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आषाढ़ पूर्णिमा के दिन लगने जा रहा है चंद्र ग्रहण, क्या लगेगा सूतक?

ये साल का तीसरा चंद्र ग्रहण है। जो यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। लेकिन इस ग्रहण को भारत के लोग नहीं देख पाएंगे। ग्रहण की शुरुआत 08:38 AM से होगी और इसकी समाप्ति 11:21 AM पर।

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जुलाई माह की 5 तारीख को रविवार के दिन चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। विज्ञान में जहां इसे एक खगोलीय घटना माना जाता है तो वहीं ज्योतिष में इसे अशुभ घटना के रूप में देखा जाता है। इसलिए ग्रहण के समय कुछ कार्य वर्जित माने गये हैं। धार्मिक मान्याओं अनुसार ग्रहण से पहले सूतक लग जाता है। जिस दौरान किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते। क्योंकि ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

कहां दिखाई देगा ग्रहण? ये साल का तीसरा चंद्र ग्रहण है। जो यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। लेकिन इस ग्रहण को भारत के लोग नहीं देख पाएंगे। ग्रहण की शुरुआत 08:38 AM से होगी और इसकी समाप्ति 11:21 AM पर। ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 43 मिनट की है। इसका परमग्रास 09:59 AM पर है।

क्या होता है सूतक काल? चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण से कुछ समय पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले तो चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। मान्यता अनुसार ग्रहण के समय व्यक्ति को खाने पीने, नित्य कर्म, तामसी भोजन और तामसी प्रवृति से दूर रहना चाहिए। जानिए सूतक काल में और क्या सावधानियां बरतने की जरूरत पड़ती है।

– सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का सबसे ज्यादा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। इसलिए ग्रहण काल में प्रेग्नेंट महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

– धार्मिक दृष्टिकोण से सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए।

– ग्रहण का सूतक काल लगने से पहले खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रख देने चाहिए। मान्यता है कि इससे खाना दूषित नहीं होता।

– मान्यता है कि सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते।

– पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार ग्रहण के वक्‍त छोटे बच्‍चों को खासकर नवजात बच्‍चों को एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

– ग्रहण का सूतक काल लगते ही गर्भवती महिलाओं को अपने पेट पर गेरू लगाने की सलाह दी जाती है, इससे उनके अजन्‍मे बच्‍चे की रक्षा होती है।

– सूतक काल से ही पूजापाठ के सभी कार्य बंद कर दिए जाते हैं और फिर ग्रहण की समाप्‍ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण करके पूजा आरंभ की जाती है।

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