Chaiti Chhath Kab Hai: हिंदू धर्म में छठ पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का एक महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, एक चैत्र महीने में और दूसरा कार्तिक माह में। इस दौरान श्रद्धालु चार दिनों तक कठिन व्रत रखते हैं और पूरे नियम व विधि के साथ सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रती स्नान करके शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद दूसरे दिन खरना की परंपरा निभाई जाती है। तीसरे दिन शाम के समय डूबते हुए सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को उषा अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छठ पर्व को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ करने से सूर्य देव और छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2026 में चैती छठ कब से शुरू होगा, नहाय-खाय से पारण तक की तिथियां और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
चैती छठ 2026 की तिथि (Chaiti Chhath 2026 Kab Hai)
वैदिक पंचांग के अनुसार इस वर्ष चैती छठ पूजा की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ होगी। इस दिन व्रती स्नान करके शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और व्रत की शुरुआत करते हैं। इसके अगले दिन 23 मार्च को खरना मनाया जाएगा। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद प्रसाद के रूप में रोटी और रसियाव (मीठी खीर) बनाकर ग्रहण करते हैं। इसके बाद 24 मार्च को डूबते हुए सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं 25 मार्च को उगते सूर्य को उषा अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही छठ पूजा का समापन होगा और व्रती पारण करके व्रत पूरा करेंगे।
चैती छठ 2026 का धार्मिक महत्व (Chaiti Chhath Significance)
हिंदू धर्म में चैती छठ का पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने और उन्हें अर्घ्य अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। चैती छठ के दौरान व्रती चार दिनों तक कठिन नियमों का पालन करते हैं और पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य देव तथा छठी मैया की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख, परिवार की खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
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