chaitra navratri 2026 9th day maa siddhidatri puja vidhi timings mantra aarti: चैत्र नवरात्रि का नौवां दिन महानवमी के रूप में मनाया जाता है और इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। मां सिद्धिदात्री को सभी सिद्धियों की दाता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी कृपा से भक्तों को ज्ञान, सफलता और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। नवरात्रि का यह अंतिम दिन साधना की पूर्णता और देवी कृपा का प्रतीक माना जाता है। वहीं इस दिन कन्या पूजन करने का विधान है। इसे कंजक पूजन के नाम से भी जाना जाता है। इस पूजन में 2 से 10 साल तक की कन्याओं को घर पर बुलाकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें श्रद्धा भाव के साथ भोजन कराया जाता है।

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मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

मां सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान होती हैं। इनके चार हाथ हैं, जिनमें गदा, चक्र, शंख और कमल सुशोभित रहते हैं। देवी का वाहन सिंह माना गया है, हालांकि वे कमल पर भी विराजती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और दिव्य है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां सिद्धिदात्री ने ही भगवान शिव को अष्ट सिद्धियां प्रदान की थीं, जिसके बाद शिव का आधा शरीर देवी स्वरूप हो गया और वे अर्धनारीश्वर कहलाए।

मां सिद्धिदात्री भोग (Navratri 9th Day Bhog)

नवमी तिथि को कांसे के पात्र में नारियल पानी और तांबे के पात्र में शहद डालकर देवी मां को चढ़ाना चाहिए। मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूड़ी, चना का भोग अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसके अलावा नारियल, खीर और फल भी अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से भोग लगाने पर देवी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं।

मां सिद्धिदात्री की पूजा से इन सिद्धियों की हो सकती है प्राप्ति

शास्त्रों के मुताबिक मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को ये सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं। सिद्धियों के नाम अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व हैं।

मां सिद्धिदात्री के मंत्र

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां सिद्धदात्री स्तोत्र पाठ

कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥

पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥

परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥

विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥

भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥

धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी।मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक  तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!

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