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Shani Dev: शनि देव को क्यों चढ़ाते हैं सरसों का तेल, जानिए क्या है वजह

आपने देखा होगा कि शनिदेव को कई भक्त सरसों का तेल चढ़ाते हैं यहां हम आपको बताने जा रहे हैं शनिदेव पर तेल क्‍यों चढ़ाया जाता है जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा…

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जानिए शनि देव को क्यों चढ़ाते हैं सरसों का तेल (जनसत्ता)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि देव को नवग्रह में विशेष स्थान प्राप्त है। शनि देव कर्मफल दाता कहा जाता है। मतलब शनि देव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। मनुष्य अगर अच्छे कर्म करता है तो वह व्यक्ति को शुभ फल प्रदान करते हैं। वहीं अगर मनुष्य बुरे कर्म करता है तो वह मनुष्य को अशुभ फल प्रदान करते हैं। 

वहीं भक्त शनि देव को अपने- अपने तरीके से उपाय करके प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं और शनि देव पर सरसों का तेल भी चढ़ाते हैं। लेकिन क्या आपको पता हैं शनि देव पर सरसों का तेल क्यों चढ़ाते हैं। इसकी वजह क्या है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने के पीछे क्या वजह है। आइए जानते हैं।

हनुमान जी से हुआ था शनि देव का युद्ध:
शास्त्रों के अनुसार एक बार शनिदेव को अपनी शक्तियों और ताकत पर घमंड हो गया था। वहीं इस समय हनुमान जी की कीर्ति और बल की चर्चा चारों ओर हो रही थी। हर कोई बजरंगबली की यश, कीर्ति और बल को सलाम करता था। जब शनि देव को यह बात पता चली तो उनको हनुमान जी के बल का गुणगान बर्दाश्त नहीं हुआ और तभी शनिदेव ने हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा। जब शनि देव युद्ध के लिए हनुमान जी के पास गए तो हनुमान जी भगवान राम की भक्ति में लीन थे। शनि देव ने हनुमान जी को युद्ध के लिए कहा तो हनुमान जी उन्हें समझाने लगे। लेकिन शनि देव ने एक ना सुनी और युद्ध के लिए अड़े रहे। फिर दोनों में जमकर युद्ध हुआ। हनुमान जी ने शनिदेव की खूब पिटाई की।

बताया जाता है कि युद्ध में शनि देव बुरी तरह से घायल हो गए और उन्हें पीड़ा होने लगी। पीड़ा को देखते हुए शनिदेव को बजरंग बली जी ने सरसों का तेल लगाया जिससे उन्हें पीड़ा में काफी आराम मिला और देखते ही देखते कुछ ही देर में शनि देव का पूरा दर्द गायब हो गया। इसके बाद शनि देव ने कहा कि जो भी मुझे सच्चे मन से तेल लगाएगा, उसके सारे कष्ट दूर जाएंगे। इसके बाद से शनि देव को शनिवार को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।

हनुमान जी ने शनिदेव को कराया था मुक्त:
वहीं एक दूसरी कथा के अनुसार एक बार की बात है रावण ने सभी नवग्रहों को अपने दरबार में बंदी बना लिया था। जिसमें रावण ने शनि देव को उलटा लटका रखा था। तब ही जब बजरंगबली सीता माता की खोज में लंका पहुंचे तो रावण ने क्रोधित होकर सैनिकों को हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने को कहा और जब हनुमान जी की पूंछ मे आग लगाई गई तो उससे लंका में भी आग लग गई और फिर सारे ग्रह वहां से भाग गए। लेकिन उल्टे लटके होने के कारण शनि देव नहीं भाग पाए।

शनि देव के शरीर में बहुत पीड़ा हो रही थी। उनका दर्द बहुत ज्यादा था। शनि देव के दर्द को शांत करने के लिए हुनमानजी ने उनके शरीर पर तेल लगाया। जिसके बाद शनि देव का दर्द गायब हो गया। जिसके बाद शनि देव ने कहा कि जो भी व्‍यक्ति श्रद्धा भक्ति से मुझ पर तेल चढ़ाएगा उसकी सारी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी। इसलिए ही शनि देव पर सरसों का तेल लगाया जाता है। साथ ही शनि देव ने कहा जो भी शनिवार वाले दिन हनुमान जी की पूजा करेगा। उसके ऊपर मेरी कुदृष्टि कभी नहीं पड़ेगी।

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