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Chaitra Navratri 2019 Puja Vidhi, Samagri: 9 दिनों तक चलता है यह पर्व, जानें कलश स्‍थापना का तरीका

Chaitra Navratri 2019 Puja Vidhi, Time, Samagri, Mantra, Procedure:धर्म शास्त्र के जानकारों का कहना है कि इस चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी।

Author Updated: Apr 06, 2019 11:08:45 am
Chaitra Navratri 2019 Puja Vidhi

Chaitra Navratri 2019 Puja Vidhi, Samagri, Mantra, Procedure : चैत्र नवरात्रि इस बार यानि साल 2019 में 6 अप्रैल (शनिवार) से शुरू हो रहा है। जिसका समापन 14 अप्रैल (रविवार) को होगा। धर्म शास्त्र के जानकारों का कहना है कि इस चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी। देवी दुर्गा के आगमन के विषय में शास्त्रों में कहा गया है कि ‘शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता’। यानि सोमवार या रविवार को कलश स्थापन का दिन पड़ता है तो देवी दुर्गा हाथी पर सवार होकर आतीं हैं। साथ ही जब नवरात्रि की शुरुआत शनिवार या मंगलवार से होता है तो देवी घोड़े पर सवार होकर आतीं हैं। वहीं जब गुरुवार या शुक्रवार से नवरात्रि आरंभ हो तो माता डोली पर सवार होकर आतीं हैं। इसके अलावा जब नवरात्रि बुधवार के दिन से आरंभ होता है तो देवी दुर्गा नाव पर सवार होकर आतीं हैं।

मुहूर्त: प्रतिप्रदा आरंभ- 5 अप्रैल, 14:20 बजे, प्रतिप्रदा समाप्त- 6 अप्रैल, 3 बजे बजे। आपको बता दें कि इस चैत्र नवरात्रि घट स्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त केवल चार घंटे दस मिनट तक ही है। इसलिए कलश स्थापना मुहूर्त सुबह छह बजकर नौ मिनट से लेकर 10 बजकर 21 मिनट तक के बीच कलश स्थापना करना शुभ रहेगा।

विधि: अगर आप अपने घर में घटस्थापना करना चाहते हैं, तो सुबह के समय ही करें। कलश स्थापना के लिए चावल, सुपारी, रोली, मौली, जौ, सुगन्धित पुष्प, केसर, सिन्दूर, लौंग, इलायची, पान, सिंगार सामग्री, दूध, दही, गंगाजल, शहद, शक्कर, शुद्घ घी, वस्त्र, आभूषण, बिल्ब पत्र, यज्ञोपवीत, मिट्टी का कलश, मिट्टी का पात्र, दूर्वा, इत्र, चन्दन, चौकी, लाल वस्त्र, धूप, दीप, फूल, नैवेध, अबीर, गुलाल, स्वच्छ मिट्टी, थाली, कटोरी, जल, ताम्र कलश, रूई, नारियल आदि चीजों की जरूरत पड़ती है। इसलिए कोशिश करें कि इन पूजन साम्रगी को एकत्र पहले से ही कर लें। एक मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बना कर उसके गले में मौली बांध कर उसके नीचे गेहूं या चावल डाल कर रखें और उसके बाद उस पर नारियल भी रख दें। इसके बाद मां दुर्गा की उपासना करें। अंत में देवी को प्रसाद का भोग लगाकर और इसे लोगों के बीच बांटकर पूजन का समापन करें।

मंत्र:
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्।।

इस मंत्र का अर्थ है- देवी शैलपुत्री जो वृषभ पर विराजमान हैं, जिनके दाहिने हाथ में त्रिशूल शोभित है और बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है, वही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। आपको कोटि-कोटि नमस्कार है।
अन्य मंत्र:
रक्षा हेतु
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।

सुंदर पत्नी हेतु
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

गरीबी हटाने हेतु
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाद्र्रचिता।।

रोग नाश हेतु
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।

विपत्ति नाश के लिए मंत्र
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद
प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।

पूजन सामग्री: लाल रंग का आसन, मिट्टी का पात्र और जौ, साफ की हुई मिट्टी, मिट्टी का ढक्कन, पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी, सिंदूर, फूल और फूल माला, नवरात्र कलश, जल से भरा हुआ कलश, लाल सूत्र, मौली, इलाइची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, साबुत चावल और सिक्के, अशोक या आम के पांच पत्ते,अखंड ज्योति के लिए- साफ किया हुआ मिट्टी या पीतल का दीया, रूई की बत्ती, रोली या सिंदूर और अरवा चावल, हवन के लिए- हवन कुंड, लौंग का जोड़ा, कपूर, सुपारी, गुग्गुल, लोबान, घी, पांच मेवा, चावल इत्यादि।

सावधानियां: 

