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यहां गिरा था मां सती का दाहिना स्तन, जानिए अन्य शक्तिपीठों में क्यों है यह खास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह शक्तिपीठ अन्य शक्तिपीठों में खास महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां मां सती का दाहिना स्तन गिरा था।

Author नई दिल्ली | June 14, 2019 5:42 PM
देवी तालाब मंदिर।

वैसे तो पंजाब की धरती गुरुद्वारों और सिख गुरुओं के बलिदानों के लिए जानी जाती है, लेकिन देवी दुर्गा के इस शक्तिपीठ के दर्शन हेतु अनेकों श्रद्धालु यहां आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह शक्तिपीठ अन्य शक्तिपीठों में खास महत्व रखता है। मान्यता है कि यहां मां सती का दाहिना स्तन गिरा था। जिस कारण यह स्थान शक्तिपीठ में शुमार है। आगे जानते हैं कि इसका धार्मिक महत्व क्या है? साथ ही यह अन्य शक्तिपीठों में क्यों खास है?

मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक देवी तालाब मंदिर पंजाब के जालंधर शहर में स्थित है। इस मंदिर की कहानी बहुत ही रोचक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह शक्तिपीठ लगभग 200 सौ साल पुराना है। जो कि माता सती से जुड़ा हुआ है। पुराणों के अनुसार मां सती ने अपने पिता दक्ष के द्वारा भगवान शिव का अपमान किए जाने पर इन्होंने आत्मदाह किया था। ऐसा कहा जाता है कि माता सती के आत्मदाह के बाद उनके पति भगवान शिव ने क्रोध में अपनी तीसरी आंख खोल दी थी और सती के शरीर को उठाकर तांडव करने लगे।

भगवान के इस क्रोध के डर से और ब्रह्मांड को बचाने के लिए, भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र को भेजा। परिणाम स्वरूप सती का शरीर टुकड़ों-टुकड़ों में बंट गया और धरती पर बिखर गया। सती के शरीर का जो हिस्सा धरती पर जहां-जहां गिरा वह शक्तिपीठ के नाम से जाना जाने लगा। माता त्रिपुरमालिनी मंदिर उस स्थान को दर्शाता है जिस स्थान पर मां सती का दायां स्तन गिरा था। देवी मां को समर्पित इस मंदिर में हर साल अक्टूबर माह में हरिबल्लभ संगीत सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाता है। जहां देश और दुनिया के प्रसिद्ध कलाकार अपनी कलाओं का जलवा बिखेरते हैं।

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