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देवशयनी एकादशी: इस दिन से चार महीनों तक नहीं हो सकेंगे मांगलिक कार्य, जानें इस दौरान कौन से कार्य न करें

इस दिन से भगवान विष्णु चार मास की अवधि तक पाताल लोक में निवास के लिये चले जाते हैं और क्षीर सागर की अनंत शय्या पर शयन करते हैं। इसलिए इस तिथि को ‘हरिशयनी’ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

Author नई दिल्ली | July 12, 2019 7:29 AM
देवशयनी एकादशी।

Devshayani Ekadashi 2019: 12 जुलाई से देवशयनी एकादशी प्रारंभ हो रही हैं। इस दिन से भगवान विष्णु चार मास की अवधि तक पाताल लोक में निवास के लिये चले जाते हैं और क्षीर सागर की अनंत शय्या पर शयन करते हैं। इसलिए इस तिथि को ‘हरिशयनी’ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान कृषि को छोड़कर धार्मिक दृष्टि से किए जाने वाले सभी शुभ कार्य जैसे शादी, मुंडन, जनेऊ, तिलक आदि नहीं किये जाते हैं। माना जाता है कि इस दौरान देवों के देव महादेव सृष्टि का पालन करते हैं। देवशयानी एकदशी को आषाढ़ी एकदशी और पदमा एकदशी भी कहा जाता है।

कैसे करें पूजा: इस दिन सुबह जल्दी उठकर सभी दैनिक कार्यों को पूरा करने के बाद, स्नान करके घर में पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। मंदिर या पूजा-पाठ वाले स्थान पर भगवान विष्णु की सोने, चांदी, तांबे या पीतल की मूर्ति की स्थापना करते हैं और उसका पूजन करते हैं। भगवान विष्णु का पूजन कर विष्णु सहस्रनाम तथा भगवान विष्णु के मंत्रों का जप किया जाता है। एकादशी पर विष्णु के साथ ही देवी लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन कई लोग उपवास यानी व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग व्रत कथा को सुनते हैं।

तुलसी की माला से इन मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं:
1. ॐ नमो नारायण
2. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
3. ॐ विष्णवे नम: इत्यादि। इति:

क्या ना करें: इन चार महीनों के समय में पलंग पर सोना, भार्या का संग करना, झूठ बोलना, मांस, शहद और दूसरे के दिए हुए दही-भात आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही मूली, पटोल एवं बैगन आदि का त्याग करना चाहिए। हालांकि इन चार महीनों में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। परन्तु मांगलिक कार्यों के लिए समान की खरीदारी इस दौरान की जा सकती है। देवशयनी एकादशी के बाद ठीक चार महीने बाद 8 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी। जिस दौरान फिर से सभी मांगलिक कार्य शुरु हो जाएंगे। प्रबोधिनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु फिर से बैकुण्ठ में आ जाते हैं।

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