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भौमवती अमावस्या: जानें इस दिन का महत्व और कैसे करें पितरों को प्रसन्न

वैसे तो हर महीने की अमावस्या तिथि पितृकर्म के लिए श्रेष्ठ होती है, लेकिन आषाढ़ माह की अमावस्या का विशेष खास महत्व है। भगवान विष्णु का प्रिय आषाढ़ महीना पूजा-पाठ के लिहाज से भी खास होता है।

2 जुलाई को है भौमवती अवास्या।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल के प्रत्येक महीने में अमावस्या पड़ती है। 2 जुलाई को हिंदू माह आषाढ़ की अमावस्या पड़ रही है जिसे आषाढ़ी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। और मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा का महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि  इस दिन पितरों की पूजा अर्चना करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिल जाती है और उनका आशीर्वाद मिलता है। इस दौरान पितरों की शांति के लिए नदी तट पर बड़े-बड़े यज्ञ अनुष्ठान कराए जाते हैं। इसी कारण इस आषाढ़ अमावस्या को पितृकर्म अमावस्या भी कहा जाता है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 1 जुलाई को मध्यरात्रि रात 3.05 बजे से।

अमावस्या समाप्त: 2 जुलाई को मध्यरात्रि में 00.46 बजे तक।

वैसे तो हर महीने की अमावस्या तिथि पितृकर्म के लिए श्रेष्ठ होती है, लेकिन आषाढ़ माह की अमावस्या का विशेष खास महत्व है। भगवान विष्णु का प्रिय आषाढ़ महीना पूजा-पाठ के लिहाज से भी खास होता है। मान्यता है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन हमारे पितर अपने परिजनों से अन्न-जल ग्रहण करने आते हैं। इसलिए इस दिन स्नान और दान करने का विशेष महत्व कहा गया है। देव ऋषि व्यास के अनुसार इस तिथि में स्नान-ध्यान करने से गौ दान के समान पुन्य फल प्राप्त होता है। इस दिन पीपल के पेड़ और भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। साथ ही पीपल के पेड़ की परिक्रमा भी लगाई जाती है।

भौमवती अमावस्या के दिन पिंडदान आदि करने से पितरों के काम में हुआ त्रुटि दोष दूर हो जाता है। अमावस्या के दिन गरीबों, जरूरतमंदों को उनकी जरूरत की वस्तुएं दान करनी चाहिए। इन्हें भोजन करना चाहिए। यदि व्यक्ति के शनि ग्रह या मंगल ग्रह पीड़ित हों तो उसे आषाढ़ अमावस्या के दिन हनुमान मंदिर में चमेली के तेल, सिंदूर और चोला चढ़ाना चाहिए। इस दिन शनि की साढ़ेसाती की शांति के लिए शनि के मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व है। भगवान हनुमान को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इस दिन गाय, कुत्ते, कौए, भिखारी, कोढ़ी आदि को भोजन करवाना चाहिए। अमावस्या के दिन भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने से खुशहाली आती है। पितरों के मोक्ष के लिए इस दिन गंगा में उनके नाम की डुबकी लगाकर स्नान करना लाभकारी होता है।

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