Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Time Kalash Sthapana Muhurat Puja Vidhi Mantra Samagri And Aarti Maa Shailputri: द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ चैत्र नवरात्रि आरंभ हो रही है, जो नवमी तिथि को रामनवमी के साथ समाप्त होगी। चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ कलश स्थापना करने का विधान है। इस साल चैत्र नवरात्रि पर अमावस्या का संयोग रहने वाला है। बता दें कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि का शुभ मुहूर्त, कलश स्थापना विधि, मां शैलपुत्री पूजा विधि, षोडशोपचार पूजन विधि, मंत्र, आरती सहित अन्य जानकारी…
इस साल चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा और अमावस्या का मेल होने के साथ शुक्ल योग, ब्रह्म योग व सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। इसके अलावा शुक्रादित्य, त्रिग्रही, नवपंचम राजयोग के साथ कई खास योगों का निर्माम हो रहा है।
चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Muhurat)
शुभ चौघड़िया- सुबह 6 बजकर 54 मिनट से लेकर 7 बजकर 57 मिनट तक
लाभ चौघड़िया- दोपहर में 12 बजकर 29 मिनट से लेकर 1 बजकर 59 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 53 मिनट तक
चैत्र नवरात्रि पूजन सामग्री की लिस्ट ( Chaitra Navratri 2026 Kalash Sthapana Puja Samagri List)
थोड़ी शुद्ध मिट्टी, बौने के लिए बिना धोएं हुए जौ, मिट्टी, पीतल या फिर तांबे का कलश, आम या अशोक के पांच पत्ते एक-दूसरे से जुड़े हुए, कलश के ऊपर रखने के लिए कटोरी, कटोरी को भरने के लिए अनाज, एक नारियल, एक लाल कपड़ा य़ा चुनरी, कलावा, सिंदूर, चूना-हल्दी से बना हुआ तिलक, अक्षत, जल, गंगाजल, 1 सिक्का, 1 सुपारी, माता दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति, लाल रंग का, कपड़ा बिछाने के लिए, लकड़ी की चौकी, फूल, माला, सिंदूर, अक्षत, मिठाई, सोहल श्रृंगार, कमलगट्टा, पंचमेवा, पान, सुपारी, लौंग, बताशा, दीपक, धूप, घी, अगरबत्ती, पैसे, थोड़ी छोटी इलायची, एक लोटे में जल, फल, जायफल, जावित्री, नारियल, नैवेद्य, भोग के लिए फल, मेवे आदि।
चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना विधि (Chaitra Navratri 2026 Ghatasthapana Puja Vidhi)
- चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना किया जाता है। इस दिन आप स्वयं से या फिर पंडित बुलाकर घटस्थापना कर सकते हैं। अगर आप स्वयं कर रहे हैं, तो इस सरल विधि से कर सकते हैं।
- सबसे पहले एक साफ लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर उस पर मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद प्रथम पूज्य भगवान गणेश का ध्यान करके पूजा की शुरुआत करें।
- अब कलश स्थापना के लिए शुद्ध मिट्टी में जौ मिलाकर चौकी के पास रखें। फिर मिट्टी या पीतल के कलश के मुख पर कलावा बांधें और उस पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। इसके बाद कलश में जल और गंगाजल भरें और उसमें 2 लौंग, एक हल्दी की गांठ, एक सुपारी, थोड़ी दूर्वा और एक सिक्का डालें। फिर आम या अशोक के पत्ते लगाकर कलश को ढक्कन से बंद करें और ऊपर चावल या गेहूं रखें।
- यदि आप कलश पर नारियल स्थापित कर रहे हैं, तो उस पर स्वास्तिक बनाकर लाल कपड़ा लपेटें और कलावा से बांधकर कलश के ऊपर रखें।
- इसके बाद विधिपूर्वक कलश और मां दुर्गा की पूजा करें और व्रत का संकल्प लें। मां दुर्गा और मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए सफेद फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत और सोलह श्रृंगार अर्पित करें। फिर फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- अंत में घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा, शैलपुत्री के मंत्र, स्तोत्र, कवच आदि का पाठ कर लें और अंत में आरती करके भूलचूक के लिए माफी मांग लें।

चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का षोडशोपचार पूजन (Chitra Navratri Ghatasthapana Shodashopachara Puja)
कलश के नीचे जौ और सप्तधान बिछाने का मंत्र
इस मंत्र को बोलते हुए सप्तधान और जौ को कलश की नीचे मिट्टी पर फैला दें।
ऊं धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणाय त्यो दानाय त्वा व्यानाय त्वा। दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणिः प्रति गृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि।।
कलश में जल भरने का मंत्र
कलश में जल भरते समय इस मंत्र को बोलें- ओम वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्काभसर्जनी स्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमा सीद।।
कलश की पूजा करते समय
इसके बाद कलश पर एक फूल चढ़ा दें और बोले ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्विन्दव:। पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशतादयिः।।
कलश में चंदन लगाते समय बोलें ये मंत्र
चंदन लगाते समय इस मंत्र को बोलें और फिर इस फूल को जल में अर्पित कर दें। ओम त्वां गन्धर्वा अखनस्त्वामिन्द्रस्त्वां बृहस्पतिः। त्वामोषधे सोमो राजा विद्वान् यक्ष्मादमुच्यत।।
कलश में सर्वौषधि डालने का मंत्र
कलश में सर्वोषधि डालने का मंत्र – ओम या ओषधी: पूर्वाजातादेवेभ्यस्त्रियुगंपुरा। मनै नु बभ्रूणामह ग्वंग शतं धामानि सप्त च।।
कलश पर पंच पल्लव रखने का मंत्र
आम पल्लव रखते हुए यह मंत्र बोले। ओम अश्वस्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता।। गोभाज इत्किलासथ यत्सनवथ पूरुषम्।।
कलश में सप्तमृत्तिका डालने का मंत्र
अब इसके बाद कलश में सात प्रकार की मिट्टी जिसे सप्तमृतिका कहते हैं डालें। ओम स्योना पृथिवि नो भवानृक्षरा निवेशनी। यच्छा नः शर्म सप्रथाः।
कलश में सुपारी छोड़ने का मंत्र
अब आप कलश में एक सुपारी और पान छोड़ें और यह मंत्र बोलें। ओम याः फलिनीर्या अफला अपुष्पायाश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व ग्वंग हसः।।
कलश में अब एक सिक्का रखें
कलश में अब आपको एक सिक्का डालें, जो एक रूपए, पांच या कोई अन्य सिक्का हो। इसके साथ ही ये मंत्र बोले- ओम हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम।।
कलश को वस्त्र अर्पित करने का मंत्र
इस मंत्र को बोलते हुए आप एक लाल अथवा पीला कपड़ा कलश के मुंह के पास यानी गर्दन पर लपेट दें। ओम सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमाऽसदत्स्वः । वासो अग्ने विश्वरूप ग्वंग सं व्ययस्व विभावसो।।
कलश के ऊपर चावल रखते समय बोलें ये मंत्र
ऊं पूर्णा दर्वि परा पत सुपूर्णा पुनरा पत। वस्नेव विक्रीणावहा इषमूर्ज ग्वंग शतक्रतो।। इस मंत्र को बोलते हुए कलश के ऊपर चावल से भरा पात्र रख दें। फिर नारियल रखें।
कलश पर नारियल स्थपित करने का मंत्र
नारियल में स्वास्तिक लगाने के साथ लाल रंग के कपड़े या टून को कलावा से बांधते समय बोले ये मंत्र ओम याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः। बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्व हसः।।
कलश में वरुण सहित सभी देवी देवताओं, तीर्थों का आह्वान
ओम तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुश ग्वंग स मा न आयुः प्र मोषीः। अस्मिन् कलशे वरुणं साङ्गं सपरिवारं सायुधं सशक्तिकमावाहयामि। ओम भूर्भुवः स्वः भो वरुण, इहागच्छ, इह तिष्ठ, स्थापयामि, पूजयामि, मम पूजां गृहाण। ‘ओम अपां पतये वरुणाय नमः।
अब कलश को भगवान गणेश मानकर पंचोपचार सहित पूजा करें। इसके बाद कलश में सिक्का सहित अन्य चीजें डाल दें।

मां शैलपुत्री पूजा विधि (Maa Shailputri Puja Vidhi)
शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन कलश स्थापित कर विधिपूर्वक व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा करते हुए उन्हें सफेद फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम और अक्षत अर्पित किए जाते हैं, साथ ही सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान घी का दीपक और धूप जलाकर मां शैलपुत्री के मंत्र, स्तोत्र और कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है। अंत में विधि-विधान से आरती कर अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना की जाती है।
मां दुर्गा के मंत्र( Mantras of maa Durga)
1- ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
2- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
3- या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
4-या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
5- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

मां शैलपुत्री की आरती लिरिक्स (Maa Shailputri Aarti Lyrics)
शैलपुत्री मां बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
