड़े ही उल्लास और प्रेम के साथ मनाया जाता है। ईद की तैयारियां बहुत पहले से शुरू कर दी जाती है, रोजे के दौरान ही रोजे खोलने वालों के लिए मार्केट में तरह-तरह के व्यंजन उपलब्ध कराये जाते है, लोग अपने घर में ऐसे ही व्यंजन बनाकर तैयार करते हैं। ईद में सभी लोग एक दूसरे के गले मिल कर मुबारक बाद देते हैं। घर में बच्चों और बड़ों के द्वारा नये- नये कपड़े पहने जाते है। लेकिन इस बार कोरोना की वजह से बाजार के साथ समुदाय में भी रौनक नहीं है। ना ही वैसा उत्साह बना हुआ है। इस ईद कोई गले भी नहीं मिल पाएगा।

    20:08 (IST)24 May 2020
    इस्लामी कैलेंडर के 10वें महीने में मनायी जाती है ईद

    रमजान माह इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना होता है। यहां पर इस्लाम एक चंद्र कैलेंडर है जिसका अर्थ है, हर महीना नया चाँद के साथ शुरू होने वाला। इस्लामी कैलेंडर ” एम वी इ ” के रूप में जाना जाता है और यह सामान्य कैलंडर की तुलना में ग्यारह दिन कम होता हैं । ईद-उल-फितर और ईद-उल-अधा दोनों एक दूसरे से अलग भी हैं। ईद-उल-अधा को बड़ी ईद के रूप में जाना जाता है।

    19:44 (IST)24 May 2020
    ईद के नमाज पर जाने से पहले होती है जकात

    इस्लाम में जकात एक महत्वपूर्ण पहलू है। जिसमें हर मुसलमान को धन, भोजन और कपड़े के रूप में कुछ न कुछ दान करने के लिए कहा गया है। कुरान में जकात अल-फित्र को जरूरी बताया है इसे रमजान के अंत में और लोगों को ईद की नमाज पर जाने से पहले दिया जाता है। इससे अल्लाह लोगों को खुशियां अता फरमाते हैं।

    19:18 (IST)24 May 2020
    ईद पर खजूर खाने की भी परंपरा है

    ईद की शुरुआत सुबह दिन की पहली प्रार्थना के साथ होती है। जिसे ईद उल फितर की नमाज कहते हैं।  इसके बाद पूरा परिवार कुछ मीठा खाता है। वैसे ईद पर खजूर खाने की परंपरा है। फिर नए कपड़ें पहन कर ईद की नमाज अदा की जाती है।

    18:43 (IST)24 May 2020
    ईद से पहले फितरा और जकात देना हर हैसियतमंद मुसलमान पर फर्ज होता है

    ईद भाईचारे के त्योहार के तौर पर भी जाना जाता है। इस पाक दिन लोग जो नमाज पढ़ते हैं वह अल्लाह को शुक्रिया करते हैं और कुशल-मंगल रहने की दुआ करते हैं। ईद मुस्लिम समुदाय के लिए अल्लाह से इनाम लेने का दिन होता है। इस दिन लोग स्वादिष्ट पकवान बनाते हैं और नए-नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ने मस्जिद जाते हैं। साथ ही हर किसी को गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। इस दिन हर मुस्लिम का यह कर्तव्य होता है कि वह जरूरतमंदों को दान जरूर दें। रमजान के महीने में ईद से पहले फितरा और जकात देना हर हैसियतमंद मुसलमान पर फर्ज होता है।

    18:26 (IST)24 May 2020
    ईद उल फित्र: अल्लाह की दी हुई पेशकश

    हदीस के अनुसार ईद उल फित्र अल्लाह की दी हुई पेशकश या भेंट हैं। रमज़ान के पूरे महीने रोज़े रख मुस्लिम मन और तन से पवित्र हो जाते हैं और अल्लाह को लगातार याद कर एक आध्यात्मिक संबंध का अनुभव करते हैं। ईद उल फित्र इस अनुभव को और भी यादगार बनाने का काम करता है।

