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दशहरा पर रावण दहन के लिए ये है सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त, जानिए महत्त्व, विधि और मंत्र

दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन इंसान के अंदर के 10 पापों का नाश रावण के रूप में हुआ था।

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दशहरा यानी विजयादशमी इस साल 08 अक्टूबर के दिन पड़ रही है। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक यह पर्व भारत में बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता है। दशहरा से पहले ही जगह-जगह मेले लगने शुरू हो जाते हैं और इस पर्व की खास रौनक होती है रामलीला। कई जगह रामलीला का आयोजन किया जाता है जिसमें भगवान राम की वीर गाथा दिखाई जाती है। दशहरे के दिन राम द्वारा रावण का वध किया जाता है। जो मेलों का मुख्य आकर्षण होता है। जानिए, दशहरे पर्व का महत्व और इतिहास…

दशहरा का इतिहास और महत्व: (History of Dussehra)

इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में लोग मनाते हैं। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था। इस पर्व को मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं जैसे किसान इस दिन को नयी फलसों के घर आने की खुशी के तौर पर मनाते हैं। कुछ जगहों पर इस दिन औजारों और हथियारों की पूजा की जाती है।

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Highlights

    12:37 (IST)08 Oct 2019
    मलेशिया में दशहरा पर होता है राष्ट्रीय अवकाश

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण को हराने के लिए श्री राम ने नौ दिनों तक दुर्गा की पूजा की थी और उनके आशीर्वाद से भगवान राम ने रावण को मार डाला था। दशहरा का त्‍योहार सिर्फ भारत ही नहीं बांग्‍लादेश और नेपाल में भी मनाया जाता है। मलेशिया में दशहरा पर राष्‍ट्रीय अवकाश होता है।

    10:46 (IST)08 Oct 2019
    शमी पूजन से बाद ही श्री राम ने लंका विजय की ओर प्रस्थान किया था

    -श्रवण नक्षत्र इस पर्व को और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण बनाता है। इस नक्षत्र में शमी वृक्ष का पूजन इसे अत्यधिक धार प्रदान करता है।श्रवण नक्षत्र इस पर्व में पूजन वाद-विवाद, आक्रमण और द्यूत सहित चहुँओर विजय सुनिश्चित करता है। कौरवों की द्यूत में जीत के पीछे शमी पूजन मुख्य कारक था।

    -श्रीकृष्ण ने यह रहस्य जान कर पांडवों को भी श्रवण नक्षत्र में शमी का पूजन करा कर उन्ही के अस्त्र से उन्हें पटखनी दे दी। अर्जुन ने अज्ञातवास में अपने अस्त्र गांडीव को पूरे वर्ष शमी वृक्ष पर रखा। जिससे गांडीव महाभारत में मारक हथियार में रूप में शत्रुओं में ख़ौफ़ का सबब बन गया। कहते हैं कि श्रीराम ने जब विजय मुहूर्त में पूजन कर लंका पर आक्रमण किया तो शमी वृक्ष स्वयं विजय मुहूर्त में इस पूजन का साक्षी बना।

    09:05 (IST)08 Oct 2019
    दशहरा पर रावण से सीख सकते हैं ये अच्छे गुण, रचना की थी इन चार अद्भुत ग्रन्थों की

    लंकापति रावण में अनेक बुराइयों के साथ-साथ कुछ अच्छाइयां भी थी। मसलन वह आयुर्वेद, ज्योतिष और तंत्र शास्त्र का बहुत बड़ा ज्ञाता था। उनसे इन विषयों से संबंधित कुल तीन प्रमुख ग्रंथ लिखे। दस शतकात्मक अर्कप्रकाश, दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र, कुमारतंत्र और नाड़ी परीक्षा।

    08:48 (IST)08 Oct 2019
    यहां 10 दिनों तक रहती है दशहरा की धूम

    कर्नाटक के मैसूर शहर में दशहरा का त्योहार बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस त्योहार को यहां के लोग दसरा या नबाबबा कहते हैं। इस त्योहार में मैसूर के सबसे मशहूर शाही वोडेयार परिवार सहित पूरा शहर शामिल होता है। मैसूर पैलेस को 10 दिनों तक सजा कर रखा जाता है।

