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देव, दानव और मानव के लिए बताए गए हैं अलग-अलग शिवलिंग, जानिए तीनों शिवलिंग का महत्व

जिस प्रकार मानव की मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष प्रकार के शिवलिंग की पूजा की जाती है। उसी प्रकार देवता और दानवों के लिए भी कुछ विशेष प्रकार के शिवलिंग की उपासना के बारे में वर्णन मिलता है।

Author नई दिल्ली | Published on: April 15, 2019 2:26 PM
पारद शिवलिंग।

शास्त्रों में देवता, मानव और असुर के लिए अलग-अलग शिवलिंग बताए गए हैं। इन शिवलिंगों के स्वरूप और पूजा करने की विधि भी अलग-अलग बताई गई है। जिस प्रकार मानव की मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष प्रकार के शिवलिंग की पूजा की जाती है। उसी प्रकार देवता और दानवों के लिए भी कुछ विशेष प्रकार के शिवलिंग की उपासना के बारे में वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इन तीनों शिवलिंगों का अपना एक विशेष महत्व होता है। लेकिन आखिर ऐसा क्यों है कि देवता के लिए अलग, मनुष्य के लिए अलग और दानव के लिए अलग-अलग शिवलिंग बताए हैं? यदि अप यह नहीं जानते हैं तो आगे जानिए इसे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवता और दैत्य दोनों के आराध्य भगवान शिव हैं। भगवान शिव को परम ब्रह्म के समान माना जाता है। उनके निराकार रूप की पूजा होती है। शिवलिंग उन्हीं के निराकार रूप का प्रतीक है। शिव पुराण के मुताबिक भगवान विष्णु ने समूचे संसार के सुख और कामनाओं की पूर्ति के लिए विश्वकर्मा को अलग-अलग शिवलिंग बनाकर देवताओं को देने के लिए कहा। जिसके बाद विश्वकर्मा ने अलग-अलग प्रकार के धातु और रत्नों से शिवलिंग बनाई।
पारद शिवलिंग: यह शिवलिंग अक्सर घर, ऑफिस, दुकान आदि जगहों पर रखा जाता है। इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से जीवन में शांति और सौभाग्य प्राप्त होता है।

मिश्री शिवलिंग: यह शिवलिंग मिश्री, चीनी आदि से बना होता है। कहते हैं कि इसकी पूजा करने से रोगों का नाश होता है। साथ ही अन्य शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

जौ और चावल के शिवलिंग: पारिवारिक समृद्धि और शांति के लिए इस शिवलिंग का पूजन किया जाता है। साथ ही जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं उन्हें यह सुख मिलता है।

भस्म शिवलिंग: यज्ञ की राख यानि भस्म से बनाई गई इस शिवलिंग से पूजा-पाठ में सिद्धियां प्राप्त होती है। इस शिवलिंग की पूजा अक्सर अघोरी समुदाय के लोग करते हैं।

गुड़ शिवलिंग: गुड़ और अन्न से बने इस शिवलिंग की पूजा करने से कृषि और अन्न उत्पादन में वृद्धि होती है।

फल-फूल के शिवलिंग: फूल से बने शिवलिंग की पूजा करने से भूमि और भवन से जुड़ी समस्या दूर होती है। वहीं फल से बने शिवलिंग की पूजा करने से घर में अन्न-जल आदि की बरकत बनी रहती है।

स्वर्ण-रजत से बने शिवलिंग: सोने और चांदी से बने शिवलिंग से सुख-समृद्धि और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।

मिट्टी के शिवलिंग: मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है।

देव शिवलिंग: जिस शिवलिंग को देवताओं या अन्य प्राणियों द्वारा स्थापित किया गया हो उसे देवलिंग कहते हैं। वर्तमान समय में धरती पर पारंपरिक रूप से यह देवताओं के लिए पूजित हैं।

असुर शिवलिंग: असुरों द्वारा जिसकी पूजा की जाए वह असुर लिंग है। कहते हैं कि रावण ने एक शिवलिंग स्थापित किया था जो असुर शिवलिंग कहलाया।

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