Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन गणेश जी की पूजा करने से तमाम बाधाएं, कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि, धन-संपदा की प्राप्ति होती है। इस साल भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च शुक्रवार को रखा जा रहा है। इस दिन गणेश जी की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे गणपति बप्पा अति प्रसन्न होते हैं और आपकी हर एक मुसीबत हर लेते हैं। आइए जानते हैं भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की संपूर्ण व्रत कथा…
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी तिथि (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Date)
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ – 6 मार्च शाम 7 बजकर 53 मिनट पर
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त- 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट पर
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय 6 मार्च को रात 9 बजकर 31 मिनट होगा।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026 व्रत कथा (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha)
पुराणों के अनुसार, एक बार सभी देवता संकट में घिर गए और परेशान होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। उस समय भगवान शिव और माता पार्वती अपने दोनों पुत्र कार्तिकेय और गणेश जी के साथ मौजूद थे। देवताओं की समस्या सुनकर भगवान शिव ने अपने पुत्रों से कहा कि तुम दोनों में से इनकी समस्याओं का निवारण कौन कर सकता है। ऐसे में दोनों ने एक ही स्वर में खुद को योग्य बताया।
भगवान शिव असमंजस में पड़ गए कि किसे ये कार्य सौंपा जाए। तो ऐसे में भगवान शिव ने एक तरकीब निकाली और अपने पुत्रों से कहा तुम दोनों में से जो सबसे पहले इस पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा कर आएगा, वही देवताओं की मदद करने जाएगा। शिव जी की बात सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठ कर निकल गए। लेकिन गणेश सोचने लगे कि मूषक पर बैठकर वह कैसे इतनी जल्दी पृथ्वी की परिक्रमा कर पाएंगे। बहुत सोच-विचार के बाद वे अपने स्थान से उठे और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करके अपने स्थान पर वापस बैठ गए और कार्तिकेय के आने का इंतजार करने लगे।
भगवान शिव ने गणेश जी से परिक्रमा न करने का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक है। उनके इस जवाब से भगवान शिव भी प्रसन्न हो गए और उन्हें देवता की मदद करने का कार्य सौंपा। साथ ही ये भी कहा कि हर चतुर्थी के दिन जो तुम्हारी पूजा और उपासना करेगा उसके सभी कष्टों का निवारण हो जाएगा। कहते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन व्रत कथा पढ़ने और सुनने से सभी कष्टों का नाश हो जाता है।
डिसक्लेमर- यह लेख पूरी तरह से ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित है। जनसत्ता इसकी सत्यता या इससे होने वाले किसी भी लाभ-हानि की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए पंचांग, शास्त्र या फिर किसी पंडित से अवश्य जानकारी लें।
