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चाणक्य नीति अनुसार इन 5 लोगों के बीच से कभी नहीं चाहिए गुजरना

Chanakya neeti: चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान में भी इस बात का ध्यान रखने की सलाह दी है। उन्होंने बताया है कि कभी भी अग्नि के पास बैठे ब्राह्मणों के बीच से नहीं गुजरना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से अनुष्ठान की मर्यादा भंग होती है जिससे अनुष्ठान पर बैठे पुरोहित क्रोधित हो सकते हैं।

Author नई दिल्ली | July 10, 2019 7:32 AM
चाणक्य अनुसार अगर पति-पत्नी बातचीत कर रहे हों तो उनके पास से भी नहीं गुजरना चाहिए। क्योंकि ऐसा करना शिष्टाचार के नियमों के विरुद्ध है।

आचार्य चाणक्य जो विष्णुगुप्त और कौटिल्य के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। इन्हें एक महान दार्शनिक, राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के तौर पर जाना जाता है। इन्होंने भारतीय राजनीतिक ग्रंथ, ‘द अर्थशास्त्र’ लिखा था। इस ग्रंथ में उन्होंने संपत्ति, अर्थशास्त्र और भौतिक सफलता से संबंधित लगभग हर पहलू को लिखा था। कहा जाता है कि इनके इस नीति ग्रंथ में जीवन की हर समस्या का हल मिल जाता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी बुद्धिमत्ता और कुशाग्र विचारों से कूटनीति और राजनीति की आसान शब्दों में व्याख्या की है। इनके नीति ग्रंथ के एक श्लोक में बताया गया है कि वे कौन से 5 लोग हैं जिनके बीच में से हमें कभी नहीं गुजरना चाहिए…

विप्रयोर्विप्रवह्नेश्च दम्पत्यो: स्वामिभृत्ययो:।
अन्तरेण न गन्तव्यं हलस्य वृषभस्य च।।
– आचार्य चाणक्य ने अपने श्लोक में कहा है कि दो ज्ञानी अगर आपस में बात कर रहे हैं तो उनके बीच से कभी नहीं गुजरना चाहिए। अगर आपने बीच से गुजरने का प्रयास किया तो आप उनके ज्ञान से तो वंचित रह ही जाएंगे साथ ही उनके गुस्से का भी भागी बनना पड़ सकता है।

– चाणक्य ने अपनी नीतियों के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठान में भी इस बात का ध्यान रखने की सलाह दी है। उन्होंने बताया है कि कभी भी अग्नि के पास बैठे ब्राह्मणों के बीच से नहीं गुजरना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से अनुष्ठान की मर्यादा भंग होती है जिससे अनुष्ठान पर बैठे पुरोहित क्रोधित हो सकते हैं। साथ ही इससे देवताओं का भी अपमान होता है जिससे धर्म, धन के साथ-साथ मान-सम्मान की भी हानि होती है।

– इसी तरह अगर मालिक और कर्मचारी बात कर रहे हों तो उनके बीच में नहीं आना चाहिए। क्योंकि इनके बीच में आने से आप किसी के भी क्रोध का पात्र बन सकते हैं।

– अगर पति-पत्नी बातचीत कर रहे हों तो उनके पास से भी नहीं गुजरना चाहिए। क्योंकि ऐसा करना शिष्टाचार के नियमों के विरुद्ध है।

– चाणक्य ने अपनी नीति के अंत में कहा है कि हल और बैल के बीच में से नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि अगर इन दोनों के बीच से निकलेंगे तो आपको चोट लग सकती है। इसलिए इनसे दूर रहने में ही भलाई है।

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