  • शास्त्रों के अनुसार भक्तों को नवरात्रि में व्रत के दौरान बाल और दाढ़ी भूलकर भी नहीं कटवाना चाहिए।
  • अगर नवरात्रि में कलश की स्थापना आप करते हैं और अखंड ज्योति भी जला रहे हैं, तो इस समय घर को खाली छोड़कर कहीं नहीं जाएं।
  • नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक नींबू काटना बहुत अशुभ होता है।
  • विष्णु पुराण के अनुसार नवरात्रि में व्रत के दौरान दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का शुभ फल नहीं मिलता है।
  • नवरात्रि पर चमड़े से बनी हुए वस्तुएं जैसे: बेल्ट, बैग और जूते-चप्पल को घर में प्रयोग से बचना चाहिए।
  • नवरात्रि में प्याज, लहसुन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
  • नवरात्रि के व्रत के दौरान पूरे नौ दिन काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
  • नवरात्रि के उपवास के दौरान अनाज और नमक का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

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Highlights

    05:44 (IST)06 Apr 2019
    9 देवियों को प्रसन्न करें इन मंत्रों का जाप

    कहा जाता है किअगर भक्तगण चैत्र नवरात्र के 9 दिनों तक 9 देवियों को जाप प्रसन्न करते हैं तो उन्हें मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। 9 देवियों को प्रसन्न करने के लिए आप इस मंत्र का जाप डेली करें। 

    ''या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:''

    ''कुमकुम भरे कदमों से आए माँ दुर्गा आपके द्वार,सुख संपत्ति मिले आपको अपार''

    22:11 (IST)05 Apr 2019
    ऐसे करें घट स्थापना

    घट स्थापना के लिये घर के ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा का चुनाव करना चाहिए। इसके लिये सबसे पहले घर के उत्तर-पूर्वी हिस्से की अच्छे से साफ-सफाई करके, वहां पर जल से छिड़काव करें और जमीन पर साफ मिट्टी या बालू बिछाएँ। फिर उस साफ मिट्टी या बालू पर जौ की परत बिछाएं। इसके बाद पुनः उसके ऊपर साफ मिट्टी या बालू की साफ परत बिछानी चाहिए और उसका जलावशोषण करना चाहिए। यहां जलावशोषण का मतलब है कि उस मिट्टी या बालू के ऊपर जल छिड़कना चाहिए। फिर उसके ऊपर मिट्टी या धातु के कलश की स्थापना करनी चाहिए।

    21:54 (IST)05 Apr 2019
    कलश स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त

    6 अप्रैल को यह अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस बार नवरात्र की कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में करना श्रेयष्कर है | लिहाजा, सारी शंका छोड़कर अभिजित मुहूर्त में, यानी दोपहर 11:40 से 12:25 के बीच अपने घट या कलश की स्थापना करें।

    21:24 (IST)05 Apr 2019
    पहले दिन होती है शैलपुत्री की पूजा

    नवरात्र का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है। इस दिन की पूजा भक्तों को आरोग्यता का वरदान देती है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि जो भक्त नवरात्र के पहले दिन गाय के शुद्ध देसी घी का भोग माता को लगाता है, वह भक्त जीवनभर निरोगी रहता है।

    20:55 (IST)05 Apr 2019
    इसलिए होती है कलश स्थापना

    कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। मान्यता है कि कलश स्थापना मां दुर्गा का आह्वान है और शक्ति की इस देवी का नवरात्रि से पहले वंदना शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इससे देवी मां घरों में विराजमान रहकर अपनी कृपा बरसाती हैं।

    20:24 (IST)05 Apr 2019
    9 दिन तक मनता है नवरात्र

    उत्तर में हिन्दू नववर्ष को नवरात्र के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है इस दिन देवी के नौ रूपों के दर्शन हुए थे इसलिए नववर्ष के पहले दिन से नौ दिन तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। लोग 9 दिन माता की पूजा-अर्चना कर व्रत रखते है। कहते है इन 9 दिनों जो भी सच्चे मन से माता के व्रत रखता है मां दुर्गा उसकी सभी मनोकामना पूरी करती है।

    19:55 (IST)05 Apr 2019
    नवरात्रि की अंखड ज्योति

    नवरात्रि की अखंज ज्योति का बहुत महत्व होता है। नवरात्रि में मंदिरों और घरों में दिन-रात जलने वाली ज्योति जलाई जाती है। माना जाता है कि हर पूजा दीपक के बिना अधूरी है और ये ज्योति ज्ञान, प्रकाश, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होती है।

    19:28 (IST)05 Apr 2019
    जानिए क्या है नवरात्रि का महत्व

    हिन्‍दू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्‍व है। नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग देवी के नौ रूपों की आराधना कर उनसे आशीर्वाद मांगते हैं। मान्‍यता है कि इन नौ दिनों में जो भी सच्‍चे मन से मां दुर्गा की पूजा करता है उसकी सभी इच्‍छाएं पूर्ण होती हैं।

    18:57 (IST)05 Apr 2019
    मां के श्रृंगार का सामान

    माता के श्रृंगार का सामान बेहद जरूरी है। इसमें आप लाल चुनरी के साथ लाल चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, आलता और बिंदी, शीशा, कंघी भी शामिल करें।

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