Chaitra Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है। हर माह के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि आती है और हर का अपना-अपना महत्व है। लेकिन इनमें से चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या तिथि विशेष मानी जाती है, क्योंकि इस दिन स्नान-दान, पितरों का तर्पण करने के साथ-साथ विक्रम संवत 2082 का समाप्त हो जाएगा। चैत्र अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन इस बार चैत्र अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है है कि किस दिन अमावस्या तिथि पड़ रही है। आइए जानते हैं चैत्र अमावस्या की सही तिथि, स्नान-दान का समय सहित अन्य जानकारी…

कब है चैत्र अमावस्या 2026? (Chaitra Amavasya 2026 Date)

द्रिक पंचांग के अनुसार, 18 मार्च, बुधवार को सुबह 8 बजकर 26 मिनट पर अमावस्या तिथि आरंभ हो जाएगी, जो 19 मार्च, गुरुवार को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 19 मार्च को चैत्र अमावस्या मनाना सही होगा।

चैत्र अमावस्या 2026 मुहूर्त (Chaitra Amavasya 2026 Muhurat)

पितृ कर्म करने का समय- 18 मार्च, बुधवार 2026 को अपराह्न काल में
स्नान-दान का मुहूर्त- 19 मार्च, गुरुवार 2026 को सुबह 6 बजकर 53 मिनट

चैत्र अमावस्या पूजा विधि (Chaitra Amavasya 2026 Puja Vidhi)

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त या फिर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें। हो सके तो गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान कर लें।
इसके बाद एक तांबे के लोटे में सिंदूर, अक्षत और लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद अन्य देवी-देवताओं की विधिवत पूजा करें।

चैत्र अमावस्या पर करें पितरों का तर्पण

चैत्र अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व है। तर्पण के लिए तांबे के लोटे में जल लें और उसमें काले तिल तथा सफेद फूल डालें। इसके बाद कुशा घास की सहायता से श्रद्धा और विधि के साथ पितरों को तर्पण अर्पित करें। तर्पण के बाद पितरों की कृपा प्राप्त करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ सूक्त का पाठ करना शुभ माना जाता है। यदि स्वयं पाठ करना संभव न हो तो किसी योग्य ब्राह्मण या विद्वान से श्रद्धापूर्वक इसका श्रवण भी किया जा सकता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने के साथ-साथ श्राद्ध, पिंड दान आदि कार्य किए जाते हैं। इसे पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।

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चैत्र अमावस्या के साथ समाप्त होगा संवत 2082

बता दें कि 19 मार्च यानी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ विक्रम संवत 2083 आरंभ हो जाएगा। ऐसे में चात्र अमावस्या के साथ विक्रम संवत 2082 समाप्त हो जाएगा।

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डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।