Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Updates: सनातन धर्म में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। यह दिन विघ्नहर्ता गणेश जी को समर्पित होता है। वहीं द्विजप्रिय शब्द भगवान गणेश को संदर्भित करता है, जो विशेष रूप से द्विजों या ब्राह्मणों के प्रिय माने जाते हैं। जबकि, संकष्टी का अर्थ है उस दिन से है जो जो बाधाओं या समस्याओं को दूर करता है और जो भक्तों को कठिनाइयों को दूर करने में मदद करने के लिए भगवान गणेश की शक्ति का प्रतीक है। इसलिए यह व्रत जीवन से बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति पाने और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल द्विजप्रिय का पर्व 5 फरवरी को मनाया जाएगा। वहीं इस दिन अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती…
Sankashti Chaturthi Mantra: भगवान गणेश के इन मंत्रों का करें जाप
1. श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
2. ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
3. ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
4. ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
5. ॐ गं गणपतये नमः॥
Sankashti Chaturthi Chandrodaya Time Today: संकष्टी चतुर्थी चंद्रोदय समय
संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय समय रात 09 बजकर 35 मिनट का है। इससे पहले पूजा कर लें।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय समय (Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026)
द्विजप्रिय संकष्टी शुभ मुहूर्त (Sankashti Chaturthi 2026)
अभिजित मुहूर्त – 12:13 पी एम से 12:57 पी एमब्रह्म मुहूर्त – 05:22 ए एम से 06:14 ए एमगोधूलि मुहूर्त- 06:01 पी एम से 06:27 पी एमअमृत काल – 03:31 पी एम – 05:10 पी एम
गणेश आरती (Ganesh Ji Ki Aarti)
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.एकदन्त दयावन्त, चार भुजाधारी.माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी.पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा.लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा.जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.अँधे को आँख देत, कोढ़िन को काया.बाँझन को पुत्र देत,निर्धन को माया.सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा.माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतवारी.कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी.जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा.माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी नियम (Sankashti Chaturthi 2026)
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत में साधक को फलाहार करना चाहिए। साथ ही इस दिन आप साबूदाना, मूंगफली आदि का सेवन कर सकते हैं। यदि आप चाहें तो व्रत के आहार में सेंधा नमक का भी प्रयोग कर सकते हैं।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा अभिजीत मुहूर्त 2026 (Sankashti Chaturthi Shubh Muhurat)
इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:13 पी एम से 12:57 पी एम तक है। इस मुहूर्त में आप पूजा- अर्चना कर सकते हैं।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र (Sankatnashan Ganesh Stotra)
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ।।प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ।।लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ।।नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ।।द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ।।विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ।।जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ।।अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ।।
इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ।।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा सामग्री में आपको भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर, पूजा चौकी या लकड़ी का पाटा, लाल या पीला कपड़ा, कलश, तांबे या पीतल का लोटा, शुद्ध जल, गंगाजल, सुपारी, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (चावल), फूलों की माला, लाल या पीले फूल, दूर्वा घास, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, मिश्री, शहद, घी, दूध, दही, शक्कर, पंचामृत, बेसन या बूंदी के लड्डू, धूप और दीपक आदि सामग्री चाहिए।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर बन रहा शुक्रादित्य राजयोग (Sankashti Chaturthi 2026)
वैदिक पंंचांग के अनुसार सूर्य और शुक्र की युति से शुक्रादित्य राजयोग बन रहा है। जिससे कुंभ, मिथुन और वृष राशि वालों को लाभ हो सकता है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त (Sankashti Chaturthi Shubh Muhurat 2026)
सुबह 11:17 से दोपहर 12:40 तक
दोपहर 12:18 से 01:02 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:40 से 02:03 तक
दोपहर 02:03 से 03:26 तक
शाम 06:12 से 07:49 तक
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - रात 09:35 बजे
आरोग्य की होगी प्राप्ति (Sankashti Chaturthi Upay)
द्विजप्रिय संकष्टी की रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें और गणेश जी के समक्ष घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होगी। साथ ही धन- समृद्धि जीवन में बनी रहेगी।
धन में वृद्धि के लिए करें ये उपाय (Sankashti Chaturthi Upay)
इस दिन पीले रंग के गणेश स्वरूप की पूजा करें। वहीं उन्हें दूर्वा की माला अर्पित करें। ऐसा करने से धन में वृद्धि के योग बनेंगे।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर बन रहे ग्रहों के ये संयोग (Sankashti Chaturthi 2026)
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर ग्रहों के राजा सूर्य, धन के दाता शुक्र और ग्रहों के सेनापति मंगल का संयोग बन रहा है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर इन मंत्रों का करें जाप (Ganeshji ke Mantra)
ॐ गं गणपतये नमः॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतयेवर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय (Sankashti Chaturthi Moon Rise Time)
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय रात 09:35 पी एम है। इस समय पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त 2026 (Sankashti Chaturthi Shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार शुभ-उत्तम मुहूर्त 07:07 ए एम से 08:29 ए एम तक है। साथ ही लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:35 पी एम से 01:57 पी एम तक है। वहीं इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 05:22 ए एम से 06:15 ए एम तक रहेगा। साथ ही अभिजीत मुहूर्त दोपहर में 12:13 पी एम से 12:57 पी एम तक है।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि 2026 ( Kab Hai Sankashti Chaturthi)
वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 फरवरी को 12 बजकर 09 ए एम से शुरू होगी। साथ ही इस तिथि का अंत 6 फरवरी दिन शुक्रवार को 12 बजकर 22 ए एम पर होगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी गुरुवार को रखा जाएगा।
