ताज़ा खबर
 

धनतेरस पूजन सामग्री, विधि, मुहूर्त और कथा जानिए यहां

इस दिन धन और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इनका जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था।

dhanteras 2019, dhanteras vrat vidhi, dhanteras vrat katha, dhanteras vrat katha in hindi, dhanteras vrat story, dhanteras puja vidhi, dhanteras puja muhurat, dhanteras puja vidhi in hindi, dhanteras puja time 2019, dhanteras puja time, dhanteras puja muhurat 2019, dhanteras puja time 2019, dhanteras puja samagri, dhanteras puja mantra, dhanteras puja mantraDhanteras 2019 Vrat Vidhi: ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर विधि विधान पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।

दिवाली से पहले धनतेरस पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन धन और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इनका जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। फिर इनके दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं। धनतेरस के दिन सोने-चांदी, बर्तन, कई जगह झाड़ू की भी खरीदारी करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर विधि विधान पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है। जानिए धनतेरस की पूजा विधि, व्रत कथा और शुभ मुहूर्त…

धनतेरस पूजन की सामग्री (Dhanteras Puja Samagri List) :

21 पूरे कमल बीज, मणि पत्थर के 5 प्रकार, 5 सुपारी, लक्ष्मी–गणेश के सिक्के ये 10 ग्राम या अधिक भी हो सकते हैं, पत्र, अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी, पान, सिक्के, काजल, चंदन, लौंग, नारियल, दहीशरीफा, धूप, फूल, चावल, रोली, गंगा जल, माला, हल्दी, शहद, कपूर आदि।

धनतेरस पूजा विधि (Dhanteras Puja Vidhi) :

धनतेरस के दिन शाम के समय उत्तर दिशा में कुबेर, धन्वंतरि भगवान और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूजा के समय घी का दीपक जलाएं। कुबेर को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई चढ़ाएं। पूजा करते समय “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें। फिर “धन्वन्तरि स्तोत्र” का पाठ करें। धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की भी पूजा करें। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी का दीपक जलाएं। उन्हें फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं।

धनतेरस पर यम के नाम दीप जलाने की विधि : दीपक जलाने से पहले पूजा करें। किसी लकड़ी के बेंच या जमीन पर तख्त रखकर रोली से स्वास्तिक का निशान बनायें। फिर मिट्टी या आटे के चौमुखी दीपक को उस पर रख दें। दीप पर तिलक लगाएं। चावल और फूल चढ़ाएं। चीनी डालें। इसके बाद 1 रुपये का सिक्का डालें और परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं। दीप को प्रणाम कर उसे घर के मुख्य द्वार पर रख दें। ये ध्यान दें कि दीपक की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो। क्योंकि ये यमराज की दिशा मानी जाती है। ऐसा करने से अकाल मृत्यु टल जाती है।

धनतेस की कथा (Dhanteras Ki Katha/Story/History) :

क्षीरसागर में माता लक्ष्‍मी के साथ निवास करने वाले श्रीहरि के मन में विचार आया कि एक बार चलकर मृत्‍युलोक का निरीक्षण किया जाए। माता लक्ष्‍मी भी उनके साथ आने को कहने लगीं। भगवान विष्‍णु ने उनसे कहा, ‘आप मेरे साथ एक ही शर्त पर आ सकती हैं, आपको मेरे कहे अनुसार चलना होगा और मेरी सभी बातों को मानना होगा।’ मां लक्ष्‍मी भगवान विष्‍णु की बात मानकर धरती पर उनके साथ विचरण करने आ गईं।

धरती पर पहुंचने के कुछ समय पश्‍चात भगवान विष्‍णु ने मां लक्ष्‍मी को एक स्‍थान पर रोककर कहा, मैं जब तक वापस न आ जाऊं तब तक आप यहां रुककर मेरा इंतजार करें। यह कहकर विष्‍णु दक्षिण दिशा की ओर चल दिए। लक्ष्‍मीजी ने उनकी बात नहीं मानी और वह भी उनके पीछे चल दीं।