    17:51 (IST)24 May 2020
    साल में दो बार आती है ईद

    हिजरी कैलेंडर के अनुसार ईद साल में दो बार आती है। एक ईद होती है ईद-उल-फितर और दूसरी ईद-उल-जुहा। माना जाता है कि रमजान के महीने में ही शब-ए-कद्र को कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ था।

    16:50 (IST)24 May 2020
    ईद उल फितरः अज्र मिलने का दिन

    ईद उल फितर को मनाने का मकसद ये है कि पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं रोजा रखा जाता है और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं जिसका अज्र मिलने का दिन ही ईद कहलाता है। इस उत्सव को पूरी दुनिया के मुस्लिम लोग बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं। ईद की मुबारक देते हैं।

    15:58 (IST)24 May 2020
    Eid-ul-fitr: ये है इस पाक पर्व का महत्व

    रमजान के पाक माह में व्यक्ति गर्मियों में भूख-प्यास बर्दाश्त करता है, उसी प्रकार जीवन में घटने वाली सभी परिस्थितियों को बर्दाश्त करना होता है। ईद उल-फितर त्याग की भावना समझता है, यह पर्व बताता है कि इंसानियत के लिए अपनी इच्छाओं का त्याग करना चाहिए, ताकि एक बेहतर समाज को बनाया जा सके। हमेशा भाईचारे के साथ रहना चाहिए ताकि हर घर में सुख और शांति रहे।

    15:34 (IST)24 May 2020
    इस बार बाजारों में नहीं है रौनक

    ईद से पहले सजते हैं बाजार और कपड़ों के खरीदारों से आती है रौनक, हालांकि इस बार ऐसा नहीं हो पा रहा है। कोरोना महामारी ने बाजार की रौनक छीन ली है। कुछ बाजार खुल तो गए हैं, लेकिन सोशल डिस्टेसिंग और अन्य तरह के ऐहतियात से लोग खरीदारी नहीं कर रहे हैं। 

    15:03 (IST)24 May 2020
    सहरी और इफ्तार में अंतर

    रमजान के पाक महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है। रोजा रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठकर भोजन कर लेते हैं, इसे सहरी कहा जाता है। इसके बाद रोजा रखने वाले दिनभर कुछ भी नहीं खाते- पीते नहीं हैं। सूर्यास्त होने के बाद रोजा रखने वाले रोजा खोलते हैं, इसे इफ्तार कहा जाता है।

    14:31 (IST)24 May 2020
    Eid 2020: ऐसी होती है ईद मनाने की परंपरा

    ईद की शुरुआत सुबह दिन की पहली प्रार्थना के साथ होती है। जिसे सलात अल-फ़ज़्र भी कहा जाता है। इसके बाद पूरा परिवार कुछ मीठा खाता है। वैसे ईद पर खजूर खाने की परंपरा है। फिर नए कपड़ों में सजकर लोग ईदगाह या एक बड़े खुले स्थान पर जाते हैं, जहां पूरा समुदाय एक साथ ईद की नमाज़ अदा करता है। प्रार्थना के बाद, ईद की बधाईयां दी जाती है। उस समय ईद-मुबारक कहा जाता है। ये एक दूसरे के प्यार और आपसी भाईचारे को दर्शाता है।

    14:01 (IST)24 May 2020
    लॉकडाउन में ऐसे मनेगी ईद

    कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच केरल और जम्मू-कश्मीर में आज ईद मनाई जाएगी। वहीं बाकी पूरे देश में सोमवार 25 मई को ईद-उल-फितर होगी। श्रीनगर में ग्रैंड मुफ्ती नसीर-उल-इस्लाम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चांद दिखा है इसलिए यहां रविवार को ईद मनाई जाएगी। उन्होंने रेड जोन में रहने वाले लोगों से घर में ही ईद की नमाज पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'ग्रीन जोन के लोग कुछ निर्दिष्ट स्थानों पर नमाज अदा कर सकते हैं लेकिन मास्क पहनकर और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ। सिर्फ 10 से 20 लोग ही एक बार में इकट्ठा हों।'

