ताज़ा खबर
 

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें? जानिए पूजन सामग्री से लेकर विधि, मंत्र और मुहूर्त

मान्यता है कि इस दिन भगवान राम रावण का वध करके अपनी नगरी अयोध्या वापस लौटे थे। उनके आने की ही खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। कहा जाता है कि तभी से दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है।

diwali, diwali 2019, diwali puja vidhi, diwali puja time, deepavali puja, deepavali 2019, deepavali puja vidhi, diwali puja muhurat, diwali puja mantra, diwali puja samagri, diwali laxmi puja, diwali laxmi puja vidhi, diwali laxmi puja muhurat, diwali laxmi puja mantra, diwali laxmi puja samagri, diwali lakshmi puja, diwali lakshmi puja vidhi, diwali lakshmi puja mantra, diwali lakshmi puja samagri, diwali lakshmi puja muhurat, diwali lakshmi puja time, laxmi puja vidhi, deepavali puja muhurat, deepavali puja mantra, deepavali laxmi puja, deepavali laxmi puja vidhiDiwali 2019 Laxmi Puja Vidhi, Muhurat: मान्यता है कि इस दिन भगवान राम रावण का वध करके अपनी नगरी अयोध्या वापस लौटे थे।

दिवाली वाले दिन भगवान राम के साथ ही देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की भी पूजा होती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान राम रावण का वध करके अपनी नगरी अयोध्या वापस लौटे थे। उनके आने की ही खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। कहा जाता है कि तभी से दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है। कुछ मान्यताओं अनुसार इस दिन देवी लक्ष्मी का आगमन हुआ था। जिस कारण इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। जानिए दिवाली लक्ष्मी पूजा विधि और मुहूर्त…

दिवाली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Diwali Laxmi Puja Muhurat) :

अमावस्या तिथि प्रारंभ – अक्टूबर 27 को 12:23 पी एम बजे से
अमावस्या तिथि समाप्त – अक्टूबर 28 को 09:08 एम एम बजे
लक्ष्मी पूजा समय – 06:43 पी एम से 08:15 पी एम तक

दीपावली पूजन सरल विधि (Diwali Pujan Vidhi) :

दिवाली पूजन प्रदोष काल में किया जाता है। दिवाली की शाम को एक लकड़ी की साफ चौकी बिछाएं। उस चौकी पर गंगा जल से छिड़काव करें और इसके बाद भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, सरस्वती के साथ कुबेर और श्री यंत्र भी स्थापित करें। पूजा स्थान पर एक जल से भरा तांबे या स्टील का कलश रखें। कलश पर रोली से सतिया बना लें और श्रीं लिखें। फिर इस कलश पर मोली की 5 गांठे बांधें। इसके बाद उस पर आम के पत्ते रखें। पुजा स्थान पर पंच मेवा, गुड़, फूल , मिठाई, घी, खील बताशे, फल आदि भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के सामने या आस पास रखें। हो सके तो मां लक्ष्मी को कमल का फूल जरूर अर्पित करे। इसके बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के आगे पांच घी और पांच तेल के दीपक जलाएं। साथ ही तेल का एक बड़ा दीपक भी जलाएं। भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ मां सरस्वती, कुबेर, कृष्ण जी और राम दरबार की पूजा भी जरूर करें। लक्ष्मी पूजन के दौरान अपने गहनों और पैसों की भी पूजा करें। अंत में आरती उतार कर और भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।

Live Blog

Highlights

    15:35 (IST)27 Oct 2019
    लक्ष्मी के साथ सूर्यदेव का भी मिलेगा आशीर्वाद

    दिवाली रविवार के दिन पड़ रहा है। रविवार का दिन होने से मां लक्ष्मी के साथ भगवान सूर्य की भी कृपा बनी रहेगी। पूजा के दौराम मां लक्ष्मी को आप सुंगधित इत्र, कमल पुष्प, कौड़ी, कमलगट्टा अर्पण करें। इससे देवी काफी प्रसन्न होंगी। और मनचाहा वरदान देती है। जिस तरह स्वाति नक्षत्र में ओस की बूंद सीप पर गिरती है तो मोती बनती है, ठीक उसी प्रकार इस नक्षत्र में जातक की ओर से किया कार्य उसे सफलता की चमक प्रदान करता है।

    14:51 (IST)27 Oct 2019
    दिवाली पंचांग

    सूर्योदय - 06:30 ए एमसूर्यास्त - 05:41 पी एमचन्द्रोदय - 06:24 ए एम, अक्टूबर 28चन्द्रास्त - 05:28 पी एम शक सम्वत - 1941 विकारीविक्रम सम्वत - 2076 परिधावीगुजराती सम्वत - 2075 साधारणअमांत महीना - आश्विनपूर्णिमांत महीना - कार्तिक वार - रविवारपक्ष - कृष्ण पक्ष तिथि - चतुर्दशी - 12:23 पी एम तकनक्षत्र चित्रा - 03:18 ए एम, अक्टूबर 28 तकयोग विष्कम्भ - 10:12 पी एम तककरण शकुनि - 12:23 पी एम तकद्वितीय करण चतुष्पाद - 10:44 पी एम तकसूर्य राशि - तुलाचन्द्र राशि - कन्या - 04:33 पी एम तकराहुकाल - 04:17 पी एम से 05:41 पी एमगुलिक काल - 02:53 पी एम से 04:17 पी एमयमगण्ड - 12:06 पी एम से 01:30 पी एमअभिजित मुहूर्त - 11:43 ए एम से 12:28 पी एमदुर्मुहूर्त - 04:12 पी एम से 04:57 पी एमअमृत काल - 09:34 पी एम से 11:00 पी एमवर्ज्य - 12:59 पी एम से 02:25 पी एम

