Chaitra Navratri 2026 Full Guide: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। द्रिक पंचांग के अनुसार साल में कुछ 4 नवरात्रि आती हैं और हर नवरात्रि का अपना-अपना महत्व है। ऐसे ही चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होने वाली नवरात्रि को चैत्र नवरात्रि कहा जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से आरंभ हो रही है। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करने के साथ कलश स्थापना, अखंड ज्योति जलाते हैं। इसके साथ ही रात्रि में जागरण किया जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि पर काफी शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि की तिथि, कलश स्थापना का मुहूर्त, मां दुर्गा के नौ स्वरूप से लेकर हर एक जानकारी….

कब से कब तक चैत्र नवरात्रि 2026? (Chaitra Navratri 2026 Start And End Date)

द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 53 मिनट से आरंभ हो रही है। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाएगी, जो 27 मार्च को नवमी तिथि के साथ समाप्त होगी।

चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त  (Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana Muhurat)

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए कुछ ही शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। शुभ चौघड़िया- सुबह 6 बजकर 54 मिनट से लेकर 7 बजकर 57 मिनट तक। इसके बाद लाभ चौघड़िया दोपहर में 12 बजकर 29 मिनट से लेकर 1 बजकर 59 मिनट तक है। सभी शुभ मुहूर्त. योग जानने के लिए क्लिक करें- चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का मुहूर्त, योग

चैत्र नवरात्रि 2026 पूजा विधि   (Chaitra Navratri 2026 Puja Vidhi)

सबसे पहले घर के मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें फूलों की माला अर्पित करें। फिर हल्दी, सिंदूर, लाल फूल, बेलपत्र और पीले अक्षत चढ़ाएं। अब एक साफ बर्तन में शुद्ध मिट्टी भरकर उसमें जौ के बीज बो दें। इसके बाद विधि-विधान से कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर उसमें सिक्के और सुपारी डालें तथा ऊपर आम के पत्ते रखें। फिर कलश को मिट्टी या धातु की प्लेट से ढक दें और उस प्लेट पर जौ या धान रखें। अब एक सूखे नारियल पर लाल कपड़ा लपेटकर उसे कलश के ऊपर स्थापित करें। अंत में कलश के पास दीपक जलाएं और ध्यान रखें कि दीपक के नीचे थोड़े से पीले अक्षत अवश्य रखें। संपूर्ण पूजा विधि के लिए लिंक में क्लिक करें- चैत्र नवरात्रि पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि पर लगाएं ये भोग

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और प्रत्येक दिन उन्हें विशेष भोग अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि हर देवी को उनके प्रिय भोग अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को क्या-क्या भोग लगा सकते हैं- 9 दिन, 9 देवी और 9 भोग, जानिए किस दिन कौन-सा प्रसाद चढ़ाना होता है शुभ, यहां देखें संपूर्ण लिस्ट

चैत्र नवरात्रि पूजा सामग्री (Chaitra Navratri Puja Samagri List)

नवरात्रि के नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा करने के लिए कुछ आवश्यक पूजन सामग्रियों की जरूरत होती है, जैसे कलश, नारियल, फूल, माला, अक्षत (चावल), हल्दी, सिंदूर, फल और मिठाइयां आदि। मान्यता है कि इन सभी सामग्रियों के साथ श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से मां दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। ऐसे में यहां जानें नवरात्रि पूजा के लिए जरूरी सभी पूजन सामग्रियों की पूरी सूची-इन चीजों के बिना अधूरी है देवी दुर्गा की पूजा, जानिए मां की पूजा के लिए किन सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी

चैत्र नवरात्रि कथा  (Chaitra Navratri 2026 Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवगुरु बृहस्पति ने ब्रह्माजी से नवरात्रि व्रत का महत्व पूछा। तब ब्रह्माजी ने बताया कि इस व्रत को करने से संतान सुख, धन, विद्या और समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही इसके प्रभाव से रोग दूर होते हैं और व्यक्ति पापों से मुक्त होता है। जो लोग इस व्रत का पालन नहीं करते, उन्हें जीवन में कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