    13:31 (IST)24 May 2020
    हफ्तों पहले शुरू हो जाती है ईद की तैयारियां

    रमजान के दौरान ईद जितना करीब आता जाता है, उसके लिए हफ्तों पहले से तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। नए कपड़ों से लेकर पकवान बनाने तक की तैयारियां होती हैं। इस दौरान उन लोगों को जो गरीब है और सामान नहीं खरीद सकते हैं, उन्हें संपन्न मुस्लिम परिवार अपनी ओर से सामान खरीदकर देते हैं, जिससे उनके घरों में भी ईद की खुशियां आ सकें।

    13:01 (IST)24 May 2020
    Eid-ul-fitr 2020: अपनों को भेजें ये संदेश

    दीपक में अगर नूर ना होता;तन्हा दिल यूँ मजबूर ना होता;मैं आपको “ईद मुबारक” कहने जरूर आता;अगर आपका घर इतना दूर ना होता.ईद मुबारक!

    12:30 (IST)24 May 2020
    ईद के दिन की सुन्नतें

    -सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने के खुद की सफाई और कपड़े वगैरह तैयार -रखनागुस्ल (नहाना) करना - मिस्वाक (दातून) करना- सबसे उम्दा और साफ कपड़े पहनना। (नए या पुराने, लेकिन साफ)- इत्र लगाना (सिर्फ पुरुष)- ईदगाह जाने से पहले कुछ खाना- नमाज से पहले फितरा, जकात अदा करना- ईदगाह में जल्दी पहुंचना- ईद की नमाज खुले मैदान में अदा करना। (बारिश या बर्फ गिरने की स्थिति में नहीं)- ईदगाह आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करना- ईदगाह जाते वक्त यह तकबीर पढ़ना

    12:03 (IST)24 May 2020
    Eid-ul-fitr 2020: ईद पर फितरा का महत्व

    ईद उल फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मीठे पकवान बनाए जाते हैं। खासतौर पर इस दिन सेंवईं बनती हैं। लोग इस खास पर्व पर एक दूसरे से गले मिलकर अपने गिले शिकवे दूर करते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगी जाती है। इस दिन खुदा का शुक्रिया अदा किया जाता है और जरूरतमंदों के लिए रकम दान की जाती है। जिसे जकात कहते हैं।

    11:28 (IST)24 May 2020
    लॉकडाउन को देखते हुए रोजेदारों के लिए ये गाइड लाइंस हुई हैं जारी

    दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी अहसन मियां ने लोगो को ईद के साथ मुकद्दस रमजान में हुकूमत की गाइड लाइन और उलमा के मशवरे पर अमल करने के लिए मुबारकबाद देते हुए कहा है कि लोग ईद पर भी हर सूरत में खुद को किसी भी मजमे से बचाएं और सिर्फ अपने घर वालो के साथ ईद की खुशियां मनाएं। ईद पर बगैर जरूरत खरीदारी भी न करें। दरगाह की ओर से यह एलान पहले ही किया जा चुका है कि लोग घरों में ईद के बदले चार रकात नमाजे चाश्त अदा करें।

    10:52 (IST)24 May 2020
    सबसे पहले कब मनायी गई थी ईद

    इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हिजरी संवत 2 यानी 624 ईस्वी में पहली बार (करीब 1400 साल पहले) ईद-उल-फितर मनाया गया था। जानकारों के अनुसार उत्सव मनाने के लिए अल्लाह ने कुरान में पहले से ही 2 सबसे पवित्र दिन बताए हैं। जिन्हें ईद-उल-फितर और ईद-उल-जुहा कहा गया है। इस प्रकार ईद मनाने की परंपरा अस्तित्व में आई।

