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Chanakya Niti: कोरोना महामारी के इस संकट में घर पर कैसे रखें अपना ख्याल, जानिए चाणक्य नीति से

Chanakya Quotes: चाणक्य अनुसार सभी तरह की औषधियों में गुरच यानी गिलोय प्रधान है। अत: व्यक्ति को अपने को स्वस्थ रखने के लिए इसका सेवन करना चाहिए।

चाणक्य ने अपनी एक नीति में कहा है कि खड़े अन्न से दसगुना पौष्टिक है पिसा हुआ अन्न। पिसे हुए अन्न से दसगुना पौष्टिक है दूध। दूध से अधिक पौष्टिक है मां स और मांस से भी कई गुना पौष्टिक है घी।

Chanakya Niti In Hindi: कोरोना वायरस (CoronaVirus) को लेकर इस समय पूरी दुनिया परेशान है। हर देश इसे रोकने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। संकट के इस दौर में सभी को अपने आप को स्वस्थ रखने की सलाह दी जा रही है। इस समय जागरुकता और सतर्कता की सबसे ज्यादा जरूरत है। कोरोना महामारी के कारण आज पूरा देश लॉक डाउन कर दिया गया है। ऐसे में आप घर बैठे चाणक्य के इन टिप्स को अपनाकर अपनी हेल्थ का ध्यान रख सकते हैं।

– आज के दौर में जहां ज्ञानीजन गिलोय के महत्व को बता रहे हैं। तो वहीं इसकी विशेषता के बारे में चाणक्य ने कई सदी पहले बता दिया था। चाणक्य अनुसार सभी तरह की औषधियों में गुरच यानी गिलोय प्रधान है। अत: व्यक्ति को अपने को स्वस्थ रखने के लिए इसका सेवन करना चाहिए।

– चाणक्य ने अपनी एक नीति में कहा है कि खड़े अन्न से दसगुना पौष्टिक है पिसा हुआ अन्न। पिसे हुए अन्न से दसगुना पौष्टिक है दूध। दूध से अधिक पौष्टिक है मां स और मांस से भी कई गुना पौष्टिक है घी। इसलिए हेल्दी लाइफ जीने के लिए इन चारों चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए।

– ये तो सभी जानते हैं कि स्वस्थ वही है जो अपने आप को फिट रखे। अपना वजन न बढ़ने दे। वजन बढ़ना आज के दौर की सबसे बड़ा समस्या है। मोटापा शरीर में कई बीमारियां लेकर के आता है। चाणक्य ने अपनी नीति में बताया है कि कौन सा भोजन करने से वजन बढ़ता है और कौन सा भोजन करने से ताकत। चाणक्य कहते हैं कि शाक खाने से रोग बढ़ता है और दूध पीने से शरीर बनता है। घी खाने से वीर्य में वृद्धि होती है और मांस खाने से मांस बढ़ता है। इसलिए शरीर बनाने के लिए खूब दूध पिएं। पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए घी का सेवन करें और शरीर में मांस यानी चर्बी बढ़ाने के लिए मांस का सेवन करें। लेकिन मांस शरीर में पहले से ही काफी है तो इसका सेवन न ही करें तो बेहतर होगा।

– आज के समय में शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी है। चाणक्य नीति के एक दोहे के अनुसार समझदार व विद्वान लोगों का समय सबेरे जुए के प्रसंग में, दोपहर को स्त्री प्रसंग में और राच को चोर की चर्चा में जाता है। इसका अर्थ है जिसमें जुए की कथा आती है वो है महाभारत। दोपहर को स्त्री प्रसंग वाली कथा का मतलब रामायण के पाठ से है जिसमें शुरू से लेकर अंत तक सीता की गाथा झलकती है। रात को चोर के प्रसंग का अर्थ है श्रीकृष्ण की कथा यानी श्रीमद् भागवत कहना और सुनना। इन तीनों धार्मिक पुस्तकों का पाठ करने से चित्त और मन शांत रहता है।

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