Best Plant For Balcony: वास्तु शास्त्र में घर की बालकनी काफी महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। जिस तरह से मुख्य द्वार का महत्व होता है वैसे ही इसे भी प्रवेश द्वार माना जाता है। जहां से खुली हवा आने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा आती है। इतना ही नहीं घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ मन शांत होता है और आंखों को भी सुकून मिलता है। अगर आप भी बालकनी में पौधे लगाने की सोच रहे हैं, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार जानिए किन पेड़-पौधों को लगाना लाभकारी हो सकता है। इससे घर में रहने वाले सदस्यों के बिजनेस, नौकरी, आर्थिक स्थिति से लेकर सेहत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है…
मनी प्लांट
वास्तु शास्त्र में मनी प्लांट को लक्ष्मी का पौधा कहा जाता है। इसे बालकनी में लगाने से वहां की खूबसूरती बढ़ेंगी। इसके साथ ही आर्थिक समृद्धि, सुख-शांति में बढ़ोतरी हो सकती हैं। इसके साथ ही ये हवा को शुद्ध करने में भी मदद करता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मनी प्लांट को बालकनी की उत्तर और पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कहते हैं कि मनी प्लांट की बेल जितना फैलती है और आपकी आर्थिक स्थिति भी उतनी मजबूत होती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इसे दक्षिण दिशा में बिल्कुल न रखें।
नौबजिया का पौधा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, नौबजिया का पौधा बालकनी में रखना शुभ माना जाता है। इसकी देखभाल भी कम करनी पड़ती है। इसके फूल काफी खूबसूरत होते हैं। इसे घर में लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी के साथ उत्साह, सुख-समृद्धि में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इसे सूर्य का पौधा माना जाता है। इसलिए इसे पूर्ण दिशा में रखने से मान-सम्मान और यश की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही उत्तर दिशा में रखने से करियर में नए रास्ते खुलने के साथ रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। इसे नौबजिया के अलावा मॉस रोज और पोर्टुलाका भी कहा जाता है।
तुलसी का पौधा
बालकनी में तुलसी का पौधा सबसे ज्यादा शुभ माजात है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बालकनी में तुलसी को लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है। इसके साथ ही मां लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की कृपा बनी रहती हैं। बालकनी में तुलसी का पौधा उत्तर-पूर्ण, उत्तर या फिर पूर्व दिशा में रखना लाभकारी हो सकता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इसके पास साफ-सफाई रखने के साथ कूड़ादान, जूते-चप्पल या फिर कांटेदार पेड़-पौधे बिल्कुल भी न रखें। इसके अलावा इसे दक्षिण दिशा में रखने की मनाही होती है।
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हरसिंगार का पौधा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बालकनी में हरसिंगार यानी पारिजात का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है। इसे पूर्व या फिर उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। ये पौधा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। इसके साथ ही घर में सुख-शांति कम होने के साथ मां लक्ष्मी का वास होता है। इसे कभी भी दक्षिण दिशा में न लगाएं। इसे बालकनी में लगाने से सौभाग्य की बढ़ोतरी हो सकती है।
गुड़हल का पौधा
बालकनी में गुड़हल का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है। ये सूर्य और मां लक्ष्मी को अति प्रिय है। इसे घर में लगाने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। इसके साथ ही पद-प्रतिष्ठा, मान-सम्मान में बढ़ोतरी के साथ घर में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। इसके साथ ही धन के मार्ग खुलते हैं। इसे घर के पूर्व, पश्चिम, दक्षिण, उत्तर दिशा में रखना लाभकारी माना जाता है। लेकिन नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में रखने की मनाही होती है।
बालकनी में पौधे लगाते समय ध्यान रखें ये वास्तु नियम
- कभी भी भारी वजन के गमले पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए।
- अगर आप फिश पॉंड बालकनी में रख रहे हैं, तो उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
- बालकनी मे कभी भी कांटेदार पौधे नहीं लगाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती हैं, जिससे घर में अशांति और परिवार के सदस्यों के बीच कलह हो सकती है।
- वास्तु के अनुसार बालकनी में दूध वाले पौधे भी लगाने से बचना चाहिए। इससे बरकत पर असर पड़ सकता है।
- गृह मुखिया के जन्म नक्षत्र के अनुसार पौधे लगाना उत्तम माना जाता है के अनुसार शुभ परिणाम प्रदायक होते हैं ।
- खुशबूदार फूल वाले पौधे बालकनी मे लगाना समृद्धि के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए छोटे आकार के पौधे लगाएं।
- बालकनी दक्षिण-पश्चिम दिशा में वजन वाले गमले रखना उचित है हल्के हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा मे रखना अपेक्षित रहेगा ।
- बालकनी को हमेशा साफ-सुथरा रखें और सुखे पत्तों को तुरंत हटा दें।
डिस्क्लेमर: यह लेख वास्तु शास्त्र, पारंपरिक मान्यताओं और लोक-विश्वासों पर आधारित है। इसमें बताए गए पौधों, दिशाओं और उनसे जुड़े लाभों का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। इन मान्यताओं के समर्थन में कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। किसी भी निर्णय को लेने से पहले अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों, आवश्यकताओं और विशेषज्ञ सलाह का ध्यान अवश्य रखें। पौधों का चयन करते समय उनकी देखभाल, स्थानीय जलवायु और उपलब्ध स्थान को भी ध्यान में रखें। किसी प्रकार के आर्थिक, स्वास्थ्य या व्यावसायिक लाभ की गारंटी नहीं दी जाती।