    10:31 (IST)24 May 2020
    ईद और चांद का रिश्ता

    मुस्लिम धर्म के अनुयायी विशेष पंचांग या कैलेंडर को मानते हैं जो कि चंद्रमा की उपस्थिति और अवलोकन द्वारा निर्धारित किया गया है। रमज़ान के 29-30 दिनों के बाद ईद का चांद नज़र आता है। रमज़ान के महीने की शुरुआत भी चांद से होती है और ख़त्म भी चांद देखने से होता है।

    10:07 (IST)24 May 2020
    खाड़ी देशों में आज है ईद

    इस्लामिक कलेंडर में 29 या 30 दिन होते हैं। खाड़ी देशों में 23 अप्रैल को रमज़ान का चाँद दिखा था और 24 अप्रैल से रमजान शुरू हो गए थे। खाड़ी देशों में एक दिन पहले जुमा (शुक्रवार) को रमजान के 29 दिन पूरे हो गए थे। आज शनिवार को वहां 30 रोजे पूरे हो चुके हैं, रमजान 30 दिन ही होते हैं।

    09:39 (IST)24 May 2020
    चांद देखने के साथ शुरू हो जाएगा मुबारकबाद देने का सिलसिला

    महीने भर का रोजा रविवार को चांद रात के साथ खत्म हो जाएगा। सोमवार को ईद होगी। और इसी के साथ शुरू हो जाएगा मुबारकबाद देने का सिलसिला। खुशियों के इस त्योहार पर हर तरफ बस मुबारकबाद की रहेगी गूंज।

    09:21 (IST)24 May 2020
    घर पर ही ईद की नमाज पढ़ने की अपील

    कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच केरल और जम्मू-कश्मीर में आज ईद मनाई जाएगी। वहीं बाकी पूरे देश में सोमवार 25 मई को ईद-उल-फित्र होगी। केरल में मौलवियों ने रविवार को ईद की घोषणा की। बुखारी ने लोगों ने घर पर ही ईद की नमाज पढ़ने की अपील की।

    08:47 (IST)24 May 2020
    ईद के साथ होती है शव्वाल महीने की शुरुआत

    इस त्योहार को शव्वाल महीने की शुरुआत में मनाया जाता है जो इस्लामिक कैलेंडर का 10वां महीना होता है जो रमजान महीने के खत्म होने के बाद शुरू होता है। इस दिन लोग नमाज अदा कर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं।

    08:26 (IST)24 May 2020
    Eid-ul-fitr 2020: पूरे महीने की जाती है अल्लाह की इबादत

    ईद उल फितर को मनाने का मकसद ये है कि पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं रोजा रखा जाता है और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं जिसका अज्र मिलने का दिन ही ईद कहलाता है। इस उत्सव को पूरी दुनिया के मुस्लिम लोग बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं। ईद की मुबारक देते हैं

    08:04 (IST)24 May 2020
    रमजान आत्म-सुधार करने का देता है मौका

    रमजान में रोजा रखने से तन और मन दोनों में स्वच्छता आती है। बुरे विचारों और गलत कामों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। यह आत्मसुधार का वक्त होता है।

    07:43 (IST)24 May 2020
    दान का महत्व

    ईद उल फितर को मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मीठे पकवान बनाए जाते हैं। खासतौर पर इस दिन सेंवईं बनती हैं। लोग इस खास पर्व पर एक दूसरे से गले मिलकर अपने गिले शिकवे दूर करते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनकर नमाज अदा करते हुए अमन और चैन की दुआ मांगी जाती है। इस दिन खुदा का शुक्रिया अदा किया जाता है और जरूरतमंदों के लिए रकम दान की जाती है। जिसे जकात कहते हैं।

    06:16 (IST)24 May 2020
    खुदा की ही राहों में हम चलेंगे सदा यही है हमारा वादा.

