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Chhath Puja 2017: जानिए किस दिन रखा जाएगा षष्ठी का व्रत और कब है छठ पर्व की मुख्य पूजा

Chhath Puja 2017 Date Bihar, India: दिवाली के बाद सबसे बड़ा त्योहार आता है छठ पूजा। इस पर्व को छठ, छठी, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी जैसे अनेक नामों से जाना जाता है।

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छठ पूजा भारत में भगवान सूर्य की उपासना का सबसे प्रसिद्ध हिंदू त्‍योहार है। इस त्‍योहार को षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है, जिस कारण इसे सूर्य षष्ठी व्रत या छठ कहा गया है। यह त्‍योहार एक साल में दो बार मनाया जाता है पहली बार चैत्र महीने में और दूसरी बार कार्तिक महीने में। हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ त्‍योहार को चैती छठ कहा जाता है जबकि कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले इस त्‍योहार को कार्तिक छठ कहा जाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में यह त्‍योहार काफी लोकप्रिय पर्व है। इस त्‍योहार को यहां पर पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल-प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। मंगलवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ चार दिनों तक चलने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ प्रारंभ हुआ है। छठ पर्व को लेकर पूरे बिहार का माहौल भक्तिमय हो गया है। पटना सहित बिहार के शहरों से लेकर गांवों तक में छठी मइया के कर्णप्रिय और पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं। छठ को लेकर सभी क्षेत्रों में सफाई की गई है तथा रोशनी की पुख्ता व्यवस्था की गई है। पर्व के तीसरे दिन गुरुवार शाम व्रतधारी जलाशयों में पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य देंगे।

दिवाली के बाद सबसे बड़ा त्योहार आता है छठ पूजा। इस पर्व को छठ, छठी, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। छठ का भोजपुरी में अर्थ होता है छठा दिन। कार्तिक महीने की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाने वाला ये त्यौहार चार दिनों तक चलता है। मुख्य पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की छठी के दिन की जाती है। इस दौरान सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की अराधना की जाती है। इस दिन सूर्य की भी पूजा की जाती है। माना जाता है जो व्यक्ति छठ माता की इन दिनों पूजा करता है छठ माता उनकी संतानों की रक्षा करती हैं।

मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा के लिए कई कथाएं प्रचलित हैं इनमें से एक प्रमुख है कि विजयादशमी के दिन लंकापति रावण के वध के बाद दिवाली के दिन भगवान राम अयोध्या पहुंचे। रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए भगवान राम ने ऋषि-मुनियों की सलाह से राजसूर्य यज्ञ किया। इस यज्ञ के लिए अयोध्या में मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया गया। मुग्दल ऋषि ने मां सीता को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने की सलाह दी। इसके बाद मां सीता मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी। इसके बाद से ही यह पर्व मनाया जाता है। इस बार छठ पूजा का पर्व 24 अक्टूबर से शुरु होकर 27 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। मुख्य पूजा 26 अक्टूबर को की जाएगी।

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