    13:21 (IST)27 Oct 2019
    क्या है दिवाली का महत्व

    त्रेता युग में भगवान राम, जब रावण को हराकर अयोध्या वापस लौटे थे तब श्रीराम के आगमन पर दीप जलाकर उनका स्वागत किया गया और खुशियां मनाई गई थी, इस दिन यह भी कथा प्रचलित है कि जब श्रीकृष्ण ने आताताई नराकसुर जैसे दुष्ट का वध किया तब ब्रजवासियों ने अपनी प्रसन्नता दीपों को जलाकर प्रकट की। कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध दीपावली के एक दिन पहले चतुर्दशी को किया, इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या को गोकुलवासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थी।

    12:17 (IST)27 Oct 2019
    सिद्धि की रात्रि मानी जाती है दिवाली की रात

    दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या की रात आती है। अमावस्या सिद्धि की रात मानी जाती है। कई लोग इस दिन साधना करके सिद्धियां प्राप्त करते हैं। दिवाली की रात को तंत्र मंत्र की रात भी इसलिए ही माना जाता है। यह रात्रि तंत्रिकों के लिए भी विशेष मानी जाती है। वहीं इस रात लोग अपने ईष्ट की आराधना करते हैं और मंत्र सिद्धि करते हैं। यही कारण है कि इसे दिवाली की रात को सिद्धि की रात्रि के लिए भी जाना जाता है।

    11:05 (IST)27 Oct 2019
    दिवाली के दिन ही मां लक्ष्मी का मनता है जन्मदिवस

    शास्त्रों के अनुसार दिवाली के दिन ही मां लक्ष्मी ने जन्म लिया था। मान्यता है कि दिवाली के दिन ही माता लक्ष्मी का विवाह भगवान विष्णु से हुआ था। वहीं इसी दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश के साथ मां सरस्‍वती की भी पूजा होती है। इन सभी की विधिवत पूजा करने से घर से दरिद्रता दूर हो जाती है।

    09:56 (IST)27 Oct 2019
    पूजा का शुभ मुहूर्त

    अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - 01:30 पी एम से 02:53 पी एमसायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 05:41 पी एम से 10:30 पी एमरात्रि मुहूर्त (लाभ) - 01:42 ए एम से 03:18 ए एम, अक्टूबर 28उषाकाल मुहूर्त (शुभ) - 04:54 ए एम से 06:30 ए एम, अक्टूबर 28

    08:42 (IST)27 Oct 2019
    दिवाली की पौराणिक मान्यताएं

    मान्यता है कि रामायण और महाभारत काल से ही देश में दीपावली की परंपरा चली है। दिवाली के दिन ही भगवान राम 14 वर्ष के वनवास से वापस अयोध्या लौटे  थे। वहीं पांडवों के  भी 13 वर्ष के वनवास-अज्ञातवास से लौटने पर लोगों ने दीप जलाकर अपनी खुशी का इजहार किया था। स्कंध पुराण,विष्णु पुराण के मुताबिक भगवान विष्णु और श्री लक्ष्मी के विवाह के उपलक्ष्य में दीपावली मनायी जाती है।

    08:28 (IST)27 Oct 2019
    5 दिनों तक चलता है दिवाली का पर्व

    दिवाली को दीप मालिकाओं का पर्व कहा जाता है। यह पर्व पांच दिनों तक चलता है जो धनतेरस से शुरू होता है। धनतेरस के दिन लोग लक्ष्मी की पूजा करते हैं, साथ-साथ घरों में उपयोग के लिए अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार सामग्रियों का क्रय भी करते हैं। इसके बाद होती है छोटी दिवाली, नरक चतुर्दशी, जिसे हनुमान जयंती भी लोग कहते हैं, इसमें हनुमान जी की पूजा का प्रावधान है। तीसरा दिन आता है दिवाली का जिस दिन लोग दीप जलाने के साथ-साथ लक्ष्मी-गणेश की फिर से पूजा करते हैं। चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती है जिसे अन्नकूट भी कहा जाता है। इस सम्बंध में पुराणों में उल्लेख है कि इस दिन देवराज इन्द्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी तर्जनी पर धारण किया था। सबसे आखिर में भैयादूज का त्योहार होता है। इसमें बहने अपने भाइयों के लिए मंगलकामना करती हैं।

    Next Stories
    1 दिवाली पर कितने बजे है लक्ष्मी पूजा का उत्तम समय, जानिए पूजा विधि, आरती और मंत्र
    2 कन्या राशि वाले कर सकते हैं व्यापार में बकाया पैसों की वसूली, जानिए दिवाली पर क्या है आपके लिए खास
    3 Diwali 2019, Libra (Tula) Rashifal: तुला राशि वालों को आर्थिक मोर्चे पर बदलाव का संकेत, जानिए इस दिवाली क्या रहेगा अच्छा
    ये पढ़ा क्या?
    X