    आज खुदा की हम पर हो मेहरबानी;करदे माफ़ हम लोगो की सारी नाफ़रमानी;ईद का दिन आज आओ मिलकर करें यही वादा;खुदा की ही राहों में हम चलेंगे सदा यही है हमारा वादा.ईद मुबारक

    05:30 (IST)24 May 2020
    आप ईद के चांद की तरह जगमगाते रहें.

    दिए जलते और जगमगाते रहें;हम आपको इसी तरह याद आते रहें;जब तक जिंदगी है ये दुआ है हमारी;आप ईद के चांद की तरह जगमगाते रहें.आपको ईद की ढेरों मुबारकबाद 

    03:59 (IST)24 May 2020
    ईद पर फूलों की तरह हंसने की दुआएं

    सदा हंसते रहो जैसे हंसते हैं फूल; दुनिया के सारे गम तुम जाओ भूल;चारों तरफ फ़ैलाओ खुशियों के गीत; इसी उम्मीद के साथ तुम्हें मुबारक हो ईद. 

    02:43 (IST)24 May 2020
    चांद रात से शुरू हो जाएगा ईद मुबारक बोलने का सिलसिला

    महीने भर का रोजा रविवार को चांद रात के साथ खत्म हो जाएगा। सोमवार को ईद होगी। और इसी के साथ शुरू हो जाएगा मुबारकबाद देने का सिलसिला। खुशियों के इस त्योहार पर हर तरफ बस मुबारकबाद की रहेगी गूंज।

    01:00 (IST)24 May 2020
    रोजे छूटे तो बाद में जरूर रखें

    रमजान में पूरे महीने रोजे रखने का नियम है। यह सभी के लिए जरूरी है। इस दौरान पूरी साफ-सफाई से रहते हुए नमाज और तरावीह पढ़नी चाहिए। रोजे अगर छूट जाते हैं  तो बाद में जरूर रखें।

    23:43 (IST)23 May 2020
    रमजान में रोजे से मिलती है मन को ताकत

    रमजान में रोजे से मन को ताकत मिलती है। संयम, प्रेमभाव, त्याग और परोपकार की भावना का विकास होता है। इबादत करने से खुदा तक मन का जुड़ाव होता है।

    22:33 (IST)23 May 2020
    आत्मसुधार का वक्त होता है रमजान

    रमजान में रोजा रखने से तन और मन दोनों में स्वच्छता आती है। बुरे विचारों और गलत कामों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। यह आत्मसुधार का वक्त होता है।

    22:04 (IST)23 May 2020
    इस्लामिक कैलेंडर का 10वां महीना...

    इस त्योहार को शव्वाल महीने की शुरुआत में मनाया जाता है जो इस्लामिक कैलेंडर का 10वां महीना होता है जो रमजान महीने के खत्म होने के बाद शुरू होता है। इस दिन लोग नमाज अदा कर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं।

    21:14 (IST)23 May 2020
    ईदगाह जाते वक्त पढ़ना चाहिए तकबीर

    जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने के खुद की सफाई और कपड़े वगैरह तैयार रखनागुस्ल (नहाना) करना- मिस्वाक (दातून) करना- सबसे उम्दा और साफ कपड़े पहनना। (नए या पुराने, लेकिन साफ)- इत्र लगाना (सिर्फ पुरुष)- ईदगाह जाने से पहले कुछ खाना- नमाज से पहले फितरा, जकात अदा करना- ईदगाह में जल्दी पहुंचना- ईद की नमाज खुले मैदान में अदा करना। (बारिश या बर्फ गिरने की स्थिति में नहीं)- ईदगाह आने-जाने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करना- ईदगाह जाते वक्त यह तकबीर पढ़ना

    20:40 (IST)23 May 2020
    सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखा जाता है रोजा 