    07:42 (IST)08 Oct 2019
    विद्यारंभ, गृह प्रवेश, वाहन खरीददारी समेत कर सकते हैं इन चीजों की खरीददारी

    -विजयदशमी यानि दशहरा के दिन का शुभ कामों को करने के लिए सबसे शुभ और अबूझ मुहूर्त होता है। ऐसे में आप छोटे बच्चे जो पढ़ने लायक हो गए हैं उनका विद्या आरंभ करवा सकते हैं। 

    -दशहरा यानि विजयदशमी पर गृह प्रवेश करना शुभ माना गया है। इस दिन गृह प्रवेश के लिए किसी पंडित से सलाह लेने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि आज का दिन अत्यंत शुभ होता है। 

    -नए वाहन की खरीददारी, वस्त्र की खरीदारी, सोने-चांदी की खरीददारी सहित दैनिक जीवन में प्रयोग किए जाने वाले हैं, उनकी भी खरीददारी शुभ मानी गई है।  

    07:08 (IST)08 Oct 2019
    आज शुरू कर सकते हैं कोई नया कार्य

    विजयादशमी को पूरे साल के तीन सर्वोत्तम दिनों में माना जाता है। आज के दिन आप कोई भी नया कार्य शुरू कर सकते हैं। इस दिन भगवान राम ने अहंकारी और आतातायी रावण का लंका में वध किया था। वहीं अन्य धार्मिक मान्यता के मुताबिक देवी दुर्गा ने नौ रात्रि और दस दिन के युद्ध के बाद महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था।

    06:06 (IST)08 Oct 2019
    रावण को दसकंठी भी कहा जाता है

    कहते हैं रावण के दस सिर थे। क्या सचमुच यह सही है? कुछ विद्वान मानते हैं कि रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। कुछ विद्वानों अनुसार रावण छह दर्शन और चारों वेद का ज्ञाता था इसीलिए उसे दसकंठी भी कहा जाता था।

    02:11 (IST)08 Oct 2019
    Dussehra 2019: इस दिन शुरू किए गए हरेक काम में मिलती है सफलता

    विजयादशमी के दिन कई अर्थों में विशेष माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान राम ने इसी दिन रावण का लंका में वध किया था। वहीं अन्य धार्मिक मान्यता के मुताबिक देवी दुर्गा ने नौ रात्रि और दस दिन के युद्ध के बाद महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। साथ ही इस दिन शस्त्र पूजन का ही विधान है। इसके अलावा विजयादशमी (दशहरा) के शस्त्र पूजन के साथ-साथ नया काम शुरू करने की भी मान्यता है। विद्या आरंभ, नया बिजनेस-व्यापार, नया मकान बनवाना आदि। कहते हैं कि दशहरा के दिन शुरू किए गए किसी भी काम में विजय यानि सफलता हासिल होती है।

    20:59 (IST)07 Oct 2019
    भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या कर वरदान मांगा था रावण ने

    ऐसी मान्यता है कि रावण ने अमृत्व प्राप्ति के उद्देश्य से भगवान ब्रह्मा की घोर तपस्या कर वरदान माँगा, लेकिन ब्रह्मा ने उसके इस वरदान को न मानते हुए कहा कि तुम्हारा जीवन नाभि में स्थित रहेगा। रावण की अजर-अमर रहने की इच्छा रह ही गई।

    20:14 (IST)07 Oct 2019
    जैन धर्म में रावण को खास महत्व दिया जाता है

    जैन धर्म के 64 शलाका पुरुषों में रावण की गिनती की जाती है। जैन पुराणों अनुसार महापंडित रावण आगामी चौबीसी में तीर्थंकर की सूची में भगवान महावीर की तरह चौबीसवें तीर्थंकर के रूप में मान्य होंगे। इसीलिए कुछ प्रसिद्ध प्राचीन जैन तीर्थस्थलों पर उनकी मूर्तियां भी प्रतिष्ठित हैं।

    19:35 (IST)07 Oct 2019
    आसुरी माया से बने थे रावण के सिर

    रामचरितमानस में वर्णन आता है कि जिस सिर को राम अपने बाण से काट देते थे पुनः उसके स्थान पर दूसरा सिर उभर आता था। रावण के सिर आसुरी माया से बने हुए।