एक समय मनोहर नगर में पीठत नाम का एक ब्राह्मण रहता था, जिसकी पुत्री सुमति मां दुर्गा की अत्यंत भक्त थी। एक दिन किसी कारणवश वह पूजा में शामिल नहीं हो सकी, जिससे उसके पिता क्रोधित हो गए और उन्होंने उसका विवाह एक कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति से कर दिया। विवाह के बाद सुमति अपने पति के साथ जंगल में रहने लगी।

सुमति के दुख को देखकर मां दुर्गा उसके सामने प्रकट हुईं और उसे वरदान मांगने को कहा। सुमति ने अपने पति के रोगमुक्त होने की प्रार्थना की। तब देवी ने बताया कि पिछले जन्म में उसने अनजाने में नवरात्रि व्रत किया था, उसी के पुण्य के कारण उसे यह अवसर मिला है। मां दुर्गा की कृपा से उसका पति स्वस्थ हो गया और दोनों सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगे।

इसके साथ ही देवी ने सुमति को नवरात्रि व्रत की विधि भी बताई। उन्होंने कहा कि नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। यदि पूरा दिन उपवास करना संभव न हो, तो एक समय भोजन किया जा सकता है। घटस्थापना कर देवी को फल, फूल और प्रसाद अर्पित करना चाहिए। व्रत के अंतिम दिन हवन और कन्या पूजन करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

अंत में ब्रह्माजी ने बताया कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ यह व्रत करता है, उसे जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवी मां के आशीर्वाद से जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

नवरात्रि में किन-किन देवी की पूजा करें

मां दुर्गा के 9 स्वरूप की पूजा की जाती है। इनके नाम शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, और सिद्धिदात्री है।

chaitranavratri 2026, chaitra navratri puja vidhi, navratri day 7, maa Kalratri vrat katha, devi maa Kalratri vrat katha in hindi, maa Kalratri puja timings, maa Kalratri aarti lyrics, maa Kalratri vrat kahani, maa Kalratri vrat samagri, maa Kalratri vrat katha, navratri 2026 day 7
Navratri Day 7, Maa Kalratri Vrat Katha: मां कालरात्रि व्रत कथा

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा

चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के 7वें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा करने का विधान है।मां कालरात्रि की विधिवत पूजा करने से रोग, दोष और भय से मुक्ति मिल सकती है। मां दुर्गा का ये रूप सबसे उग्र और विनाशकारी माना जाता है। जो अंधकार, भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। आइए जानते हैं मां कालरात्रि की कथा और आरती

chaitra navratri 2026, chaitra navratri 2026 kanya pujan, kanya pujan date 2026,kanya Pujan kab hai 2026, Kanya Pujan Vidhi, Kanya Pujan Importance,chaitra navratri ashtami 2026 kab hai, durga ashtami kab hai, chaitra navratri ashtmi kab, ram navami 2026 kanya pujan, kab hai ram navami 2026, chaitra navratri, ashtami navratri, navratri ashtami 2026 kanya pujan, navratri ashtami ke upay, दुर्गा अष्टमी 2026, maha ashtami 2026, दुर्गा अष्टमी कन्या पूजन, मां महागौरी अष्टमी पूजा,
Kanya Pujan Date 2026: कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त, सामग्री, पूजा विधि और मंत्र (Image Source- Chatgpt)

Kanya Pujan Date 2026: दुर्गा अष्टमी और रामनवमी, किस दिन करें कन्या पूजन, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, सामग्री, पूजा विधि और मंत्र

Kanya Pujan Date 2026 (चैत्र नवरात्रि कन्या पूजन कब है): चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करने के साथ कन्या पूजन करना लाभकारी माना जाता है। इससे मां भगवती अति प्रसन्न होती हैं। जानें कन्या पूजन का मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और सामग्री

devi maa Skandmata vrat katha in hindi, maa Skandmata vrat katha
Navratri Day 5, Maa Skandmata Vrat Katha: देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप में स्कंदमाता की पूजा की जाती है-IMAGE SOURCE- CHAT GPT

