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नहाय-खाय से शुरू हुआ छठ का महापर्व, इस दिन जानिये क्या प्रसाद ग्रहण करने की है मान्यता

Nahay-Khay Puja: चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार का नहाय-खाय पहला दिन होता है। इस दिन व्रती सुबह-सवेरे नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं।

chhath puja, chhath puja 2020, nahay-khaay, kharna, chhath puja biharकार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पर्व शुरू होता है। जबकि षष्टी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है।

Chhath Puja 2020: आस्था का सबसे बड़ा पर्व छठ आज से शुरू हो चुका है। बिहार का प्रमुख महापर्व छठ के बारे में जानने के लिए हर व्यक्ति इच्छुक रहता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बसे प्रवासी बिहारी भी सुविधानुसार घाटों पर जाकर छठ पूजा करते हैं। कार्तिक महीने की षष्टी तिथि को छठ मनाई जाती है। बता दें कि इससे पहले चैत्र मास में भी छठ  पर्व का आयोजन होता है जिसे चैती छठ कहते हैं। हालांकि, कार्तिक छठ की अहमियत अधिक होती है। इस मौके पर छठी मैया की पूजा होती है। आज यानी 18 नवंबर, बुधवार को व्रती नहाय-खाय से पूजा की शुरुआत होती है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व –

चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार का नहाय-खाय पहला दिन होता है। इस दिन व्रती सुबह-सवेरे नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। इसलिए इसे नहाय-खाय कहा जाता है। मान्यता है कि नहाय-खाय के दिन बनने वाला खाना रसोई के गैस-चूल्हे पर बनने की बजाय लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है। बता दें कि चूल्हा बनाने में सिर्फ आम के पेड़ की लकड़ियों का ही इस्तेमाल होता है। सबसे पहले इस दिन प्रसाद का भोग सूर्य देव को लगता है। फिर व्रती प्रसाद ग्रहण करती हैं और उसके बाद घर के सभी बाकी सदस्य भी प्रसाद खाते हैं।

प्रसाद में किसका लगता है भोग: इस दिन सुबह-सवेरे नहाकर नये कपड़े पहनती हैं और पूजा करती हैं। इसके उपरांत लकड़ी के चूल्हे पर बना प्रसाद ग्रहण करती हैं। इस दिन चना दाल, कद्दू की सब्जी और चावल को प्रसाद के रूप में खाती हैं। वहीं, अगले दिन खरना होता है और उसके बाद शाम का अर्घ्य और फिर अगले दिन सुबह के अर्घ्य के साथ इस महापर्व का समापन हो जाएगा।

जानिये छठ पूजा का पूरा कार्यक्रम: 
नहाय-खाय – 18 नवंबर 2020, बुधवार
खरना – 19 नवंबर 2020, गुरुवार
डूबते सूर्य को अर्घ्य – 20 नवंबर 2020, शुक्रवार
उगते सूर्य को अर्घ्य – 21 नवंबर 2020, शनिवार

जानिये छठ का महत्व: कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पर्व शुरू होता है। जबकि षष्टी तिथि को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण वध के बाद श्रीराम और देवी सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को व्रत रखा और सूर्य देव का ध्यान किया। इसके अगले दिन सप्तमी तिथि को उगते सूर्य की उपासना की। ये प्रकृति के खास महत्व को बताता है जिसमें डूबते व उगते सूर्य और नदी का महत्व बताया गया है। साथ ही, इस त्योहार में साफ-सफाई और शुद्धता का खास ध्यान रखना पड़ता है।

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