Chaitra Navratri 2026 Akhand Jyoti Niyam: द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि आरंभ होती है, जो दशमी तिथि को पारण के साथ समाप्त होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रहेगी। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इस दौरान साधक कलश स्थापना के साथ अखंड ज्योति भी जलाते हैं, जो नवरात्रि से आरंभ होकर समापन तक जलती रहती है। ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और अकाल मृत्यु से बचाव हो सकता है। देवीभागवत पुराण और वास्तु शास्त्र में अखंड ज्योति के बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं अखंड ज्योति किस दिशा में जलाने से क्या लाभ मिलता हैं और नियमों के बारे में…
देवीभगवत पुराण के अनुसार, प्रथ्वीलोक में जितने भी प्रकार के व्रत या फिर दान है। वे इस नवरात्रि व्रत के तुल्य नहीं हैं, क्योंकि इस व्रत को रखने से धन-धान्य की बढ़ोतरी के साथ सुख, संतान की वृद्धि करने वाला, आयु और आरोग्य प्रदान करने वाला और स्वर्ग और मोक्ष दिलाने वाला व्रत माना जाता है।
नवरात्रि के नौ दिन व्रत न रख पाने में करें ये काम
उपवासैः क्षमाश्रितैः नवरात्रेते पुनः पुनः।
उपोषयत्रयं प्राक्तो यथोक्तफलदृश्च नृप।।१२।।
सप्तमाङ्ग च तथा दशमाङ्गं नवयां भक्तिभावात्।
त्रिरात्रकृतार्थसर्वं फलं भवति पूजनेन।।१३।।
देवीभगवतपुराण के तीसरे स्कंध के सप्तविंशाध्याय में नवरात्रि के बारे में बताया गया है। अगर कोई जातक पूरे नवरात्रि में व्रत नहीं रख सकता हैं, तो वह तीन उपवास रखकर भी पूरा फल पा सकता है। भक्तिभाव के केवल सप्तमी, अष्टमी और नवमी इन तीन रात्रियों में देवी की पूजा करने से सभी फलों की प्राप्ति हो सकती है।
क्या है अखंड ज्योति?
अखंड ज्योति वह दीपक होता है, जो तेल या फिर घी से लगाया जाता है। ये दीपक नवरात्रि के अलावा व्रत या किसी मांगलिक अवसर पर लगातार जलाया जाता है। इसे ‘अखंड’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह निरंतर, अविरल रूप से जलती रहती है। नवरात्रि के दौरान ये पूरे 9 दिन निरंतर जलती रहती हैं। ये चैत्र नवरात्रि के आरंभ से अंत तक बुझाए बिना जलाया जाता है। इसे जलाने से घर में सुख-शांति, समृद्धि के साथ स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
अखंड ज्योति जलाने की दिशा और लाभ
पूर्व दिशा – वास्तु शास्त्र इस दिशा में ज्योति जलाने से मां दुर्गा अति प्रसन्न होती हैं। घर में सुख-शांति और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
पश्चिम दिशा – चैत्र नवरात्रि के दौरान इस दिशा में अखंड ज्योति रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे समृद्धि और संपन्नता मिलती है।
उत्तर दिशा – वास्तु शास्त्र में इस दिशा को काफी शुभ माना जाता है, क्योंकि ये दिशा कुबेर भगवान की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में अखंड ज्योति जलाने से सुख-समृद्धि आती है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) – सबसे अधिक शुभ दिशा मानी जाती है। इस ओर ज्योति जलाने से घर में खुशहाली और समृद्धि आती है।
दक्षिण दिशा – इस दिशा की ओर कभी भी अखंड ज्योति नहीं जलानी चाहिए, क्योंकि इसे यमराज की दिशा माना जाता है। इस दिशा में ज्योति जलाने से धन हानि, बीमारी और मृत्यु का योग बन सकता है।
| दिशा | लाभ / फल | सबसे सही |
| पूर्व (ईशान) | देवी-देवता प्रसन्न, घर में सुख-शांति, धन-वैभव | शुभ दिशा, पूजा के लिए उत्तम |
| पश्चिम | मां लक्ष्मी प्रसन्न, समृद्धि और संपन्नता | आर्थिक लाभ के लिए लाभकारी |
| दक्षिण | धन हानि, बीमारी, मृत्यु के योग | यह दिशा अशुभ मानी जाती है, जलाने से बचें |
| उत्तर | कुबेर भगवान की कृपा, सुख-समृद्धि, अकाल मृत्यु से सुरक्षा | शुभ दिशा, धन-संपत्ति की वृद्धि होती है |
| दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) | सबसे अधिक शुभ, घर में खुशहाली और समृद्धि | सर्वोत्तम दिशा, वास्तु अनुसार सबसे लाभकारी |
अखंड ज्योति के नियम
- अगर आप चैत्र नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति जलाने वाले हैं, तो प्रतिपदा से लवेकर दशमी तक अवश्य जलाएं।
- कभी भी अखंड ज्योति को बुझाने के लिए हवा या फूंक का उपयोग नहीं करना चाहिए। उसे स्वयं बंद होने देना चाहिए।
- अखंड ज्योति जलाते समय बाती ऐसी रखें कि वो पूरे नौ दिनों तक जलें। अगर आप बीच में बाती बदलना चाहते हैं, तो उसी ज्योति से पुन: जलाएं।
- ज्योति को जौ, चावल या गेहूं के ऊपर रखना चाहिए।
- ज्योत जलाते समय मंत्र का जाप करें।
- ज्योत का अचानक शांत होना अशुभ माना जाता है, इसलिए समय-समय पर घी डालते रहें।
- वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) या पूर्व दिशा में स्थापित करना सबसे शुभ होता है।
चैत्र नवरात्रि पर अखंड ज्योति जलाते समय बोलें ये मंत्र
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति जनार्दन:
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते।।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
साल 2026 में कब से कब तक है चैत्र नवरात्रि?
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से आरंभ होकर 27 मार्च को नवमी तिथि के साथ समाप्त होगी।
नवरात्रि के दौरान किन देवियों की होती है पूजा?
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
अखंड ज्योति क्या है?
अखंड ज्योति एक ऐसा दीपक होता है जो पूरे नवरात्रि बिना बुझे जलाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि में कौन से रंग पहनना शुभ होता है?
चैत्र नवरात्रि के हर एक दिन के लिए विशेष रंग निर्धारित होते हैं, जैसे पहला दिन सफेद, दूसरा लाल, तीसरा पीला चौथा हरा, पांचवां नारंगी या केसरिया, छठा नीला, सातवां गुलाबी, आठवां मकरंद और नौवां बैंगनी या भूरा पहनना चाहिए। ये रंग शुभता और ऊर्जा का प्रतीक होते हैं।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
