Dasha Mata Vrat 2026 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता का व्रत रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं दशा माता की पूजा करने के साथ कच्चे सूत में 10 गांठ बांधकर पीपल को बांधती हैं। ये व्रत मुख्य रूप से राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र आदि राज्यों में मनाया जाता है। दशा माता व्रत रखने से घर में सुख-शांति बनी रहती हैं और घर की खराब दशा सही हो जाती है। इसके साथ ही अनिष्ठ ग्रह भी शांत हो जाते हैं। इस साल दशमी तिथि दो दिन होने के कारण दशा माता व्रत की तिथि को लेकर असमंसज की स्थिति बनी हुई है। जानें दशा माता व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती…
दशा माता व्रत 2026 कब है (Dasha Mata Vrat 2026 Date And Time)
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 13 मार्च 2026 की सुबह 6 बजकर 28 मिनट से आरंभ होगा, जो 14 मार्च 2026 की सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगा। ऐसे में दशा माता का व्रत 13 मार्च, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा।
दशा माता 2026 शुभ मुहूर्त (Dasha Mata Vrat 2026 Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, दशा माता व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 13 मार्च को सुबह 06:53 बजे से 11:19 बजे तक रहेगा। इसके बाद दोपहर में 12:47 बजे से 02:16 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
दशा माता व्रत पूजा विधि (Dasha Mata Vrat Puja Vidhi)
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद सभी सामग्री थाली में एकत्र करके पीपल के पेड़ के नीचे जाएं। सबसे पहले सुहागिन महिलाएं कच्चे सूत का 10 तार का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठ लगा लें और इसे हल्दी से रंग लें। इस धागा को दशा माता का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद पीपल के पेड़ पर जल, फूल, माला, सिंदूर आदि चढ़ाने के बाद 10 गांठ वाला धागा भी चढ़ा दें। इसके साथ ही पीपल के पेड़ की परिक्रमा कर लें।। फिर घी का दीपक जलाने के साथ नल-दमयंती की कथा पढ़ें या फिर सुने। इसके बाद विधिवत आरती कर लें। फिर अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें। फिर डोरा को गले में बांध लेती हैं। इसके बाद घर आकर मुख्य द्वार के दोनों ओर हल्दी और कुमकुम से छापे बनाएं। फिर व्रत रखे रहें।
दशा माता व्रत मंत्र (Dasha Mata Vrat Mantra)
मूल बीज मंत्र: ॐ दशमाते नमः।
पूजन मंत्र: ॐ नमो दशामाते सर्वमंगलप्रदायै नमः। गृहकल्याणं कुरु कुरु स्वाहा।
दशा माता आरती (Dasha Mata Aarti)
आरती श्री दशा माता की।
जय सत-चित्त आनंद दाता की।
भय भंजनि अरु दशा सुधारिणी।
पाप -ताप-कलि कलुष विदारणी।
शुभ्र लोक में सदा विहारणी।
जय पालिनी दिन जनन की।
आरती श्री दशा माता की॥
अखिल विश्व- आनंद विधायिनी।
मंगलमयी सुमंगल दायिनी।
जय पावन प्रेम प्रदायिनी।
अमिय-राग-रस रंगरली की।
आरती श्री दशा माता की॥
नित्यानंद भयो आह्लादिनी।
आनंद घन आनंद प्रसाधिनी।
रसमयि रसमय मन- उन्मादिनी।
सरस कमलिनी विष्णुआली की।
आरती श्री दशा माता की॥
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
