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जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा…धनतेरस पूजा इस आरती को उतार कर करें संपन्न

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा। जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा...धनतेरस पूजन के समय इस आरती को जरूर गायें।

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा…भगवान धन्वंतरि की संपूर्ण आरती यहां।

धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, कुबेर और धन्वंतरि जी की पूजा का विधान है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि जी की उत्पत्ति हुई थी। इन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी की पूजा से धन संपत्ति में वृद्धि होती है तो धन्वंतरि जी की उपासना से स्वास्थ्य रूपी धन का वरदान मिलता है।

घर पर धनतेरस की ऐसे करें पूजा, ये है आसान विधि

धन्वंतरि भगवान की आरती (Dhanvantari Ji Ki Aarti) :

जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।जय धन्वं.।।

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट आकर दूर किए।।जय धन्वं.।।

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।जय धन्वं.।।

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।जय धन्वं.।।

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।जय धन्वं.।।

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।जय धन्वं.।।

धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।जय धन्वं.।।

धनतेरस के दिन इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, जानें विधि, मंत्र और सामग्री लिस्ट

https://www.youtube.com/watch?v=P1d_U9O5Y2Y

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी की भी आरती जरूर उतारें।

लक्ष्मी जी की आरती (Laxmi Ji Ki Aarti) :

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निस दिन सेवत हर-विष्णु-धाता ॥ॐ जय…

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ जय…

तुम पाताल-निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥ॐ जय…

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय…

जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता ।
सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता ॥ॐ जय…

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता ।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता ॥ॐ जय…

शुभ-गुण-मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता ॥ॐ जय…

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कई नर गाता ।
उर आनन्द समाता, पाप शमन हो जाता ॥ॐ जय…

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