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प्रदोष व्रत में संध्या पूजन का खास होता है महत्व, जानें व्रत कथा और इस आरती से करें महादेव को प्रसन्न

Bhaum Pradosha Vrat January: भौम प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए

पौष माह में प्रदोष व्रत आज यानी मंगलवार, 26 जनवरी को है

Bhaum Pradosha Vrat Katha and Aarti: पौष माह में प्रदोष व्रत आज यानी मंगलवार, 26 जनवरी को है। प्रदोष व्रत हर माह में दो बार पड़ता है, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत होने से इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। भौम प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को प्रिय होती है। मान्यता है कि की पूजा करने से भक्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, माना जाता है कि उनके आशीर्वाद से कर्ज से मुक्ति मिलने के भी योग बनते हैं।

किस मुहूर्त में करें पूजा: 

त्रयोदशी तिथि की शुरुआत – 25 जनवरी दिन सोमवार को देर रात 12 बजकर 24 मिनट पर।

त्रयोदशी तिथि की समाप्ति – 26 जनवरी को देर रात 01 बजकर 11 मिनट पर।

त्रयोदशी व्रत कथा: धर्म पुराणों के मुताबिक पुराने समय में एक बूढ़ी महिला थी। वह भगवान शिव और हनुमान जी की परम भक्त थी। उनका एक बेटा था। एक दिन बजरंगबली ने वृद्धा की भक्ति का इम्तेहान लेने के लिए साधु का रूप लिया। हनुमान जी उस बूढ़ी महिला के घर के बाहर जाकर कहने लगे कि कोई हनुमान भक्त है तो बाहर आए। इतना सुनते ही वृद्धा ने घर से बाहर आकर साधु जी को प्रणाम किया। साधु ने वृद्धा से कहा – हमें बहुत भूख लगी है कुछ खाने को दो।

वृद्धा जब भोग लेने के लिए घर के अंदर जाने लगी तब साधु बोले कि ‘हम तुम्हारे बेटे की पीठ पर बना भोजन ही ग्रहण करेंगे।’ यह सुनकर उस बुजुर्ग महिला को बेहद हैरानी हुई लेकिन वह संत को दुखी नहीं करना चाहती थी इसलिए उसने अपने बेटे को बुलाया और साधु ने उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाया।

वृद्धा का मन बहुत दुखी था। वह वापस अपने घर के अंदर लौट गई। थोड़ी देर बाद साधु ने वृद्धा को आवाज लगाकर बुलाया और कहा कि ‘अपने बेटे को भी बुलाओ वह भी हमारे साथ भोजन करेगा।’ इतना सुनकर वृद्धा रोने लगी लेकिन फिर भी साधु के बार-बार कहने पर उन्होंने अपने बेटे को आवाज लगाई। आवाज सुनते ही उनका बेटा जीवित हो गया। तब से ही भौम प्रदोष व्रत को बहुत प्रभावशाली माना जाता है।

भगवान शिव की आरती: 

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ॐ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ॐ॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ॐ॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ॐ॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकर्ता ॥ॐ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ॐ॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ॐ॥

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