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Chhath Puja Vidhi, Muhurat 2018: नहाय-खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक मनाया जाता है महापर्व छठ, यहां पढ़ें चारों दिन की पूजा विधि!

Chhath Puja Vidhi: छठ पूजा का महापर्व: तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है। इसमें ठेकुआ विशेष होता है। कुछ स्थानों पर इसे टिकरी भी कहा जाता है। चावल के लड्डू भी बनाए जाते हैं। प्रसाद व फल लेकर बांस की टोकरी में सजाए जाते हैं। टोकरी की पूजा कर सभी व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं।

Author Updated: November 13, 2018 9:53 AM
Chhath Puja Vidhi: मान्यता है कि छठ माता पूजा करने और वर्त रखने से माता उनकी संतानों की रक्षा करती है।

Chhath Puja Vidhi: 11 नवंबर से भारत में महापर्व कहा जाने वाला छठ का त्योहार शुरू हो चुका है। आज, 13 नवंबर को छठ पूजा है। कार्तिक महीने की चतुर्थी से शुरू होकर चौथे दिन सप्तमी तक मनाया जाता है। यह त्योहार उत्तर भारत खासकर बिहार में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास से मनाया जाता है। यह त्योहार माताओं के लिए बेहद खास होता है क्योंकि माताएं इस पर्व पर अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए वर्त रखती हैं। मान्यता है कि छठ माता पूजा करने और वर्त रखने से माता उनकी संतानों की रक्षा करती है। इस महापर्व को छठ पूजा, छठी माई पूजा, डाला छठ, सूर्य षष्ठी पूजा और छठ पर्व के नामों से भी जाना जाता है। चार दिन चलने वाले इस महापर्व के दौरान पहला दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन लोहंडा और खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथा दिन उषा अर्घ्य दिया जाता है।

छठ पूजा की विधि: नहाय-खाय (11 नवंबर 2018): छठ पूजा का त्योहार भले ही कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है लेकिन इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ होती है। मान्यता है कि इस दिन सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बना लिया जाता है। छठव्रती स्नान कर नए कपड़े पहनते हैं और शाकाहारी भोजन लेते हैं। व्रती के भोजन करने के पश्चात ही घर के बाकि सदस्य भोजन करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है।

खरना (12 नवंबर 2018): दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करते हैं। इसे ‘खरना’ कहा जाता है। खरना का प्रसाद लेने के लिए आस-पास के सभी लोगों को निमंत्रित किया जाता है। प्रसाद के रूप में गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। इसमें नमक या चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है।

शुक्ल षष्ठी (13 नवंबर 2018): तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है। इसमें ठेकुआ विशेष होता है। कुछ स्थानों पर इसे टिकरी भी कहा जाता है। चावल के लड्डू भी बनाए जाते हैं। प्रसाद व फल लेकर बांस की टोकरी में सजाए जाते हैं। टोकरी की पूजा कर सभी व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की आराधना की जाती है। छठी मैया की प्रसाद भरे सूप से पूजा की जाती है।

उषा अर्घ्य (14 नवंबर 2018): चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठव्रती दोबारा वहीं जमा होते हैं जहां उन्होंने शाम को अर्घ्य दिया था और पिछले शाम की प्रक्रिया की पुनरावृत्ति होती है। अंत में व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत पूर्ण करते हैं। विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा कर छठ पूजा संपन्न की जाती है।

छठ पूजन मंत्र
ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं।
अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम्।।

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