कुछ दूर चलने के पश्‍चात उन्‍हें सरसों का खेत दिखाई दिया। खेत में सुंदर पीले सरसों के फूल देखकर लक्ष्‍मीजी अति प्रसन्‍न थीं। उन्‍होंने इन सरसों के फूलों से अपना श्रृंगार किया और फिर चल दीं। आगे चलने पर अब उन्‍हें गन्‍ने का खेत मिला। पके-तैयार गन्‍ने को देखकर मां लक्ष्‍मी से रहा नहीं गया और फिर वह गन्‍ने के खेत में रुककर गन्‍ना चूसने लगीं।

अपनी आज्ञा का उल्‍लंघन देखकर भगवान विष्‍णु को माता लक्ष्‍मी पर क्रोध आ गया। उन्‍होंने मां लक्ष्‍मी को शाप दिया, ‘तुमने मेरी आज्ञा का उल्‍लंघन किया है। तुमने किसान के खेत से चोरी की है। इस सब के बदले अब तुम्‍हें 12 वर्ष तक किसान के घर रहकर उसकी सेवा करनी होगी। भगवान माता लक्ष्‍मी को धरती पर छोड़कर क्षीरसागर वापस चले गए।

12 वर्षों तक मां लक्ष्‍मी ने किसान के घर में रहकर उसे धन-धान्‍य और रत्‍न-आभूषणों से भर दिया। 13 वां वर्ष लगते ही शाप पूरा हुआ और भगवान विष्‍णु मां लक्ष्‍मी को अपने साथ ले जाने वापस धरती पर पहुंचे। भगवान विष्‍णु को देखकर किसान ने लक्ष्‍मीजी को उनके साथ भेजने से इंकार कर दिया। तब विष्‍णुजी ने किसान को समझाया कि लक्ष्‍मीजी को आज तक कोई रोक नहीं सका है। वह तो चलायमान हैं। आज यहां तो कल वहां। मेरे शाप के कारण यह 12 वर्ष से आपके पास रुकी थीं, मगर अब इनके जाने का वक्‍त आ गया है। इतने पर भी किसान नहीं माना और लक्ष्‍मीजी को नहीं भेजने का हठ करने लगा।

तब लक्ष्‍मीजी को एक उपाय सूझा। उन्‍होंने कहा, मैं जैसा कहूं, आपको वैसा करना होगा। फिर लक्ष्‍मीजी ने बताया, कल तेरस है। तुम अपने घर साफ-सफाई करके उसे लीप-पोतकर स्‍वच्‍छ करना। शाम की बेला में घी के दीपक जलाकर मेरी पूजा करना। तांबे के एक कलश में सिक्‍के भरकर मेरे लिए रखना। मैं उस कलश में निवास करूंगी। फिर एक साल के लिए तुम्‍हारे घर में ही निवास करूंगी। किसान ने ऐसा ही किया और उसका घर भी धन-धान्‍य से सम्‍पन्‍न हो गया। तब से हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की तेरस को धनतेरस की तरह मनाया जाता है।

धनतेरस का शुभ मुहूर्त (Dhanteras Puja Shubh Muhurat) : 

धनतेरस पूजा मुहूर्त – 07:08 पी एम से 08:16 पी एम
अवधि – 01 घण्टा 08 मिनट्स
यम के नाम दीप जलाने का समय – शाम 06 से 07 पी एम

Next Stories
1 Naraka Chaturdashi 2019 Date, Puja Timings: नरक चतुर्दशी के दिन क्यों और कैसे जलाया जाता है यम दीपम, जानिए विधि और मुहूर्त
2 लव राशिफल 25 अक्टूबर 2019: तुला राशि वालों का खुशियों से बीतेगा दिन, इनको मिल सकता है प्रेम प्रस्ताव
3 Finance Horoscope Today, October 25, 2019: कर्क राशि के जातकों की बढ़ेगी संपत्ति, जानिए बाकियों का वित्त राशिफल
कोरोना LIVE:
X