Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल भर में कुल 24 संकष्टी चतुर्थी पड़ती है। ऐसे में हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है और हर एक का अपना-अपना महत्व है। ऐसे ही चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। इसे  भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में खुशियां बनी रहती हैं। आइए जानते हैं भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, गणेश आरती से लेकर चंद्रोदय का समय …

Bhalchandra Sankashti Chaturthi Vrat Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर अवश्य पढ़ें ये व्रत कथा, विघ्यहर्ता गणेश जी कर सकते हैं हर परेशानी दूर

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कब है? (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Date)

द्रिक  पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 6 मार्च, शुक्रवार को शाम 7 बजकर 53 मिनट पर हो रहा है, जो 7 मार्च, शनिवार को शाम 7 बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो सकता है। बता दें कि  संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय के समय पूजा की जाती है। इसलिए इस साल भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी 6 मार्च को रखा जाएगा।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Moon Rise Time)

द्रिक पंचांग के अनुसार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय 6 मार्च को रात 9 बजकर 31 मिनट होगा।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी  2026 पूजा विधि (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Puja Vidhi)

  • इस दिन ब्रह्न मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें। इसके बाद शुद्ध कपड़े पहन लें। फिर पूजा आरंभ करें। सबसे पहले संकल्प लें।
  • इसके लिए हाथ में फूल, अक्षत लेकर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन उपवास रखने का निश्चय करें।
  • अब पूजा घर में या फिर एक चौकी में लाल या पीला कपड़े बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • सबसे पहले गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र करें। फिर भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा आरंभ करें।
  • गणेश जी को फूल, माला, रोली और दूर्वा अर्पित करें। इसके साथ ही भोग में मोदक या फिर लड्डू अर्पित करें।
  • इसके बाद धूप और घी का दीप जलाएं। इसके बाद ॐ गण गणपतये नमः मंत्र का श्रद्धा से जप करें।
  • इसके बाद व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। फिर विधिवत आरती कर लें।
  • दिनभर व्रत रखें।
  • शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के लिए एक लोटे में जल और दूध मिला लें। इसके बाद ंदन, फूल, माला, अक्षत, भोग लगाने के बाद आरती कर लें।
  • इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूर्ण करें।

संकष्टी चतुर्थी पर करें इन गणेश मंत्रों का जाप (Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Mantra)

ऊँ गं गणपतेय नम:
ऊँ गणाधिपाय नमः
ऊँ उमापुत्राय नमः
ऊँ विघ्ननाशनाय नमः
ऊँ विनायकाय नमः
ऊँ ईशपुत्राय नमः
ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
ऊँ एकदन्ताय नमः
ऊँ इभवक्त्राय नमः
ऊँ मूषकवाहनाय नमः
ऊँ कुमारगुरवे नमः

गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Aarti)

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥

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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व की जानकारी सामान्य मान्यताओं, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। संकष्टी चतुर्थी का समय और विधि अलग-अलग क्षेत्रों या परंपराओं में भिन्न हो सकती है। जनसत्ता इसकी पूर्ण सत्यता या सटीक परिणामों का कोई दावा नहीं करता है। किसी भी त्योहार की तिथि या पूजा विधि के बारे में अंतिम निर्णय लेने से पहले अपने क्षेत्र के विद्वान ज्योतिषी या पुरोहित से परामर्श अवश्य लें।