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इन आरतियों के साथ करें दुर्गाष्टमी और महानवमी पर देवी की उपासना, जानें

Mata Ki Aarti: पूजा को तब ही संपन्न माना जाता है जब अंत में आरती की जाती है। देवी दुर्गा के सभी भक्तों को मंत्र जाप और विभिन्न स्तोत्रों का पाठ करने के बाद माता की आरती करनी चाहिए।

durga maa, kali, devi maaदेवी दुर्गा की आरती करने से देवी प्रसन्न होती हैं।

Durga Ashtami/ Maha Navami: पूजा को तब ही संपन्न माना जाता है जब अंत में आरती की जाती है। देवी दुर्गा के सभी भक्तों को मंत्र जाप और विभिन्न स्तोत्रों का पाठ करने के बाद माता की आरती करनी चाहिए। आरती के दौरान इस बात का ध्यान रखें कि गलत आरती न गाएं। हमेशा सही आरती ही करनी चाहिए। नवरात्र में कन्या पूजन करने से पहले देवी दुर्गा की सच्चे मन से आरती (Devi Durga Ki Aarti) करनी चाहिए।

अम्बे माता की आरती (Ambe Mata Ki Aarti)
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

तेरे भक्तजनो पर माता, भीड़ पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो, माँ करके सिंह सवारी।
सौ-सौ सिहों से भी बलशाली, हे दस भुजाओं वाली।
दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

मां-बेटे का है इस जग मे, बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है, पर ना माता सुनी कुमाता।
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली।
दुखियों के दुखड़े निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें माँ तेरे चरणों में, छोटा सा कोना।
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली।
सतियों के सत को सवांरती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

ओ अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।

मां विंध्यवासिनी की आरती (Maa Vindhyavasini Ki Aarti)

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

पान, सुपारी, ध्वजा, नारियल, ले अम्बे तेरी भेट चढ़ाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

साड़ी चोली तेरी अंग विराजे, केसर तिलक आज लगाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शंकर ने है ध्यान लगाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

नंगे नंगे पग से तेरे सन्मुख अकबर आया सोने का छत्र चढ़ाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

ऊंचे पर्वत बनयो शिवाला और निचे है महल बनाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

सतयुग, द्वापर, त्रेता मध्ये और है कालियुग राज बनाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

धूप दीप नैवैध्य आरती और मोहन ने भोग लगाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

ध्यानू भगत मैया तेरा गुन गावे और मनवांछित फल है पाया।

सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा मैंने पार न पाया।

 

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