यदि एक ही कर्म से समस्त संसार को वश में करना चाहते हैं तो जानिए ये चाणक्य नीति

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Chanakya neeti: चाणक्य ने अपनी पुस्तक चाणक्य नीति में बहुत सी ऐसी बातों की जानकारी दी है जो आपको जीवन के किसी न किसी मोड़ पर सहायक सिद्ध हो सकती है। हर इंसान की इच्छा होती है कि वह जीवन में ऐसे कर्म करें जिससे सभी लोग उसके मुरीद हो जाएं। चाणक्य कहते हैं कि यदि एक ही कर्म से समस्त संसार को वश में करना चाहते हो तो पंद्रह मुखों से विचरण करने वाले मन को रोको, अर्थात पहले उसे वश में करो। पंद्रह मुख है- मुंह, आंख, नाक, कान, जीभ, त्वक, हाथ, पैर, लिंग, गुदा, रस, गंध, स्पर्श और शब्द। इन पर वश करने से इंसान सफल हो जाता है। यहां जानिए चाणक्य की अन्य महत्वपूर्ण नीतियों के बारे में…

– हाथी मोटे शरीर वाला है, परन्तु अंकुश से वश में रहता है। क्या अंकुश हाथी के बराबर है? दीपक के जलने पर अंधकार नष्ट हो जाता है। क्या अंधकार दीपक बराबर है? वज्र से बड़े-बड़े पर्वत शिखर टूटकर गिर जाते हैं। क्या वज्र पर्वतों के समान हैं? सत्यता यह है कि जिसका तेज चमकता रहता है, वही बलवान है। मोटेपन से बल का अहसास नहीं होता।

– राजा, अग्नि, गुरु, स्त्री, इनसे सामान्य व्यवहार करना चाहिए क्योंकि अत्यंत समीप होने पर यह नाश के कारण होते हैं और दूर रहने पर इनसे कोई फल प्राप्त नहीं होता।

– अग्नि, पानी, स्त्रियां, मूर्ख, सांप और राजाकुल से निकट संबंध सावधानी के साथ करना चाहिए क्योंकि ये छ: तत्काल प्राणों को हरने वाले हैं।

– जिसके पास गुण है, जिसके पास धर्म है, वही जीवित है। गुण और धर्म से विहीन व्यक्ति का जीवन निरर्थक है।

– मन की इच्छा अनुसार सारे सुख किसको मिलते हैं? किसी को नहीं मिलते। इससे यह सिद्ध होता है कि दैव के बस में ही सब कुछ है। अत: संतोष का ही आश्रय लेना चाहिए। संतोष सबसे बड़ा धन है। सुख और दुख में उसे समरस रहना चाहिए।

– दान देने का स्वभाव, मधुर वाणी, धैर्य और उचित की पहचान, ये चार बातें अभ्यास से नहीं आती, ये मनुष्य के स्वभाविक गुण हैं। ईश्वर में यह सभी गुण होते हैं। जो व्यक्ति इन गुणों का उपयोग नहीं करता, वह ईश्वर के द्वारा दिये गये वरदान की उपेक्षा ही करता है और दुर्गुणों को अपनाकर घोर कष्ट भोगलता है।

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