चैत्र पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि मानी जाती है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है, विशेषकर पवित्र नदियों जैसे गंगा में स्नान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। वहीं लोग इस अवसर पर सत्यनारायण व्रत और कथा का आयोजन करते हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
साथ ही आपको बता दें कि यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, मन की शुद्धि और नए संकल्प लेने के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। आपको बता दें कि इस साल चैत्र पूर्णिमा तिथि पर रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। वहीं कई अन्य योग भी बन रहे हैं। आइए जानते हैं चैत्र पूर्णिमा की तिथि और दान- स्नान का शुभ मुहूर्त…
कब चैत्र पूर्णिमा? (Chaitra Purnima Kab hai)
फ्यूचर पंचांग के मुताबिक चैत्र पूर्णिमा की शुरुआत 01 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 06 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 02 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 41 मिनट पर होगा। पंचांग के आधार पर 02 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन चंद्रोदय शाम 07 बजकर 02 मिनट पर होगा।
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दान- स्नान का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 2 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए सुबह 04:38 से 05:24 तक रहेगा। साथ ही सत्यनारायण पूजा सुबह 06:11 से 09:18 बजे तक कर सकते हैं। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:50 तक रहेगा। इस बीच में दान- स्नान कर सकते हैं।
चैत्र पूर्णिमा मुहूर्त 2026 (Chaitra Purnima 2026 Muhurat)
- लाभ – उन्नति – 06:11 AM से 07:45 AM
- अमृत – सर्वोत्तम – 07:45 AM से 09:18 AM
- शुभ – उत्तम – 10:52 AM से 12:25 PM
- लाभ – उन्नति – 05:05 PM से 06:39 PM
- शुभ – उत्तम – 08:05 PM से 09:32 PM
चैत्र पूर्णिमा पूजा- विधि
चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु, भगवान शिव और चंद्रदेव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीपक जलाएं। फिर रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें। विशेष रूप से चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए रात में चंद्र उदय के समय दूध या जल से अर्घ्य दें और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें। वहीं अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरण करें और दिनभर सात्विक आचरण रखते हुए व्रत का पालन करें।
चैत्र पूर्णिमा पर करें ये उपाय
1- भगवान श्री विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें।
2- तुलसी के पौधे में जल चढ़ाकर दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
3- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।
4- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, गुड़, चावल या दान करें।
5- शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें और उसकी पूजा करें।
6- खीर बनाकर भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद रूप में वितरित करें।
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डिसक्लेमर- इस लेख को विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
