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Surya Grahan 2018: सूतक काल में गलती से भी ना करें ये काम, होता है सबसे संवेदनशील समय

Solar Eclipse 2018, Surya Grahan 2018: हिंदू धर्म में आंशिक या पूर्ण हर ग्रहण को अशुभ माना जाता है। ज्योतिष विद्या के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है।
Solar Eclipse, Surya Grahan 2018: सूतक काल के दौरान भोजन पकाना और ग्रहण करना अशुभ माने जाते हैं।

Solar Eclipse 2018/Surya Grahan 2018: हिंदू धर्म में आंशिक या पूर्ण हर ग्रहण को अशुभ माना जाता है। ज्योतिष विद्या के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है। साल का पहला सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार 15 फरवरी की रात 12 बजकर 25 मिनट से शुरु होगा, इस अनुसार 15 फरवरी की दोपहर से सूतक काल शुरु हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार सूतक की अवधि में विशेष कार्यों की मनाही होती है। सूतक को वो समय माना जाता है जब प्रकृति सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है। जिस कारण से घटना-दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है।

सूर्य ग्रहण के समय शौचालय जाना अशुभ होता है लेकिन रोगी, वृद्ध और बालकों के लिए ये नियम लागू नहीं होता है। भोजन का ग्रहण करना अशुभ माना जाता है। फल, जूस आदि का सेवन किया जा सकता है। सूतक काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखने के लिए कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान उन्हें नुकीली वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। सूर्य ग्रहण के दौरान ऊं सूर्यायः नमः का जाप करना लाभकारी होता है।ग्रहण काल में मंत्रों का जाप किया जाए तो शीघ्र फलदाई माना जाता है। सूर्य ग्रहण के समय महामृत्युंजय का जाप सभी कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। किसी भी प्रकार के कार्य को सिद्ध करने के लिए इस मंत्र का जाप लाभकारी होता है। सूतक काल के दौरान वशीकरण, शत्रु कष्ट निवारण, मन की शांति के लिए गायत्री मंत्र का जाप लाभकारी माना जाता है।

पितृ दोष से ग्रसित लोगों को पितरों के नाम का अन्न निकालकर ग्रहण खत्म होने के बाद दान करें। सूतक काल खत्म होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान करना लाभकारी माना जाता है। सूतक काल के शुरु होने से पहले तुलसी के पत्ते तोड़ लें उसके बाद तुलसी को स्पर्श ना करें। ग्रहण के समय किसी की आलोचना, अपशब्द और शक-संदेह नहीं करना चाहिए। सूतक काल में आलस्य ना करें। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इस वक्त सोना नहीं चाहिए। ग्रहण खत्म होने के बाद किसी मंदिर में जाकर दीपक अवश्य जलाएं, इससे नकरात्मक प्रभाव कम हो जाता है। ग्रहण में खान-पीना, सोना, नाखून काटना, भोजन पकाना, तेल लगाना आदि कार्य भी इस समय वर्जित माना जाता है।

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