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Devshayani Ekadashi 2019: आज है देवशयनी एकादशी, जानें इसका महत्व, कथा, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और अन्य जानकारी

Devshayani Ekadashi 2019, Ashadhi Ekadashi 2019 Vrat Katha, Puja Vidhi: देवशयनी एकादशी 11 जुलाई को ही रात 3:08 बजे से शुरु होकर 12 जुलाई की रात 1:55 मिनट तक रहेगी। इस दौरान प्रदोष काल शाम 5:30 से 7:30 तक होगा। साधक व्रत का पारण 13 जुलाई को सूर्योदय के बाद कर सकेंगे।

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Devshayani Ekadashi 2019, Ashadhi Ekadashi 2019 Vrat Katha, Puja Vidhi: 12 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन का काफी महत्व होता है। क्योंकि पुराणों अनुसार ऐसा माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। जिस कारण सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने का खास महत्व होता है। माना जाता है कि इस एकादशी को व्रत रखने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक देवशयानी एकदशी हर साल जुन या जुलाई महीने में आती है। इस बार यह एकादशी 12 जुलाई को है। वहीं पिछले साल यह 23 जुलाई को थी। यहां जानिए इस देवशयनी एकादशी का महत्व, पूजन विधि और इसकी व्रत कथा के बारे में…

कैसे करें पूजा: देवशयानी एकदशी को आषाढ़ी एकदशी, पदमा एकदशी और हरी शयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करते हैं, स्नान के बाद घर में पवित्र जल का छिड़काव किया जाता है, पूजा-पाठ वाले स्थान पर भगवान विष्णु की सोने, चांदी, तांबे या पीपल की मूर्ति की स्थापना की जाती है और इसका फिर विधि के साथ पूजन करते हैं। उपवास रखने वाले जातक व्रत कथा को सुनते हैं।

व्रत कथा: वामन पुराण के मुताबिक असुरों के राजा कहे जाने वाले बलि ने जब अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार जमा लिया था तब इंद्र देवता घबराकर भगवान विष्‍णु के पास मदद मांगने पहुंचे थे। भगवान विष्‍णु ने देवताओं की मदद करने के लिए वामन अवतार धारण किया था। भगवान विष्णु वामन अवतार में राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे और बलि से तीन पग भूमि मांगी। पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं थी तो राजा बलि ने कहा कि तीसरा पग उनके सिर पर रख दें। विष्णु भगवान ने तीसरा पग राजा बलि के ऊपर रखा और देवताओं की समस्याओं का निवारण कर दिया। इसी के साथ विष्णु राजा बलि के दान-धर्म से बहुत प्रसन्‍न हुए और उन्‍होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा। बलि ने उनसे पाताल में बसने का वर मांगा और इस तरह बलि की इच्‍छा पूर्ति के लिए भगवान को पाताल जाना पड़ा। भगवान विष्‍णु के पाताल जाने के बाद सभी देवतागण और माता लक्ष्‍मी परेशान हो गए। तब अपने पति भगवान विष्‍णु को वापस लाने के लिए माता लक्ष्‍मी गरीब स्‍त्री बनकर राजा बलि के पास पहुंची और उन्‍हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी और बदले में भगवान विष्‍णु को पाताल लोक से वापस ले जाने का वचन ले लिया।

पूजन का सही समय: देवशयनी एकादशी 11 जुलाई को ही रात 3:08 बजे से शुरु होकर 12 जुलाई की रात 1:55 मिनट तक रहेगी। इस दौरान प्रदोष काल शाम 5:30 से 7:30 तक होगा। साधक व्रत का पारण 13 जुलाई को सूर्योदय के बाद कर सकेंगे।

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