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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की इन 3 बातों को याद रखेंगे तो आसानी से गुजर जाएगा संकट का समय

चाणक्य नीति: चाणक्य के अनुसार धन का संचय बेहद ही जरूरी है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने बुरे समय के लिए पैसा बचाकर रखना चाहिए

chanakya, chanakya niti, chanakya neeti, चाणक्य नीति, chanakya policy, chanakya shlokआचार्य चाणक्य कहते हैं कि मुसीबत के दिनों में लोगों को अपने आत्मविश्वास को प्रबल बनाए रखना चाहिए

Chanakya Niti In Hindi: जीवन में सुख के साथ कई बार दुख के दिन भी झेलने पड़ते हैं। इसलिए हर व्यक्ति खुशियों के साथ मुश्किल घड़ी के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। संकट के वक्त घबराने की बजाय धैर्य से काम लेने की आवश्यकता होती है। बुरा समय आने पर इंसान भयभीत हो जाता है। डर के कारण वह किसी भी काम को सही से नहीं कर पाता है। चाणक्य कहते हैं कि एक आत्मविश्वासी व्यक्ति ही बुरे हालातों को अच्छे से हैंडल कर सकता है। आज के इस कोरोना काल में हर व्यक्ति को मजबूत रहना चाहिए। चाणक्य नीति में इस बात का जिक्र मिलता है कि बुरे समय में धैर्य से काम लेना ही सबसे उत्तम माना गया है। संकट का सामना करते वक्त लोगों को आचार्य चाणक्य की ये बातें अवश्य याद रखनी चाहिए –

बनाएं रखें आत्मविश्वास: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मुसीबत के दिनों में लोगों को अपने आत्मविश्वास को प्रबल बनाए रखना चाहिए। वो मानते हैं कि संकट की घड़ी में आत्मविश्वास ही व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति होती है। कमजोर आत्मविश्वास के लोगों में भय उत्पन्न हो जाता है, जिससे मुश्किल की स्थिति से निकलने का मार्ग खोजना उनके लिए कठिन हो जाता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने ऊपर भरोसा रखें और संकट का समाधान ढूंढ़ने हेतु विचार विमर्श करें।

संकट में साथी धन: चाणक्य के अनुसार धन का संचय बेहद ही जरूरी है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने बुरे समय के लिए पैसा बचाकर रखना चाहिए। इससे आप हर संकट का सामना अच्छे से कर सकते हैं। बुरे समय में धन ही सबसे बड़ा मददगार बन सकता है। अगर धन नहीं होगा तो परेशानियां और भी अधिक बढ़ जाएंगी। देवी लक्ष्मी चंचल और रमणी हैं। एक स्थान पर टिक कर रहना उनके लिए मुश्किल है, ऐसे में लोगों को अपने पैसों की भी बचत करके रखनी चाहिए।

बनें धैर्यवान: संकट की घड़ी में लोगों को किस तरह पेश आना चाहिए, इस बात को लेकर चाणक्य ने लिखा है कि ऐसे समय में लोगों को धैर्य का परिचय देना चाहिए। उनका मानना है कि आवेश में आकर लिये गए निर्णय व कार्य गलत साबित हो सकते हैं। ऐसे में सोच-समझकर ही फैसला करना चाहिए। उनके अनुसार संकट की स्थिति में धैर्य रखते हुए गंभीरता से सभी पहलुओं की पड़ताल करके ही कोई कदम उठाना चाहिए।

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