    18:07 (IST)07 Oct 2019
    दशहरे के दिन रावण पुतला दहन के साथ रामलीला का होगा समापन

    देशभर में बहुत सी जगहों पर दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है। नवरात्र में शुरू होने वाली रामलीला का मंचन दशमी को यानी दशहरा के दिन रावण के पुतला दहन के साथ समाप्त होता है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में इस दिन आतिशबाजी और एक दूसरे को राम जोहार करने और दोस्त मित्रों के घर जाकर गले मिलने की परंपरा भी है।

    17:26 (IST)07 Oct 2019
    देवी दुर्गा ने 10 दिनों तक लगातार महिषासुर से किया था युद्ध

    दशहरा (Dussehra) यानी विजयदशमी को हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह पर्वअश्विनी मास के शुक्लपक्ष की दसवीं तिथि को मनाया जाता है। भगवान पुरुषोत्तम राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। वहीं महागौरी देवी दुर्गा  नवरात्रि 10 दिनों तक लगातार युद्ध के बाद महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इससे असत्य पर सत्य की अन्याय पर न्याय की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इस दिन को विजयदशमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग शस्त्र पूजा करते हैं व नया कार्य प्रारम्भ करते हैं  ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो भी कार्य आरंभ किया जाता है उसमें निश्चित रूप से विजय प्राप्त होती है।

    17:08 (IST)07 Oct 2019
    खास माना जाता है विजयादशमी का दिन

    पौराणिक आख्यानों के मुताबिक विजयादशमी के दिन ही भगवान राम ने लंकापति रावण का वध किया था। चूंकि रावण को बुराई और असत्य का प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है लिहाज इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में भी सेलिब्रेट किया जाता है।

    13:43 (IST)07 Oct 2019
    Dussehra 2019: रावण के इस दो अहंकार के कारण श्रीराम ने किया था उसका वध

    कहते हैं कि लंकापति रावण चार वेदों का ज्ञाता था। इसके पास सोने की लंका थी। और इस बात का उसे अपार अहंकार था। रावण खुद को भगवान शिव का बड़ा भक्त मानता था। शिव के प्रति उसकी भक्ति का आंदजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवतांडव स्तोत्र की रचना कर की। इसके अलावा रावण अपनी भक्ति से शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवतांडव के एक-एक मंत्र पर अपना एक-एक सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ाता जाता। शिव के प्रति अगाध भक्ति रहते हुए भी उसे अपने ज्ञान और शक्ति का अहंकार था। रावण के इस दो अहंकार के कारण ही राम के हाथों रावण का वध किया।

    12:00 (IST)07 Oct 2019
    Dussehra 2019: मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था

    इस दिन को मां दुर्गा की जीत के रूप में भी मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध किया था। इसलिए इसे विजयदशमी कहा जाता है जिसका अर्थ है दसवें दिन की विजय। ऐसी भी मान्यता है कि नवरात्रि में मां अपने मायके आती हैं और फिर दसवें दिन उनकी विदाई होती है। इसी कारण कई लोग दसवें दिन माता की प्रतिमा को विसर्जित करते हैं। इस पर्व से जुड़ी एक मान्यता ये भी है कि इस दिन श्री राम ने रावण के दसों सिर का वध किया था, जिसे अपने अंदर की 10 बुराईयों के अंत करने के रूप में देखा जाता है। पाप, काम, क्रोध, मोह, लोभ, घमंड, स्‍वार्थ, जलन, अहंकार, अमानवता और अन्‍याय वो दस बुराईयां हैं।

    11:58 (IST)07 Oct 2019
    श्रीराम ने भी किया था मां दुर्गा का आह्वान

    दशहरा भगवान राम और माता दुर्गा दोनों का महत्‍व दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण को हराने के लिए श्री राम ने नौ दिनों तक दुर्गा की पूजा की थी और उनके आशीर्वाद से भगवान राम ने रावण को मार डाला था। दशहरा का त्‍योहार सिर्फ भारत ही नहीं बांग्‍लादेश और नेपाल में भी मनाया जाता है। मलेशिया में दशहरा पर राष्‍ट्रीय अवकाश होता है। दशहरा त्‍योहार को मौसम में परिवर्तन होने से जोड़कर भी देखा जाता है। क्योंकि इस दिन से सर्दियों की शुरुआत होती है।

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