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देवशयनी एकादशी 2019: यहां जानें देवशयनी एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी सारी बातें

Devshayani Ekadashi 2019 Puja Vidhi and its importance: इस बार की यह एकादशी खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन दोपहर 2 बजकर 57 मिनट तक विशाखा नक्षत्र चलेगा। जिसे शुभ माना जाता है। इसके साथ ही सबसे शुभ योगों में से एक सर्वार्थसिद्ध योग भी दोपहर बाद 03:57 से शुरु होकर सूर्योदय तक रहने वाला है। इसके साथ ही रवि योग भी बन रहा है।

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Devshayani Ekadashi 2019, Ashadhi Ekadashi 2019 Vrat Katha, Puja Vidhi, Live: 12 जुलाई को यानी आज देवशयनी एकादशी है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का खास महत्व होता है। क्योंकि इस दिन से जगत के पालनहार भगवान विष्णु निद्रा में चले जाते हैं। जिस कारण से इस दिन के बाद से कुछ मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। खासकर इस दौरान विवाह नहीं होते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जगत के पालनहार भगवान विष्णु के 4 महीनों के लिए क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाने के बाद देवों के देव महादेव सृष्टि के पालनहार की जिम्मेदारी संभालते हैं। इस दिन व्रत रखने का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी व्रत को करने से हर काम में सफलता मिलती है। इसे ‘देवशयनी’, ‘योगनिद्रा’ या पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार की यह एकादशी खास रहने वाली है क्योंकि इस दिन दोपहर 2 बजकर 57 मिनट तक विशाखा नक्षत्र चलेगा। जिसे शुभ माना जाता है। इसके साथ ही सबसे शुभ योगों में से एक सर्वार्थसिद्ध योग भी दोपहर बाद 03:57 से शुरु होकर सूर्योदय तक रहने वाला है। इसके साथ ही रवि योग भी बन रहा है। जिसके कारण इस दौरान पूजा का फल कई गुना ज्यादा मिलने के आसार हैं…

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Highlights

    13:09 (IST)12 Jul 2019
    इस दिन व्रत रखने का होता है खास महत्व...

    आज देवशयनी एकादशी का व्रत सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है। देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी और ‘पद्मनाभा’ भी कहते हैं। 

    12:39 (IST)12 Jul 2019
    इन मंत्रों का करें जाप...

    तुलसी की माला से इन मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं:

    1. ॐ नमो नारायण

    2. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    3. ॐ विष्णवे नम: इत्यादि। इति:

    12:26 (IST)12 Jul 2019
    देवशयनी एकादशी को मनाने की पौराणिक कहानी...

    पौराणिक कथा के अनुसार एक बार दैत्यराज बलि की पूजा से खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वर मांगने को कहा। बलि ने तीन पग भूमि दान के रूप में मांग ली। पहले पग में सारी पृथ्वी, आकाश तथा सभी दिशाओं को ढक लिया तो वहीं दूसरे पग में सारे स्वर्ग लोक को। जबकि तीसरे पग में बलि ने अपने आप को समर्पित करते हुए भगवान विष्णु को पग रखने को कहा। इससे भगवान विष्णु बहुत खुश हो गए थे और बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया। राजा बनने के बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु से कहा कि वो उनके महल में निवास करें। उनकी भक्ति से खुश होकर भगवान विष्णु ने उन्हें चार महीने तक पाताल लोक में जाने का फैसला किया।

    12:09 (IST)12 Jul 2019
    देवशयनी एकादशी पूजन समय...

    पूजन का सही समय: देवशयनी एकादशी 11 जुलाई को ही रात 3:08 बजे से शुरु होकर 12 जुलाई की रात 1:55 मिनट तक रहेगी। इस दौरान प्रदोष काल शाम 5:30 से 7:30 तक होगा। साधक व्रत का पारण 13 जुलाई को सूर्योदय के बाद कर सकेंगे।

    11:59 (IST)12 Jul 2019
    इसलिए होती है देवशयनी एकादशी महत्वपूर्ण...

    हिन्दू धर्म में एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल के 12 महीनों में 24 एकादशी आती हैं। लेकिन आषाढ़ शुक्ल से कार्तिक शुक्ल एकादशी को विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं।

    11:47 (IST)12 Jul 2019
    आषाढ़ी एकादशी पर ऐसे करें पूजा...

    इस दिन उपवास करके सोना, चाँदी, ताँबा या पीतल की भगवान विष्णु की मूर्ति बनवाकर उसका यथोपलब्ध उपचारों से पूजन करें। पीले वस्त्र से विभूषित करके सफेद चादर से ढके हुए गद्दे तकिए वाले पलंग पर भगवान को शयन कराएं।

    11:34 (IST)12 Jul 2019
    देवशयनी एकादशी पर व्रत रखने का होता है खास महत्व...

    इस दिन उपवास रखें। और सोना, चाँदी, ताँबा या पीतल की भगवान विष्णु की मूर्ति बनवाकर उसका यथोपलब्ध उपचारों से पूजन करें। पीले वस्त्र से विभूषित करके सफेद चादर से ढके हुए गद्दे तकिए वाले पलंग पर भगवान को शयन कराएं।

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