Kanya Pujan Samagri List: नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन कन्या पूजन करने का विधान है। मान्यता है कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि कन्या पूजन 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु की कन्याओं का करना उपयुक्त माना गया है। आइए जानते हैं कन्या पूजन में कौन- कौन सी सामग्री की जरूरत पड़ती है।
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कन्या पूजन के नियम
चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और यह आमतौर पर अष्टमी या नवमी तिथि को किया जाता है। इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर घर आमंत्रित किया जाता है। पूजन की शुरुआत उनके चरण धोकर की जाती है, फिर माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाया जाता है और उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाया जाता है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक हलवा, पूरी और काले चने का भोग कराया जाता है, जिसे नवरात्रि का पारंपरिक प्रसाद माना जाता है।
वहीं भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, उपहार, फल या वस्त्र देकर विदा किया जाता है, साथ ही एक छोटे बालक को भी भैरव स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है। इस पूरे पूजन में घर और मन की शुद्धता, श्रद्धा और सम्मान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
चैत्र नवरात्रि कन्या पूजन 2026 सामग्री (Kanya Pujan 2026 Samagri)
- कन्याओं के पैर धोने के लिए थाली, साफ जल और साफ कपड़ा या तौलियां
- महावर या अलता
- कुमकुम
- सिंदूर
- अक्षत
- बैठाने के लिए आसन, कपड़ा या चटाई
- पूजा थाली
- घी का दीपक
- एक गाय के गोबर का कंडा या उपले
- फूल
- फूलों का माला
- लाल चुनरी
- भोजन (खीर-पूड़ी या गुड़-चना)
- उपहार
- भेंट
- श्रंगार का सामान
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