    रमजान के पाक महीने में सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है। रोजा रखने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठकर भोजन कर लेते हैं, इसे सहरी कहा जाता है। इसके बाद रोजा रखने वाले दिनभर कुछ भी नहीं खाते- पीते नहीं हैं। सूर्यास्त होने के बाद रोजा रखने वाले रोजा खोलते हैं, इसे इफ्तार कहा जाता है।

    20:03 (IST)23 May 2020
    Eid-ul-fitr-2020: अज्र मिलने का दिन ही ईद

    ईद उल फितर को मनाने का मकसद ये है कि पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं रोजा रखा जाता है और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं जिसका अज्र मिलने का दिन ही ईद कहलाता है। इस उत्सव को पूरी दुनिया के मुस्लिम लोग बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं। ईद की मुबारक देते हैं।

    19:38 (IST)23 May 2020
    रमज़ान के पूरे 30 रोज़े रखने के बाद मनाया जाएगा त्योहार

    सऊदी अरब में इस साल यानी 2020 में ईद उल फित्र का त्योहार रमज़ान के पूरे 30 रोज़े रखने के बाद मनाया जाएगा। दरअसल, सऊदी अरब, यूएई और कई खाड़ी देशों में 22 मई को ईद का चांद दिखाई नहीं दिया इसलिए 23 मई को ईद नहीं मनाई गई।

    19:04 (IST)23 May 2020
    शव्वाल महीने की शुरुआत में मनाया जाता है त्योहार

    इस त्योहार को शव्वाल महीने की शुरुआत में मनाया जाता है जो इस्लामिक कैलेंडर का 10वां महीना होता है जो रमजान महीने के खत्म होने के बाद शुरू होता है। इस दिन लोग नमाज अदा कर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद देते हैं।

    18:30 (IST)23 May 2020
    Eid ul Fitr 2020: पूरे महीने करते हैं अल्लाह की इबादत

    ईद उल फितर को मनाने का मकसद ये है कि पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं रोजा रखा जाता है और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं जिसका अज्र मिलने का दिन ही ईद कहलाता है। इस उत्सव को पूरी दुनिया के मुस्लिम लोग बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं। ईद की मुबारक देते हैं

    17:49 (IST)23 May 2020
    चांद का महत्‍व

    मुस्लिम धर्म के अनुयायी विशेष पंचांग या कैलेंडर को मानते हैं जो कि चंद्रमा की उपस्थिति और अवलोकन द्वारा निर्धारित किया गया है। रमज़ान के 29-30 दिनों के बाद ईद का चांद नज़र आता है। रमज़ान के महीने की शुरुआत भी चांद से होती है और ख़त्म भी चांद देखने से होता है।

    17:30 (IST)23 May 2020
    ईद मनाने का मकसद

    ईद उल फितर को मनाने का मकसद ये है कि पूरे महीने अल्लाह की इबादत करते हैं रोजा रखा जाता है और अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं जिसका अज्र मिलने का दिन ही ईद कहलाता है। इस उत्सव को पूरी दुनिया के मुस्लिम लोग बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं। ईद की मुबारक देते हैं।

    17:19 (IST)23 May 2020
    ईद के दिन दिया जाता है फितरा

    ईद के दिन गरीबों को फितरा देना वाजिब होता है जिससे वो लोग जो गरीब हैं अपनी ईद मना सकें और समाज में एक दूसरे के साथ खुशियां बांट सकें। इस दिन लोग अपने घरों में सिवैया बनाते हैं जिसे सभी लोग बड़े ही चाव के साथ खाते हैं।

    16:57 (IST)23 May 2020
    Eid-ul-fitr 2020: तो इसलिए मनायी जाती है ईद

    पवित्र कुरान के अनुसार, रमजान के महीने में रोजे रखने के बाद अल्लाह अपने बंदों को बख्शीश और इनाम देता है। बख्शीश और इनाम के इस दिन को ईद-उल-फितर कहा जाता है। इस दिन लोग गले मिलते हैं, ईद की मुबारकबाद देते हैं और मिठाई देते हैं।

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