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मां दुर्गा जी की आरती: ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ और ‘जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी’ से नवरात्रि में करें पूजा

Maa Durga Aarti, Durga Mata ki Aarti, Jai Ambe Gauri, Maa Shailputri Puja Aarti, Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti: नवरात्र में दुर्गा मां के विभिन्न शक्ति रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र में जागरण, डांडिया, गरबा इत्यादि करने का भी विधान है।

Author नई दिल्ली | October 11, 2018 6:59 PM
शारदीय नवरात्र में दुर्गा मां अपने भक्तों का कल्याण करती हैं।

Maa Durga Aarti, Durga Mata ki Aarti, Jai Ambe Gauri, Maa Shailputri Puja Aarti, Ambe Tu Hai Jagdambe Kali Aarti: नवरात्र का पर्व आरंभ हो चुका है। पूरा वातावरण दुर्गा मां की भक्ति में डूबा हुआ नजर आ रहा है। बता दें कि नवरात्र संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका अर्थ है- नौ रातें। नवरात्र में दुर्गा मां के विभिन्न शक्ति रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र में जागरण, डांडिया, गरबा इत्यादि करने का भी विधान है। क्या आप जानते हैं कि साल में कुल चार बार नवरात्रि आती है। इनमें से दो गुप्त नवरात्र हैं। गुप्त नवरात्र का तंत्र साधना के लिए खास महत्व बताया गया है। फिलहाल, शारदीय नवरात्र आरंभ हो चुकी है। कहते हैं कि शारदीय नवरात्र में दुर्गा मां अपने भक्तों का कल्याण करती हैं।

नवरात्र में रंगों का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है जो लोग इस दौरान दिन के हिसाब से विशेष रंग के कपड़े पहनते हैं, उन्हें विशेष लाभ मिलता है। नौ दिनों में नौ रंगों के कपड़े पहनने और मां के नौ रूपों की पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। साथ ही नवरात्र में दुर्गा जी की आरती करने से भी मनोकामनाओं की पूर्ति होने की बात कही गई है। आज हम आपके लिए दुर्गा मां की आरती लेकर आए हैं।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी…

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

मांग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को । मैया टीको मृगमद को ।।
उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे । मैया रक्ताम्बर साजे ।।
रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी । मैया खड्ग कृपाण धारी ।।
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती । मैया नासाग्रे मोती ।।
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती । मैया महिषासुर घाती ।।
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

चण्ड – मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे । मैया शौणित बीज हरे ।।
मधु – कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी । मैया तुम कमला रानी ।।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु । मैया नृत्य करत भैरू ।।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता । मैया तुम ही हो भरता ।।
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी । मैया वर मुद्रा धारी ।।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । मैया अगर कपूर बाती ।।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे । मैया जो कोई नर गावे ।।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख – सम्पत्ति पावे ।।
ऊँ जय अम्बे गौरी॥

अम्बे तू है जगदम्बे काली…
अम्बे तू है जगदम्बे काली
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेर ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

तेर भक्त जानो पर मैया भीड़ पड़ी है भारी,
दानव दल पर टूट पड़ो माँ कर के सिंह सवारी
सो सो सिंघो से है बलशाली,
है दस भुजाओं वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती।

माँ बेटे की है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता
सबपे करुना बरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखिओं के दुखड़े निवारती।

नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना,
हम तो मांगे माँ तेरे मन में एक छोटा सा कोना
सब की बिगड़ी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतिओं के सत को सवारती।

अम्बे तू है जगदम्बे काली
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेर ही गुण गायें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

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