नवरात्रि के पांचवें दिन करें मां स्कंदमाता की पूजा

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो कि आज है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर संतान प्राप्ति के योग बनते हैं और संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं। मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें मातृत्व, करुणा और पालन-पोषण का प्रतीक माना जाता है। मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मंत्र, कथा और आरती जानने के लिए क्लिक करें

Chaitra navratri 2026, Chaitra navratri 2026 date, navratri Day 4, Maa Kushmanda vrat katha, Chaitra navratri 2026, devi Maa Kushmanda vrat katha in hindi,Maa Kushmanda puja timings, Maa Kushmanda aarti lyrics, Maa Kushmanda vrat kahani, Maa Kushmanda vrat samagri,Maa Kushmanda vrat katha,navratri 2026 Day 4, Kushmanda vrat katha kya hai, maa Kushmanda kon hai, मां कूष्मांडा व्रत कथा, चैत्र नवरात्रि
Navratri Day 4, Maa Kushmanda Vrat Katha: मां कूष्मांडा की कथा

नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा

नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की विधिवत पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से आयु, यम, बल और आरोग्य की प्राप्ति हो सकती है। जीवन से नकारात्मकता हट जाती हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां कूष्माडा की पूजा विधि, कथा, आरती

chaitra navratri 2026, navratri day 2, maa brahmacharini vrat katha, devi maa brahmacharini vrat katha in hindi, maa brahmacharini puja timings, maa brahmacharini aarti lyrics, maa brahmacharini vrat kahani, maa brahmacharini vrat samagri, maa brahmacharini vrat katha, navratri 2025 day 2, chaitra navratri vrat katha, vrat katha in hindi, maa brahmacharini aarti, brahmacharini aarti lyrics
Chaitra Navratri Day 2, Maa Brahmacharini Vrat Katha: चैत्र नवरत्रि के दूसरे दिन पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी की कथा

नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से जीवन में धैर्य, साहस और तप की शक्ति का संचार होता है। इसके साथ ही आलस्य, क्रोध, स्वार्थ और ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाएं दूर होती हैं। ऐसे में साधक को लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की कथा, मंत्र और पूजा विधि

मां ब्रह्मचारिणी की आरती

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्नचारिणी की विधिवत पूजा करने के साथ सुबह और शाम के समय मां दुर्गा की विधिवत पूजा के आरती अवश्य करनी चाहिए। इससे आपकी मनोकामना पूर्ण हो सकती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की संपूर्ण आरती…जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता, जय चतुरानन प्रिय सुख दाता, चैत्र नवरात्रि का दूसरे दिन करें मां ब्रह्नचारिणी की ये आरती

chaitra navratri 2026, chaitra navratri day 2026, chaitra navratri 2026 kab hai, navratri day 1, maa shailputri vrat katha, chaitra navratri 2026 kalash sthapana, devi maa shailputri vrat katha in hindi,maa shailputri puja timings, maa shailputri aarti lyrics, maa shailputri vrat kahani, maa shailputri vrat samagri,maa shailputri vrat katha,navratri 2026 day 1, मां शैलपुत्री व्रत कथा, नवरात्रि व्रत कथा, Navratri vrat katah, navratri vrat katha in hindi, chanitra navratri vrat katha
Chaitra Navratri Day 1, Maa Shailputri Vrat Katha: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन पढ़ें मां शैलपुत्री की कथा

मां शैलपुत्री की पूजा विधि, कथा (Maa Shailputri Puja Vidhi And Katha)

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती हैं, जो हिमालय राज की पुत्री मानी जाती है। मां शैलपुत्री को मां पार्वती के नाम से भी जाना जाता है और उनका विवाह पुनः भगवान शिव से ही हुआ। उनका निवास काशी नगरी वाराणसी में माना जाता है। जहां पर उनका एक प्राचीन मंदिर स्थित है। मान्यता है कि वहां दर्शन करने मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। मां शैलपुत्री की पूजा विधि और कथा के लिए लिंक में क्लिक करें- मां शैलपुत्री पूजा विधि सहित अन्य जानकारी

