Chanakya Niti: यह एक चीज छीन लेती है मनुष्य का सुख और चैन, चाणक्य नीति में किया गया है जिक्र

किसी भी मनुष्य को मान-सम्मान कमाने में जितनी मेहनत करनी पड़ती है, थोड़ी-सी बदनामी एक पल में ही उसके सारे सम्मान को गंवा देती है।

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चाणक्य नीति के अनुसार बदनामी किसी भी व्यक्ति के सुख-चैन को पूरी तरह से छीन लेती है

महान बुद्धिजीवी आचार्य चाणक्य अपनी रणनीतियों को लेकर काफी मशहूर हैं। चाणक्य जी ने अपनी नीतियों के दम पर ही एक साधारण से बालक चंद्रगुप्त मौर्य को मगध का सम्राट बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आचार्य चाणक्य को समाज के लगभग सभी विषयों की गहराई से समझ थी, इसलिए उन्होंने समाज के कल्याण के लिए एक नीति शास्त्र की रचना भी की थी। इस नीति शास्त्र में चाणक्य जी ने धन, संपत्ति, पत्नी और दोस्ती समेत लगभग सभी मुद्दों को लेकर सुझाव दिए हैं।

आचार्य चाणक्य के विचार सुनने में भले ही कठिन क्यों ना लगें लेकिन जो लोग चाणक्य जी की नीतियों को फॉलो करता है, वह अपनी जिंदगी में कभी भी असफल नहीं होता। चाणक्य जी ने अपने नीति शास्त्र में एक चीज का जिक्र किया है, जिसके कारण मनुष्य का सुख-चैन पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है। वह चीज है ‘बदनामी का डर’, हर मनुष्य मान-सम्मान के साथ जीना चाहता है।

चाणक्य जी के अनुसार मनुष्य का सबसे बड़ा भय बदनामी होती है। बदनामी का डर मनुष्य को हमेशा परेशान करता रहता है। कुछ लोग तो इस बात को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं की कहीं वह कुछ ऐसा ना कर बैठें, जिससे उनकी समाज में बदनामी हो जाए। बदमानी मनुष्य का सुख-चैन पूरी तरह से छीन लेती है।

चाणक्य जी का मानना था की किसी भी मनुष्य को मान-सम्मान कमाने में जितनी मेहनत करनी पडती है, थोड़ी-सी बदनामी एक पल में ही उसके सारे सम्मान को गंवा देती है। इसलिए जब किसी भी मनुष्य को बदनामी का भय सताने लगता है तो उसका सारा सुख-चैन छिन जाता है।

चाणक्य जी के मुताबिक बदनामी ही ऐसा भय है, जो अगर व्यक्ति के सिर पर हावी हो जाए तो समाज भी उससे दूरी बना लेता है। बदनामी के डर से व्यक्ति को मानसिक दवाब तक झेलना पड़ सकता है।

इसलिए आचार्य चाणक्य जी का मानना है की व्यक्ति को कोई भी कदम उठाने से पहले एक बार विचार जरूर कर लेना चाहिए। क्योंकि एक गलत फैसला, समाज में उनकी बदनामी तक करवा सकता है।

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