Chaitra Navratri 09 Day, Maa Siddhidatri Vrat Katha In Hindi: आज नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा- अर्चना की जाती है। “सिद्धिदात्री” का अर्थ है – सिद्धियां (अलौकिक शक्तियां) देने वाली देवी। इन्हें सभी सिद्धियों की दात्री माना जाता है। वहीं अगर हम मां के स्वरूप की बात करें तो मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं और उनका वाहन सिंह भी माना जाता है। इनके चार हाथ होते हैं, जिनमें गदा, चक्र, शंख और कमल सुशोभित होते हैं। इनका स्वरूप अत्यंत शांत, दिव्य और करुणामयी होता है, जो भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। आइए जानते हैं मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा के बारे में…
मां सिद्धिदात्री व्रत कथा (Maa Siddhidatri Vrat Katha In Hindi)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का आधा शरीर मां सिद्धिदात्री से जुड़ा हुआ है। एक समय की बात है, जब ब्रह्मांड में केवल अंधकार था, तब माँ कुष्मांडा, जिनकी पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है। त्रिदेव यानी भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु की रचना की और उन्हें सृष्टि के निर्माण का कार्य सौंपा। ब्रह्मा जी को सृष्टि का कर्ता, विष्णु जी को पालनकर्ता और शिव जी को संहारक का कार्य सौंपा गया। एक बार भगवान शिव ने मां कुष्मांडा से प्रार्थना की और उनसे अपनी पूर्णता प्राप्त करने की विनती की। तब मां कुष्मांडा ने एक और देवी की रचना की, जिन्हें मां सिद्धिदात्री या सिद्धियों की प्रदाता कहा जाता है। मां सिद्धिदात्री ने भगवान शिव को अष्ट सिद्धि और 18 सिद्धियों का आशीर्वाद दिया। इन 18 सिद्धियों में न केवल अष्ट सिद्धि (आठ सिद्धियां) शामिल थीं, बल्कि 10 अन्य सिद्धियां भी थीं, जिन्हें भगवान कृष्ण ने माध्यमिक सिद्धियों के रूप में परिभाषित किया था। इसके बाद, भगवान ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड में जीवन के लिए एक पुरुष और एक महिला की आवश्यकता महसूस हुई। तब माँ सिद्धिदात्री ने स्वयं को भगवान शिव के आधे शरीर से जोड़ लिया। भगवान शिव का वह रूप, जिसमें वह आधे पुरुष और आधे स्त्री होते हैं, अर्धनारीश्वर कहलाता है। यही कारण है कि भगवान शिव का अर्द्ध रूप अर्धनारीश्वर, उनके और मां सिद्धिदात्री के संबंध का प्रतीक है।
मां सिद्धिदात्री की आरती (Maa siddhidatrI Aarti Lyrcis )
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!
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