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दुर्गा पूजा 2017: करोड़ों की साड़ी पहनी है यहां के पंडाल की दुर्गा मां की मूर्त ने, देख कर रह जाएंगे हैरान

Durga Puja 2017 Kolkata Pandal: बंगाल के दुर्गा पूजा पंडाल को बनाया गया है मिनी लंदन, इससे पहले नहीं दिया गया बंकिघम पैलेस की नकल को इतना सुंदर रुप।

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दुर्गा पूजा बंगाल का एक बहुत बड़ा पर्व माना जाता है। यहां पंडालों में मां दुर्गा को विराजमान किया जाता है और उनकी तीन दिन तक पूजा की जाती है लेकिन कलकत्ता में दुर्गा पूजा सिर्फ परंपरा ही नहीं उससे ज्यादा कलाकारी दिखाने का उत्सव होता है। इस बार कलकत्ता में ही एक छोटा लंदन बना दिया गया है। शौकीन हैं लंदन जाने के तो कलकत्ता के सियालदाह के एक पार्क में ही लंदन ब्रिज, बिग बेन, लंदन आई और बकिंघम पैलेस में देखा जा सकता है। सिर्फ इतना ही बकिंघम पैलेस का इससे पहले कभी इतना सुंदर नकल नहीं बना है। इस पैलेस के अंदर ही मां दुर्गा का पंडाल लगाया गया है। पंडाल में मौजूद सभी देवी देवताओं ने अग्निमित्रा पॉल द्वारा डिजाइन ड्रेस पहनी हैं। उसमें प्रमुख मां दुर्गा की मूर्ती की साड़ी की कीमत 6.5 करोड़ रुपए है। इस साड़ी पर 22 कैरट से भी ज्यादा सोने का प्रयोग किया गया है। ये अब तक की सबसे सुंदर साड़ी मानी जा रही है जो मां दुर्गा की मूर्त को पहनाई गई है। इस साड़ी को बनाने के लिए कलकत्ता के करीब 50 डिजाइनर्स की मेहनत लगी है। पूजा कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप घोष ने इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम को बताया कि इस बार की दुर्गा पूजा में वो कुछ अलग करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने और उनके बेटे सेजल घोस जो पूजा कमेटी के सचिव हैं उन्होंने ये सुझाव दिया।

साड़ी पर बना है कीमती नगों से जड़ा मोर।

मां दुर्गा की ये साड़ी शुद्ध 22 कैरट सोने से बनी है और इसमें 22 किलो से ज्यादा सोने का इस्तेमाल हुआ है। इसको बनाने वाले कलाकार बंगाल से ही हैं। एक बेहतरीन साड़ी जिसपर सुंदर एम्ब्रोइडरी की गई है। सिर्फ इतना ही नहीं फूल बने मोती, तितलियां, पक्षी और एक बड़ा मोर कीमती नगों को साड़ी पर जड़ा गया है। इसपर मीनाकारी का भी काम किया गया है। इसे बनाने में 50 लोगों को करीब डेढ़ महीने का वक्त लगा। पूजा कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप घोष में बताया कि उन्होंने कई देवी देवताओं की मूर्तियों को सोने के गहने और सोने की जरी की साड़ी पहने देखा है लेकिन अब तक उन्होंने उनकी पूरी किसी भी ड्रेस को सोने से बना नहीं देखा है।

सभी देवी-देवताअों को पहनाई गई है कीमती ड्रेस।

 

पंडाल को दिया गया है बंकिघम पैलेस का रुप।

प्रदीप ने ये भी कहा कि ये सोच सिर्फ उनकी नहीं थी, इससे पहले भी कई साल पहले एक जैवेलर और स्वर्ण शिल्प बचाओ कमेटी की पूर्व अध्यक्ष ने भी बंगाल के सुनारों को प्रख्यात करने के लिए इस तरह का कदम उठाया था। उन्होंने कहा कि कई दुनिया के कई ज्वेलरी प्रदर्शनियों में वो गए हैं और वहां लोगों का बंगाल के कारीगरों के काम की ओर झुकाव देखा है। तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा कि उन्हें खुशी और सुकून मिलता है जब इस तरह से बंगाल के कारीगरों की मेहनत को तारीफ मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रदीप घोष के इस प्रयास से बंगाल के करीब डेढ़ लाख कारीगरों को प्रख्याति मिलेगी।

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