दिव्य धाम की सीरीज में आज हम बात करने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित देवीपाटन मंदिर के बार में, यह शक्तिपीठ आस्था का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। साथ ही यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पाटेश्वरी को समर्पित है, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। खासतौर पर चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। नेपाल सहित देश के कई राज्यों से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आइए जानते हैं मंदिर का इतिहास और महत्व…
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देवीपाटन मंदिर का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवीपाटन मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि जब माता सती ने दक्ष यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के टुकड़े किए। इसी दौरान माता का दाहिना स्कंध (कंधा) और पट यहां गिरा था, इसलिए इस स्थान को देवीपाटन कहा गया।
भक्तों का विश्वास है कि मां पाटेश्वरी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यहां मुंडन संस्कार और विशेष पूजा का भी काफी महत्व माना जाता है।
देवीपाटन मंदिर का इतिहास
इतिहास और पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह मंदिर सदियों पुराना है और तराई क्षेत्र की प्रमुख आस्था स्थली माना जाता है। मंदिर का उल्लेख देवीभागवत, स्कंद पुराण और कई तांत्रिक ग्रंथों में भी मिलता है।
कहा जाता है कि यहां गुरु गोरखनाथ और सिद्ध रत्ननाथ ने तपस्या की थी। मंदिर परिसर में अखंड ज्योति और धूना भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं।
नवरात्रि में उमड़ती है भक्तों की भीड़
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान देवीपाटन मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जाता है और विशाल मेला लगता है।
कैसे पहुंचे देवीपाटन मंदिर?
आपको बता दें कि देवीपाटन मंदिर बलरामपुर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर तुलसीपुर क्षेत्र में स्थित है। यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। साथ ही सबसे पास रेलवे स्टेशन तुलसीपुर और बलरामपुर हैं। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा मिल जाती है। वहीं सबसे पास एयरपोर्ट गोरखपुर और लखनऊ हैं। वहां से सड़क मार्ग के जरिए मंदिर पहुंचा जा सकता है।
डिसक्लेमर- यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी पर आधारित है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं पर आस्था व्यक्ति विशेष की हो सकती है। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या आधिकारिक स्रोतों से समय और व्यवस्थाओं की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
