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चाणक्य नीति: समय रहते इन चीजों का कर देना चाहिए त्याग

चाणक्य अनुसार हमें ऐसे धर्म के दिखाए गए रास्‍ते पर नहीं चलना चाहिए, जिसमें दया की कोई भावना न हो। यानी कि ऐसे धर्म की मान्‍यताओं को नहीं मानना चाहिए जिसमें जीवों के प्रति कोई दया न हो।

Author नई दिल्ली | July 15, 2019 11:40 AM
आचार्य चाणक्य की नीति।

Chanakya neeti for people: मानव समाज के कल्याण के लिए आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियों का खास महत्व माना गया है। चाणक्य जिन्हें कौटिल्य के नाम से जाना जाता है। उनके द्वारा कई ऐसी नीतियां बताई गई हैं जिनमें इंसान को अपनी सभी समस्याओं का हल मिल सकता है। चाणक्य को देश के सर्वाधिक महान बुद्धिजीवियों और आचार्यों में से एक माना जाता है। इन्होंने अपनी तेज बुद्धि के बल पर ही चंद्र गुप्त मौर्य को राजा बना दिया था। इनकी एक नीति में उन चार चीजों के बारे में बताया है जिनका समय रहते त्याग कर देना चाहिए। जानिए वे कौन सी चीजें हैं…

– चाणक्य अनुसार हमें ऐसे धर्म के दिखाए गए रास्‍ते पर नहीं चलना चाहिए, जिसमें दया की कोई भावना न हो। यानी कि ऐसे धर्म की मान्‍यताओं को नहीं मानना चाहिए जिसमें जीवों के प्रति कोई दया न हो। ऐसे धर्म को मानने से तो अच्‍छा है कि व्‍यक्ति किसी भी धर्म को न मानें।

– व्यक्ति के जीवन का मार्गदर्शक होता है गुरु। चाणक्य कहते हैं कि हमें ऐसे गुरु के पास अधिक समय तक नहीं रुकना चाहिए जो खुद ही विद्या से हीन हो। अत: जिसे अपने विषय की संपूर्ण जानकारी न हो। ऐसे गुरु के साथ रहकर हम अपना बहुमूल्‍य समय गंवा देते हैं। बेहतर होगा कि ऐसे गुरु का साथ छोड़कर हमें किसी ज्ञानी व्‍यक्ति के साथ जुड़ना चाहिए।

– चाणक्य कहते हैं कि अगर किसी इंसान की पत्‍नी बार-बार क्रोध करती है तो उसके कलह से घर का वातावरण खराब होगा और घर में रहने वाले सभी लोगों का सुख चैन छिन जाएगा। बेहतर होगा कि आप उन्‍हें पहले समझाने की कोशिश करें। अगर तब भी स्थिति में कोई सुधार न दिखाई दे तो समय रहते सही फैसला ले लें।

– किसी भी रिश्ते में विश्वास और स्नेह का महत्वपूर्ण स्थान होता है। चाणक्य अनुसार हमें ऐसे बंधु बांधवों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए जिनके अंदर हमारे लिए कोई स्‍नेह न हो। ऐसे बंधुओं के होने से क्या फायदा जो वक्‍त पर आपके काम न आ सकें। इसलिए जिनके अंदर स्‍नेह का अभाव हो ऐसे रिश्‍तेदारों का त्याग कर देना ही अच्छा होता है।

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