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Happy Dhanteras 2018: दिवाली से दो दिन पहले क्यों मनाया जाता है धनतेरस, जानिए

Dhanteras 2018: धनतेरस पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है। अधिकांश लोग अपने-अपने सामर्थ्य के हिसाब से खरीदारी करते हैं। कुछ लोग घर में रोजमर्रा काम आने वाले सामान खरीदते हैं तो कुछ गहने-जवाहरात।

Author Updated: November 5, 2018 10:39 AM
Dhanteras 2018: कार्तिक कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तारीख के दिन इस त्योहार को मनाया जाता है। इसलिए इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है।

Dhanteras 2018: हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार दिवाली इस साल सात नवंबर यानी बुधवार को है। भारत में इस त्योहार का खास महत्व है और देश के हर हिस्से में यह त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म में धनतेरस का भी विशेष महत्व है। धनतेरस पर धनवंतरी के साथ-साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। दिवाली के आसपास कई और त्योहार भी मनाए जाते हैं जिनमें धनतेरस, गोबरधन पूजा और भाई दूज का त्योहार भी शामिल हैं। धनतेरस का त्योहार दिवाली से दो दिन पहले सेलिब्रेट किया जाता है, इस साल यह 5 नवंबर, यानी आज के दिन मनाया जा रहा है धनतेरस को खरीददारी के लिए भी काफी शुभ दिन माना गया है। इस दिन खास तौर से बर्तनों और गहनों की खरीददारी की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं धनतेरस का त्योहार दिवाली से दो दिन पहले ही क्यों मनाया जाता है, चलिए जानते हैं इसके पीछे का इतिहास और मान्यता।

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दरअसल, धनतेरस दो शब्दों से मिलकर बना है, धन और तेरस। इसमें तेरस संस्कृति भाषा के त्रयोदस का हिंदी वर्जन है। कार्तिक कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी तारीख के दिन इस त्योहार को मनाया जाता है। इसलिए इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान धनवंतरी के प्रकट होने के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। भगवान धनवंतरी को देवताओं के चिकित्सक और चिकित्सा के देवता के रूप में पूजा जाता है। चिकित्सकों के लिए धनतेरस का दिन बहुत ही महत्व पूर्ण होता है। माना जाता है कि भगवान धनवंतरी हाथ में कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है। इस दिन लोग गणेश और लक्ष्मी को घर लाया जाता है। इस दिन लोग किसी को उधार नहीं देते हैं और ना ही लेते हैं। इस दिन धन की वृद्धि के लिए लोग नई वस्तुएं लेते हैं।

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वहीं इस त्योहार को लेकर दूसरी मान्यता है कि एक बार लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को उनके साथ पृथ्वी लोक चलने को कहा। इस पर विष्णु जी ने कहा कि पृथ्वी लोक पर जाकर वे (लक्ष्मी जी) वहां की मोह माया से प्रभावित नहीं होंगी। और न ही दक्षिण दिशा में देखेंगी। इस शर्त पर वे उनके साथ पृथ्वी पर चलेंगे। लक्ष्मी जी ने विष्णु जी की ये शर्त मान ली। लेकिन धरती पर पहुंचकर लक्ष्मी जी ने उत्सुकतावश दक्षिण दिशा में देख लिया। साथ ही वह शर्त तोड़ते हुए दक्षिण दिशा में चल पड़ीं। दक्षिण दिशा में लक्ष्मी जी सरसों और गन्ने के खेत देखकर मोहित हो गईं। इसके बाद उन्होंने खुद को सरसों के फूलों से सजाया और गन्ने के रस का पान किया।

विष्णु जी ने यह देखा लिया कि लक्ष्मी जी ने शर्त का उल्लंघन किया है। इस पर उन्होंने लक्ष्मी जी से अगले 12 वर्ष तक धरती पर रहने को कहा। साथ ही जिस किसान ने यह खेती की है, उसकी सेवा करने को कहा। लक्ष्मी जी के आगमन से गरीब किसान रातोंरात अमीर और समृद्धशाली हो गया। ऐसे ही धीरे-धीरे 12 साल बीत गए और लक्ष्मी जी के बैकुंठ वापस जाने का समय हो गया।

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विष्णु जी जब धरती पर लक्ष्मी जी को वापस लेने आए तो किसान ने लक्ष्मी जी को वापस करने से मना कर दिया। विष्णु जी की लाख कोशिशों के बावजूद किसान लक्ष्मी जी को वापस करने को तैयार नहीं हुआ। इस लक्ष्मी जी ने किसान से कहा कि कल तेरस है। इस दिन तुम मेरी पूजा करोगे तो घर धन-धान्य से पूर्ण हो जाएगा। किसान ने ऐसा ही किया और तभी से धनतेरस की पूजा दुनिया भर में फैल गई।

बता दें कि धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार पर और आंगन में दीप जलाने की प्रथा भी है। इस दिन सोना और चांदी जैसी धातुओं को खरीदना अच्छा माना जाता है। इस मौके पर लोग धन की वर्षा के लिए नए बर्तन और आभूषण खरीदते हैं। ऐसी मान्यता है कि धातु नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करती है। इसलिए धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदन परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि इस मौके पर सिर्फ सोने और चांदी की ही नहीं बल्कि कई अन्य सामान भी लोग खरीदते हैं, कई लोग इस दिन झाडू खरीदना शुभ मानते हैं।

धनतेरस पर खरीदारी करना शुभ माना जाता है। अधिकांश लोग अपने-अपने सामर्थ्य के हिसाब से खरीददारी करते हैं। कुछ लोग घर में रोजमर्रा काम आनेवाले सामान खरीदते हैं तो कुछ गहने-जेवर। मान्‍यता है कि इस दिन खरीदादारी से धन की वर्षा होती है और घर में सुख, शांति, समृद्धि आती है। इस दिन धातु खरीद की मान्यता है। आमतौर पर लोग धनतेरस के दिन सोने-चांदी के गहने खरीदते हैं लेकिन यह जरूर नहीं है। जिन लोगों का बजट इसकी इजाजत नहीं देता है वो सोने या चांदी का सिक्‍का भी खरीद सकते हैं।

धनतेरस पर धातु के बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है। मान्‍यता है कि भगवान धन्‍वंतरि समुद्र मंथन के दौरान हाथ में कलश लेकर जन्‍मे थे, इसलिए धनतेरस के दिन पानी भरने वाला बर्तन खरीदना भी शुभ माना जाता है।  व्‍यापारी समुदाय धनतेरस पर नए बही-खाते खरीदते हैं, जिनकी पूजा दीपावली के मौके पर की जाती है। उनका हिसाब-किताब दिवाली बाद नए बही खाते से शुरू होता है।

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