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पितरों की आत्म शांति के लिए इस दिन करें पिंड दान, तर्पण आदि धर्म कर्म; जानिए कब है भाद्रपद अमावस्या

इस माह की अमावस्या शनिवार को पड़ रहा है, इसलिए यह शनि अमावस्या भी है। इस दिन शनि देव और पितरों की पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं। जानिए भाद्रपद अमावस्या तिथि, मुहूर्त, योग आदि के बारे में-

पितरों की आत्म शांति के लिए इस दिन करें पिंड दान, तर्पण आदि धर्म कर्म; जानिए कब है भाद्रपद अमावस्या
भाद्रपद में कब है अमावस्या?

Bhadrapad Amavasya : हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि का पितरों की आत्मशांति, दान-पुण्य और कालसर्प दोष दूर करने के लिए विशेष महत्व है। चूंकि भाद्रपद मास भगवान श्री कृष्ण की भक्ति का महीना है, इसलिए भाद्रपद अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है।

इस अमावस्या पर धार्मिक उद्देश्यों के लिए कुश एकत्र किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन धार्मिक कार्यों, श्राद्ध आदि में प्रयुक्त घास को यदि एकत्र किया जाए तो वह पुण्य फलदायी होता है।

भाद्रपद अमावस्या 2022 तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 26 अगस्त शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू हो रही है यह तिथि शनिवार 27 अगस्त को दोपहर 01:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर भाद्रपद अमावस्या 27 अगस्त, शनिवार को है। इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितृ और शनि देव दोनों प्रसन्न होते हैं।

शिव योग में भाद्रपद अमावस्या

भाद्रपद अमावस्या के दिन शिव योग बनता है। इस दिन प्रात:काल से अगले दिन 28 अगस्त को प्रातः 02:07 बजे तक शिव योग है। इस योग में किया गया कार्य शुभ फल देता है। यह शुभ योग है। इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 11.57 बजे से दोपहर 12.48 बजे तक है। यह है आज का अभिजीत मुहूर्त। इस दिन का राहु काल सुबह 09:09 से सुबह 10:46 बजे तक है।

पिंडदान पितरों की शांति के लिए

भाद्रपद अमावस्या का दिन पितृ तर्पण के लिए बहुत अच्छा है। इसलिए इस दिन अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किसी नदी के किनारे पिंडदान और दान करें। इससे आपको पितृ दोष से मुक्ति मिलेगी। पितरों को पिंडदान करें और गरीबों को दान करें। कहते हैं ऐसा करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कालसर्प दोष दूर करने के उपाय

भाद्रपद अमावस्या के दिन जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उन लोगों को अमावस्या के दिन कालसर्प दोष का सुधार करवाना चाहिए। यह काल सर्प दोष के कारण होने वाले प्रभावों को कम करता है। कुंडली में राहु-केतु के कारण काल ​​सर्प दोष बनता है।

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