मां शैलपुत्री की आरती (Maa Shailputri Aarti Lyrcis)

नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करने का विधान है। मां शैलपुत्री को हिमालयराज की पुत्री माना जाता है और इन्हें मां सती का स्वरूप माना जाता है। इस दिन विधिपूर्वक मां शैलपुत्री की आराधना करने और व्रत रखने से जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने के बाद अंत में आरती करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की संपूर्ण आरती-शैलपुत्री मां बैल सवार, करें देवता जय जयकार…चैत्र नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की ये आरती

चैत्र नवरात्रि में क्या खा सकते हैं और क्या नहीं? (Chaitra Navratri 2026 Vrat Niyam)

धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों देवी की उपासना करने से जीवन से नकारात्मकता, भय और कष्ट दूर होते हैं। साथ ही, मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है। व्रत के दौरान व्रती को खान-पान से जुड़ी कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं और क्या नहीं। पूरी खबर के लिए लिंक में क्लिक करें- चैत्र नवरात्रि व्रत के ये नियम जानना है जरूरी, जानें व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, व्रती जरूर पढ़ें

Chaitra Navratri 2026, kab se shuru Chaitra Navratri 2026, Chaitra Navratri 2026 shubh muhurat,Chaitra navaratri 2025, Chaitra navaratri 2026 akhand deepak, Chaitra navaratri 2026 akhand deepak significance, Chaitra navaratri 2026 akhand deepak niyam, Best direction of akhand jyoti, akhand jyoti niyam, chaitra Navratri 2026 Akhand Jyoti Sthapana Vidhi Niyam Mantra Akhand Jyoti Kaise Jalaye, Shardiya Navratri Akhand Jyoti, Akhand Jyoti rules, Akhand Jyoti ke niyam, Akhand Jyoti ka mantra, How to light Akhand Jyoti, Akhand Jyoti mantra, Akhand Jyoti Kaise Jalaye, Akhand Jyoti kab Jalaye, शारदीय नवरात्रि अखंड ज्योति, शारदीय नवरात्रि 2026, अखंड ज्योति, अखंड ज्योति के नियम, 19 मार्च को इस तरह करें अखंड ज्योति की स्थापना, अखं
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाने के नियम और दिशा

अखंड ज्योति जलाने के नियम (Chaitra Navratri 2026 Akhand Jyoti Niyam)

न नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इस दौरान साधक कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति भी जलाते हैं, जो नवरात्रि से आरंभ होकर समापन तक जलती रहती है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और अकाल मृत्यु से बचाव हो सकता है। देवीभागवत पुराण और वास्तु शास्त्र में अखंड ज्योति के बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं अखंड ज्योति किस दिशा में जलाने से क्या लाभ मिलता हैं और नियमों के बारे में…चैत्र नवरात्रि पर घटस्थापना करने के साथ इस दिशा में जलाएं अखंड ज्योति, मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए अपनाएं ये नियम

दुर्गा सप्तशती पाठ करने के नियम (Durga Saptashati Path Rules)

नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है, लेकिन इसे सही विधि और नियमों के साथ करना बहुत आवश्यक है। मान्यता है कि विधि पूर्वक किया गया यह पाठ जीवन की बाधाओं को दूर करता है और सुख-समृद्धि के साथ मानसिक शांति प्रदान करता है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें, इसके प्रमुख नियम क्या हैं और इसका धार्मिक महत्व क्या है- चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ कैसे करें, सही विधि क्या है, जानें नियम और इसका महत्व

चैत्र नवरात्रि पर कन्या पूजन कब किया जाता है? (Chaitra Navratri 2026 Kanya Pujan Date)

पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के दौरान अष्टमी या फिर नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन करना सबसे अधिक शुभ माना जाता है।

chaitra navratri 2026, chaitra navratri 2026 aarti, chaitra navratri aarti in pdf, maa durga aarti, maa durga aarti in pdf, Durga Ji Ki Aarti,Maa Durga Ki Aarti,Navratri,Jai Ambe Gauri,Navratri Aarti,Jay Ambe Gauri Lyrics,Jai Ambe Gauri Lyrics Aarti,Maa Durga Ki Aarti Bhajan,Maa Durga Ki Aarti Video,Maa Durga Ki Aarti Lyrics,Jai Ambe Gauri Lyrics,Chaitra Navratri, Maa Durga Aarti, Mata Aarti, Navratri Aarti, Maa Sherawali Aarti, Durga Puja Aarti, Maa Durga Aarti, Jagran Aarti, Mata Ki Chauki Aarti, Shukravar Aarti, Friday Aarti, Gupt Navratri Aarti, Kaali Aarti, Maa Kali Aarti, आरती, मां दुर्गा की आरती, मां दुर्गा आरती लिरिक्स
Durga Ji Ki Aarti Lyrics: चैत्र नवरात्रि के दौरान पढ़ें मां दुर्गा की ये आरती (Image Source – Chatgpt)

नवरात्रि में करें मां दुर्गा की ये आरती ( Maa Durga Aarti)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए जानते हैं मां दुर्गा की संपूर्ण आरती- मां दुर्गा जी की आरती, जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी… यहां पढ़ें पूरी आरती

नवरात्रि में कौन सा मंत्र जपना चाहिए? (Chaitra Navratri 2026 Mantra)

मूल मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
स्तुति मंत्र: सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते
शक्ति मंत्र: ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते

चैत्र नवरात्रि के व्रत का पारण कब? (Chaitra Navratri 2026 Paran Time)

पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के व्रत का पारण नवमी या फिर दशमी तिथि को किया जाता है। इस दिन दुर्गा पूजा के साथ हवन, कन्या पूजन और प्रसाद का वितरण किया जाता है।

मां दुर्गा को न चढ़ाएं ये चीजें

चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा करते समय विशेष पूजन सामग्री का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है। शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जिन्हें माता को अर्पित करना वर्जित माना गया है। इसलिए पूजा करते समय सही सामग्री का चयन करना और निषिद्ध चीजों से परहेज करना जरूरी है, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके- चैत्र नवरात्रि में माता रानी को अर्पित करने से बचें ये 5 चीजें, वरना नाराज हो सकती हैं मां दुर्गा

श्री दुर्गा चालीसा (Shree Durga Chalisa Lyrics in Hindi)

॥ दोहा ॥
शान्तकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
॥ चौपाई ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहुं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटी विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरस करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णे हुई जग पाला। तुम ही आदि सुंदरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिव शंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हारे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरा रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़ कर खम्बा॥
रक्षा कर प्रह्लाद बचाए। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठाये॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिंधु में करत विलासा। दयासिंधु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहे अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुं लोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। मोह मदादिक सब बिनशावें॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला॥
जब लगि जियौं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परम पद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ दोहा ॥
शरणागत रक्षा करि, भरी हे जगदम्ब।
प्रसीद प्रसीद अम्बिका, नमो न

चैत्र नवरात्रि के साथ हिंदू नववर्ष का भी आरंभ हो रहा है। विक्रम संवत 2083 के राजा गुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। ऐसे में 12 राशियों के साथ-साथ देश-दुनिया पर काफी अधिक असर देखने को मिलने वाला है। आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष का 12 राशियों पर क्या असर देखने को मिलने वाला है। जानें हिंदू नववर्ष भविष्यफल

मेष वार्षिक राशिफल 2026वृषभ वार्षिक राशिफल 2026
मिथुन वार्षिक राशिफल 2026कर्क वार्षिक राशिफल 2026
सिंह वार्षिक राशिफल 2026कन्या वार्षिक राशिफल 2026
तुला वार्षिक राशिफलवृश्चिक वार्षिक राशिफल 2026
धनु वार्षिक राशिफल 2026मकर वार्षिक राशिफल 2026
कुंभ वार्षिक राशिफल 2026मीन वार्षिक राशिफल 2026

डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।