Chaitra Navratri Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का खास महत्व है। आपको बता दें कि हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जो इस बार 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इन नौ दिनों का बहुत खास महत्व होता है। इस दौरान दुर्गा मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी पर अपने भक्तों के बीच आती हैं और उनकी सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करती हैं। वहीं नवरात्रि के दिनों में कई भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं। साथ ही मां की विशेष पूजा- अर्चना भी करते हैं। वहीं पूजा- अर्चना के बाद व्रत कथा पाठ करना भी जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं इस व्रत कथा के बारे में…
नवरात्रि व्रत कथा (Navratri Vrat Katha In Hindi)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवगुरु बृहस्पति ने ब्रह्माजी से नवरात्रि व्रत का महत्व पूछा। ब्रह्माजी ने बताया कि यह व्रत करने से संतान सुख, धन, विद्या और समृद्धि प्राप्त होती है। इसके प्रभाव से रोग दूर होते हैं और पापों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत को न करने वाले व्यक्ति को जीवन में कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ता है। एक समय की बात है, मनोहर नगर में पीठत नाम का ब्राह्मण रहता था। उसकी बेटी सुमति माता दुर्गा की बड़ी भक्त थी। लेकिन एक दिन वह पूजा में नहीं पहुंच पाई, जिससे उसके पिता नाराज हो गए और गुस्से में उसका विवाह एक कुष्ठ रोगी से कर दिया। विवाह के बाद सुमति अपने पति के साथ जंगल में चली गई।
मां दुर्गा की कृपा से बदली सुमति की किस्मत
सुमति के दुख को देखकर मां दुर्गा उसके सामने प्रकट हुईं और वरदान मांगने को कहा। सुमति ने अपने पति के कुष्ठ रोग से मुक्ति की प्रार्थना की। देवी ने उसे बताया कि पिछले जन्म में उसने अनजाने में नवरात्रि का व्रत रखा था, जिसके पुण्य से आज उसे यह आशीर्वाद मिल रहा है। मां दुर्गा की कृपा से उसका पति ठीक हो गया और वे सुखी जीवन जीने लगे। मां दुर्गा ने सुमति को नवरात्रि व्रत की विधि भी बताई। इस व्रत में नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। यदि पूरे दिन व्रत रखना कठिन हो, तो एक समय भोजन किया जा सकता है। घटस्थापना कर, देवी के लिए फल, फूल और प्रसाद अर्पित करना चाहिए। व्रत के अंतिम दिन हवन और कन्या पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
ब्रह्माजी ने कहा कि जो व्यक्ति भक्तिभाव से यह व्रत करता है, उसे जीवन में सभी सुख-संपत्तियां मिलती हैं। इस व्रत का पुण्य करोड़ों गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही देवी मां के आशीर्वाद से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
