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Chanakya Niti: बीते समय से शक्ति बटोरो और सजग होकर गढ़ो अपना वर्तमान, भविष्य खुद ही संवर जायेगा

Chanakya Niti: जब हम कोई योजना बनाते हैं तो उसकी असफलता को लेकर विचार हमारे मन में आने लगते हैं। इस पर चाणक्य नीति कहती है कि सृष्टि का नियम है जिस तरह के विचार हम अस्तित्व को संप्रेषित करते हैं उसी प्रकार की ऊर्जा अस्तित्व द्वारा हम तक पहुंचती है। याद रहे विचारों का सकारात्मक होना अनिवार्य है।

चाणक्य कहते हैं कि साहस भय के न होने में नहीं बल्कि साहस भय का सामना करने में है।

चाणक्य को कौन नहीं जानता इनकी नीतियों ने चंद्रगुप्त मौर्य जैसे साधारण से बालक को मगध का सम्राट बना दिया। चाणक्य पर आधारित कई सीरियल्स भी बनाए गए। जिनमें दिखाया गया कि कैसे चाणक्य ने अपनी नीतियों से सदैव चंद्रगुप्त मौर्य का मनोबल बढ़ाया है। आज के दौर में जब हर कोई कोरोना (Coronavirus) महामारी के चलते परेशान है, भविष्य में क्या होगा इस बात की चिंता हर पल सताई जा रही है। ऐसे में चाणक्य की कुछ नीतियां ऐसी हैं जो आपके तनाव कम कर सकती हैं। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति वर्तमान से ज्यादा अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहता है। जबकि भविष्य में क्या होगा ये कौन जानता हैं। इसलिए वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करो भविष्य अपने आप ही संवर जायेगा।

वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करें: चाणक्य अनुसार भविष्य को बेहतर बनाने के लिए हमें न तो अपने बीते समय को लेकर अनावश्यक रूप से कुढ़ना चाहिए और ना ही भविष्य को लेकर अनावश्यक रूप से उत्सुक होना चाहिए, वर्तमान ही सत्य है। उसी पर पूरा ध्यान केंद्रित होना चाहिए। इसलिए अपने बीते समय से शक्ति बटोरो और सजग होकर गढ़ो अपना वर्तमान, भविष्य अपने आप ही संवर जायेगा। चाणक्य कहते हैं कि साहस भय के न होने में नहीं बल्कि साहस भय का सामना करने में है।

अर्जुन की तरह सिर्फ लक्ष्य पर रखें दृष्टि: चाणक्य कहते हैं कि जब भी हम कोई योजना बनाते हैं तो उसकी सफलता को लेकर संशय मन में रहता है। इसलिए योजना की परिकल्पना को अनुभव और अंतर्दृष्टि के साथ सोचे समझे संभावित संकटों का ध्यान में रखते हुए कार्य में लाने का प्रयास करें। किन्तु कार्य की सफलता योजना, भाग्य और अंतरात्मा के स्वर के मिले जुले असर से तय होती है। कार्य की सफलता में इन तीनों की बराबर की भूमिका होती है। सफलता के लिए अर्जुन की तरह बनना चाहिए, मात्र लक्ष्य की और दृष्टि।

सकारात्मक विचार रखें: जब हम कोई योजना बनाते हैं तो उसकी असफलता को लेकर विचार हमारे मन में आने लगते हैं। इस पर चाणक्य नीति कहती है कि सृष्टि का नियम है जिस तरह के विचार हम अस्तित्व को संप्रेषित करते हैं उसी प्रकार की ऊर्जा अस्तित्व द्वारा हम तक पहुंचती है। याद रहे विचारों का सकारात्मक होना अनिवार्य है। तभी हमारी राह सरल होगी।

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