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Chanakya Neeti: चाणक्य की वो 10 बातें जो दिला सकती है जीवन के हर मोड़ पर सफलता

Chanakya Neeti: चाणक्य नीति के अनुसार सबसे पहली बात जो चाणक्य ने कही है कि मूर्ख लोगों से कभी भी विवाद नहीं करना चाहिए। इसका मतलब ये है कि चाणक्य कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति मूर्ख लोगों के साथ विवाद करता है तो उसमें उसका ही नुकसान होता है।

आचार्य चाणक्य।

Chanakya Neeti: आचार्य चाणक्य एक ऐसे महान विद्वान थे जिनके द्वारा बताई गई बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थी। वे चाणक्य ही थे जिन्होंने अपनी कूटनीति के द्वारा साधारण चन्द्रगुप्त को मगध का राजा बना दिया था। चाणक्य ने चाणक्य नीति नाम की पुस्तक लिखी थी जिसमें ऐसी बातें बताई गयी है जो हमारे जीवन को एक सार्थक मोड़ दे सकती है। चाणक्य नीति के अनुसार हम आपको वैसी 10 बातें बता रहे हैं जिसे जानकर हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता के शिखर पर आसानी से पहुंच सकता है। आगे हम इसे जानते हैं।

चाणक्य नीति के अनुसार सबसे पहली बात जो चाणक्य ने कही है कि मूर्ख लोगों से कभी भी विवाद नहीं करना चाहिए। इसका मतलब ये है कि चाणक्य कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति मूर्ख लोगों के साथ विवाद करता है तो उसमें उसका ही नुकसान होता है। क्योंकि मूर्खों के पास समझ नहीं होती है। चाणक्य ने दूसरी बात ये बताई है कि अपनी कमजोरी दूसरों को नहीं बतानी चाहिए। बहुत सारे लोग अपने करीबी लोगों को अपनी कमजोरियों के बारे में खुलकर बता देते हैं। जो बाद में खुद के लिए नुकसान साबित होता है। करीबी लोगों के साथ-साथ उनकी ये कमजोरी धीरे-धीरे बहुत सारे लोगों का पता चल जाता है। इस कमजोरी को जानकर बहुत लोग इसका फायदा भी उठाते हैं। इसलिए एक समझदार मनुष्य को अपनी कमजोरी किसी को भी नहीं बतानी चाहिए।

तीसरी बात किसी भी व्यक्ति का एक दोष उसके सभी गुणों को नष्ट कर सकता है। कुछ लोगों के पास जीवन में बहुत सारे धन-दौलत रहने के बाद भी उनके साथ कुछ ऐसा हो जाता है, कोई ऐसी गलती कर देते हैं जिसके कारण उनकी जिंदगी नरक जैसी हो जाती है। इसलिए मनुष्य को दोष करने से बचना चाहिए। चौथी बात जो चाणक्य ने कही है वो है- धन को सोच समझकर खर्च करना चाहिए। सब जानते हैं कि धन है तो जीवन है। बिना धन के हर मनुष्य कंगाल है। धन के बिना न तो इज्जत है और न ही सुख समृद्धि। अगली बात जो चाणक्य ने कही है वो है- बदनामी से डरें। क्योंकि चाणक्य नीति में चाणक्य ने कहा है कि अपमानित होकर जीने से मारना अच्छा है। मृत्यु तो बस एक क्षण का दुख देती है लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुख लाता है।

अगर एक बार भी जिंदगी में बदनाम हो गए तो दुबारा दूसरों की नजरों में पहले जैसा नहीं रह सकता है। इसलिए जीवन में कोई बड़ा स्टेप लेने से पहले हजार बार सोचना चाहिए। छठी बात जो चाणक्य ने कही है वो है- आलस्य का त्याग। कहते हैं कि आलस्य इंसान का सबसे बड़ा शत्रु है। इसलिए यदि आपको अपना जीवन खुशहाल बनाना है तो सबसे पहले आलस्य को त्यागना चाहिए। सातवीं बात जो चाणक्य ने कहा है कि जो बात अपने कानों से न सुनें उस पर विश्वास न करें। आठवीं बात जो चाणक्य ने कहा है कि अपने से कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के लोगों के साथ दोस्ती न करें। ऐसी मित्रता कभी भी आपको खुशी नहीं देगी।

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