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साल में दो बार मनाई जाती है ईद, जानिए ईद का इतिहास

Eid 2017: इस्लामिक कैलेण्डर के अनुसार एक साल में दो ईद आती हैं, ईद-उल-जुहा और ईद-उल-फितर।
Ramzan 2017: रमजान के पूरे महीने रात में विशेष नमाज अदा की जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। (सांकेतिक फोटो)

आज यानि सोमवार को देशभर में ईद मनाई जा रही है। ईद का त्यौहार मुस्लिम समाज के लोगों के लिए पाक त्यौहार होता है। इस त्यौहार को मुस्लिम समाज के लोग बड़ी धूम-धाम से बनाते हैं। इस्लामिक कैलेण्डर के अनुसार एक साल में दो ईद आती हैं, ईद-उल-जुहा और ईद-उल-फितर। ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है। वहीं ईद-उल-जुहा को बकरीद के नाम से जाना जाता है। रमजान के 30वें रोजे के चांद को देखकर मीठी ईद या ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ईद को रमजान महीने के आखिरी दिन मनाया जाता है।

ईद के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि 624 ईस्वी में पहली ईद-उल-फितर या मीठी ईद मनाई गई थी। ईद पैगम्बर हजरत मुहम्मद के युद्ध में विजय प्राप्त करने की खुशी में मनाई गई थी। तभी से ईद मनाने की परंपरा चली आ रही है।

रोजे खत्म होने के बाद ईद के दिन कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन मुस्लिम समाज के लोग सुबह उठकर मस्जिदों में अल्लाह को नमाज अदा करते हैं। नमाज अदा करने के बाद लोग एक दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। नमाज अदा करने के बाद सभी लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना बढ़ती है। इस दिन शिराकोरमा या सेवई आदि खाने के लजीज पकवानों को बनाया जाता है। इस दिन मुस्लिम समाज के लोग अपनी हैसियत के हिसाब जरूरतमंद लोगों को दान करते हैं। दान करने को फितरा या जकात कहा जाता है।

इसके अलावा ईद-उल-जुहा भी मनाई जाती है। इस ईद को बकरीद भी कहा जाता है। अरबी भाषा में इसका मतलब कुर्बानी होता है। मुस्लिम धर्म के लोगों के लिए यह त्यौहार बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस त्यौहार को रमजान के पाक महीने के खत्म होने हो जाने के 70 दिनों के बाद मनाया जाता है।

इस ईद के बारे में जानकारों का कहना है कि इस दिन हजरत इब्राहिम साहब अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए थे। ऐसा कहा जाता है कि अल्लाह ने उनके बेटे को जीवनदान दे दिया। तभी से हजरत इब्राहिम के पुत्र की याद में ईद का पर्व मनाया जाता है।

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